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भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने फंड के कथित गलत इस्तेमाल के एक मामले में बजाज हिंदुस्तान शुगर लिमिटेड और उसके प्रवर्तकों शिशिर बजाज और कुशाग्र बजाज द्वारा उठाई गई शुरुआती आपत्तियों को खारिज कर दिया है। नियामक की यह जांच, ओजस इंडस्ट्रीज और बजाज पावर जेनरेशन के जरिये फंड के कथित गलत इस्तेमाल और वित्त वर्ष 2011 से 2022 के बीच संबंधित पक्षकार लेनदेन का कथित तौर पर खुलासा न करने से जुड़ी है।
सेबी ने पहले कहा था कि उसकी जांच में ओजस इंडस्ट्रीज के जरिये 318.5 करोड़ रुपये और बजाज पावर जेनरेशन के जरिये 870.6 करोड़ रुपये के फंड के गलत इस्तेमाल के प्रथम दृष्टया सबूत मिले हैं। इसके अलावा, सालाना रिपोर्टों में भी गुमराह करने वाली जानकारियां दी गई थीं।
कंपनी ने दलील दी थी कि आरबीआई के निर्देश पर किए गए कर्ज पुनर्गठन के दौरान डेलॉयट और मजर्स द्वारा किए गए फॉरेंसिक ऑडिट में फंड के किसी भी गलत इस्तेमाल या हेराफेरी का कोई सबूत नहीं मिला था। इसलिए इस मामले में आगे कार्रवाई करने का अधिकार क्षेत्र सेबी के पास नहीं है। हालांकि सेबी ने इस दलील को खारिज कर दिया।