कंपनियां

बैटरी कारोबार में Reliance और Adani दोनों की नजर, चीन की कंपनियां क्यों बनीं अहम?

जामनगर में बनने जा रहा भारत का सबसे बड़ा बैटरी हब, Reliance की बड़ी तैयारी

Published by
एजेंसियां   
Last Updated- May 19, 2026 | 12:30 PM IST

रिलायंस इंडस्ट्रीज अब भारत के तेजी से बढ़ते बैटरी और ग्रीन एनर्जी बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी में जुटी है। इसी दिशा में कंपनी चीन की दुनिया की सबसे बड़ी बैटरी बनाने वाली कंपनी CATL समेत कई ग्लोबल सप्लायर्स के साथ बातचीत कर रही है। खबरों के मुताबिक रिलायंस इन कंपनियों से बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम यानी BESS के लिए जरूरी पार्ट्स खरीदने पर चर्चा कर रही है।

यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब मुकेश अंबानी की कंपनी गुजरात के जामनगर में भारत का सबसे बड़ा एनर्जी स्टोरेज कॉम्प्लेक्स तैयार कर रही है। रिलायंस का लक्ष्य देश की तेजी से बढ़ती रिन्यूएबल एनर्जी जरूरतों में बड़ा रोल निभाना है। भारत ने 2030 तक 500 गीगावॉट रिन्यूएबल पावर क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है और इसके लिए बड़े बैटरी स्टोरेज सिस्टम बेहद अहम माने जा रहे हैं।

चीन की टेक्नोलॉजी पाबंदियों से बढ़ी मुश्किल

रिपोर्ट के मुताबिक रिलायंस पहले CATL के साथ ऐसी डील करना चाहती थी, जिसमें उसे चीन की कंपनी की बैटरी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने का मौका मिलता। इससे रिलायंस भारत में खुद लिथियम-आयन बैटरी सेल बना सकती थी। लेकिन ये बातचीत सफल नहीं हो पाई।

इसके बाद रिलायंस ने Xiamen Hithium नाम की चीनी कंपनी के साथ साझेदारी पर फोकस बढ़ाया, लेकिन वहां भी हाल के महीनों में कुछ अड़चनें सामने आई हैं।

असल चुनौती चीन की तरफ से बैटरी टेक्नोलॉजी एक्सपोर्ट पर बढ़ती सख्ती है। चीन अब अपनी एडवांस बैटरी टेक्नोलॉजी को दूसरे देशों के साथ आसानी से साझा नहीं करना चाहता। इसी वजह से रिलायंस अब खुद पूरी टेक्नोलॉजी हासिल करने की बजाय तैयार बैटरी सेल खरीदकर बड़े बैटरी सिस्टम बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।

जामनगर प्रोजेक्ट रिलायंस के लिए क्यों अहम?

जामनगर में बन रहा एनर्जी स्टोरेज कॉम्प्लेक्स रिलायंस के ग्रीन एनर्जी प्लान का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले समय में जैसे-जैसे सोलर और विंड एनर्जी बढ़ेगी, वैसे-वैसे बिजली स्टोर करने के लिए बड़े बैटरी सिस्टम की जरूरत भी बढ़ेगी।

BloombergNEF के मुताबिक भारत का एनर्जी स्टोरेज मार्केट 2035 तक 115 गुना बढ़ सकता है। अनुमान है कि 2035 तक यह बाजार 336.7 GWh तक पहुंच जाएगा। यही वजह है कि CATL जैसी बड़ी चीनी कंपनियां भारत के बाजार में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं।

दूसरी भारतीय कंपनियां भी दिखा रहीं दिलचस्पी

सिर्फ रिलायंस ही नहीं, बल्कि दूसरे बड़े भारतीय कारोबारी समूह भी चीन की बैटरी टेक्नोलॉजी में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी भी पिछले साल चीन में CATL के मुख्यालय गए थे और वहां की ऑटोमेटेड बैटरी फैक्ट्रियों का दौरा किया था।

वहीं CATL भी तेजी से दुनिया भर में अपना कारोबार बढ़ा रही है। कंपनी जर्मनी, हंगरी और स्पेन में नए प्लांट बना रही है। साथ ही अमेरिका में Ford और Tesla जैसी कंपनियों के साथ टेक्नोलॉजी लाइसेंसिंग मॉडल पर काम कर रही है।

रिलायंस ने क्या कहा?

रिलायंस की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि कंपनी लगातार नए कारोबारी अवसरों का आकलन करती रहती है। हालांकि कंपनी ने मीडिया रिपोर्ट्स और बाजार की अटकलों पर सीधे टिप्पणी करने से इनकार किया है। रिलायंस ने कहा कि जरूरत पड़ने पर स्टॉक एक्सचेंज को जरूरी जानकारी दी जाएगी। (ब्लूमबर्ग के इनपुट के साथ)

First Published : May 19, 2026 | 12:10 PM IST