प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
वित्त वर्ष 19 की तुलना में जनवरी 2026 तक देश में सक्रिय विदेशी कंपनियों की संख्या घट गई है। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों का बिजनेस स्टैंडर्ड ने विश्लेषण किया है जिसके अनुसार वित्त वर्ष 19 में 3,376 सक्रिय विदेशी कंपनियां थीं। यह संख्या जनवरी 2026 तक घटकर 3,293 रह गई, जबकि पंजीकृत विदेशी फर्मों की संख्या बढ़कर 5,311 हो गई है। इस तरह पंजीकृत विदेशी कंपनियों की संख्या की तुलना में सक्रिय विदेशी फर्मों की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 19 के 70 फीसदी से भी अधिक की तुलना में घटकर जनवरी 2026 तक 62 प्रतिशत रह गई है।
विदेशी कंपनी वह होती है, जो विदेश में पंजीकृत होती है लेकिन भारत में कारोबार करती है। हाल के वर्षों में जनरल मोटर्स और फोर्ड जैसी दिग्गज वाहन कंपनियों और सीमेंट विनिर्माता होल्सिम समेत कई हाई-प्रोफाइल कंपनियों के बाहर निकलने के बाद भारत में विदेशी कंपनियों की दिलचस्पी पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। सिटी ग्रुप जैसी अन्य कंपनियों ने भारत में अपना कामकाज कम कर दिया है। हाल में हार्ड रॉक इंटरनैशनल ने इस महीने ऐलान किया कि वह भारत में अपनी साझेदारी खत्म और 10 स्टोर बंद कर रही है। भारत में उसकी साझेदार जेएसएम कॉरपोरेशन ने कहा कि वह विकल्पों पर विचार कर रही है और आउटलेट खुले रखेगी।
वित्त वर्ष 26 की पहली तीन तिमाहियों के क्षेत्रवार आंकड़े उपलब्ध हैं। इनके अनुसार 52 नई पंजीकृत विदेशी कंपनियों में से केवल पांच ही विनिर्माण क्षेत्र में हैं। यह ऐसा क्षेत्र है जिसे बड़े स्तर पर रोजगार देने वाले क्षेत्र के रूप में देखा जाता है। समुदाय, सामाजिक और व्यक्तिगत सेवा क्षेत्र वाली कंपनियां की संख्या 32 है। बीमा क्षेत्र में सात और कारोबारी सेवाओं में दो कंपनियां थीं। वित्त, परिवहन, बिजली, गैस और जल से संबंधित क्षेत्रों में से हरेक में एक-एक कंपनी थी।
कंपनियों की संख्या में कुछ कमी का कारण कॉरपोरेट संरचना में बदलाव हो सकता है। विदेशी और देसी कंपनियों को सलाह देने वाली कानून क्षेत्र की कंपनी अल्फा पार्टनर्स के प्रबंध साझेदार अक्षत पांडे के अनुसार विदेशी कंपनियां भारत में परिचालन शुरू करने के लिए अपनी शाखाओं या संपर्क कार्यालयों को तरजीह देती हैं। इसकी झलक विदेशी कंपनियों के ज्यादा पंजीकरण में दिख सकती है।
उन्होंने कहा, ‘भारत में कई निवेशक बेहतर कारोबारी नियंत्रण और कर बेहतरी के लिहाज से सहायक कंपनियों को पंजीकृत करना पसंद करते हैं। अन्य मामलों में भारत में परिचालन का समेकन हो जाता है यानी छोटे संपर्क/परियोजना कार्यालयों को बंद करना, जबकि मुख्य सहायक कंपनियों या संयुक्त उद्यमों का विस्तार करना।’