Tata Sons Board Meeting: अगले हफ्ते टाटा ग्रुप की दो अहम बोर्ड मीटिंग होने जा रही हैं। टाटा ट्रस्ट्स की मीटिंग 8 जून को और टाटा संस की मीटिंग 12 जून को होगी। हालांकि इन मीटिंगों पर उद्योग जगत की नजर रहेगी, लेकिन फिलहाल ऐसा नहीं लग रहा कि कोई बड़ा फैसला लिया जाएगा।
टाटा ग्रुप में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा दो मुद्दों को लेकर है। पहला, क्या टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को तीसरा कार्यकाल मिलेगा? दूसरा, क्या टाटा संस शेयर बाजार में लिस्ट होगी? लेकिन सूत्रों के मुताबिक, इन दोनों मीटिंगों में इन मुद्दों पर औपचारिक चर्चा होने की संभावना कम है।
चंद्रशेखरन का मौजूदा पांच साल का कार्यकाल फरवरी 2027 तक है। टाटा ट्रस्ट्स, जिसके पास टाटा संस में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है, आमतौर पर ऐसे मामलों पर पहले विचार करता है। इसके बाद मामला टाटा संस बोर्ड के पास जाता है। जुलाई 2025 में टाटा ट्रस्ट्स ने एक प्रस्ताव पारित कर चंद्रशेखरन को तीसरा पांच वर्षीय कार्यकाल देने का समर्थन किया था। लेकिन इस बार उनकी नई अवधि पर चर्चा आगे खिसक सकती है।
दरअसल, फरवरी 2026 में हुई टाटा संस बोर्ड की मीटिंग में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन और टाटा संस बोर्ड के निदेशक नोएल टाटा ने एयर इंडिया और टाटा डिजिटल जैसी घाटे में चल रही कंपनियों के प्रदर्शन पर सवाल उठाए थे। उन्होंने यह भी कहा था कि इन कंपनियों के नतीजों का असर चंद्रशेखरन के अगले कार्यकाल पर पड़ सकता है।
सूत्रों के अनुसार, 8 जून को होने वाली टाटा ट्रस्ट्स की मीटिंग में सर रतन टाटा ट्रस्ट शामिल नहीं होगा। महाराष्ट्र चैरिटी आयुक्त के निर्देशों के कारण यह स्थिति बनी है। ऐसे में पुराने प्रस्तावों की समीक्षा या कोई नया प्रस्ताव पारित करना मुश्किल माना जा रहा है। यही वजह है कि चंद्रशेखरन के कार्यकाल पर चर्चा फिलहाल टल सकती है।
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पिछले महीने 26 मई को टाटा संस ने एक विशेष बोर्ड मीटिंग बुलाई थी, जिसमें ग्रुप की घाटे में चल रही कंपनियों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा की गई। यह मीटिंग फरवरी में नोएल टाटा द्वारा उठाए गए सवालों के बाद हुई थी। पिछले सप्ताह कई टाटा कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) ने बोर्ड के सामने अपनी कंपनियों के प्रदर्शन और भविष्य की रणनीति पर प्रस्तुति दी। सूत्रों का कहना है कि कुछ अन्य कंपनियों के प्रमुख भी जल्द बोर्ड के सामने अपनी योजनाएं पेश करेंगे।
टाटा संस की लिस्टिंग का मुद्दा भी लंबे समय से चर्चा में है। जुलाई 2025 में टाटा ट्रस्ट्स ने कंपनी को निजी ही बनाए रखने के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया था। हालांकि हाल के महीनों में ट्रस्ट के दोनों उपाध्यक्षों ने टाटा संस की लिस्टिंग का समर्थन किया है। वहीं, कंपनी के दूसरे सबसे बड़े शेयरधारक शापूरजी पालोनजी ग्रुप भी लिस्टिंग के पक्ष में है।
टाटा संस ने 2024 में रिजर्व बैंक से अनुरोध किया था कि उसे अपर लेयर कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (सीआईसी) की श्रेणी से बाहर किया जाए, क्योंकि उसने अपना कर्ज चुका दिया था। लेकिन रिजर्व बैंक ने अभी तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। इसी फैसले पर यह भी निर्भर करेगा कि टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट होना पड़ेगा या नहीं।