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TCS के CEO का बड़ा दावा, बुरा दौर खत्म! AI डील्स से आएगी तेजी, FY27 में ग्रोथ करेगी सरप्राइज

Tata Consultancy Services के CEO K Krithivasan के मुताबिक कंपनी की ग्रोथ पटरी पर लौट रही है और AI के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद भविष्य में नए अवसर बढ़ेंगे।

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शिवानी शिंदे   
Last Updated- April 13, 2026 | 8:02 AM IST

करीब दो साल के अंतराल के बाद टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में सभी सेगमेंट और बाजारों में वृद्धि दर्ज की। टीसीएस के प्रबंध निदेशक और सीईओ के कृत्तिवासन का मानना है कि चालू वित्त वर्ष  पिछले वित्त वर्ष 2026 से बेहतर होगा क्योंकि सौदों में तेजी आई है और एआई क्षेत्र में भी सौदे मिल रहे हैं। शिवानी शिंदे के साथ बातचीत में कृत्तिवासन ने कंपनी की वृद्धि, एआई टूल से खतरे और भर्तियों के रूझान पर चर्चा की। मुख्य अंश:

कंपनी की सालाना आय वृद्धि घटकर 2.4 फीसदी रह गई है, जो चिंता का कारण है। इस बारे में आप क्या कहेंगे?

सच कहूं तो आय में गिरावट से हम खुश नहीं हैं। लेकिन साथ ही आप देखें तो यह गिरावट साल की पहली तिमाही में पड़े असर की वजह से हुई है। पहली तिमाही के बाद से हम हर तिमाही में अच्छी वृद्धि कर रहे हैं। यह लगातार तीसरी तिमाही है जब हमने सकारात्मक वृद्धि हासिल की है। इससे हमें भरोसा है कि वित्त वर्ष 2027 में भी वृद्धि की रफ्तार बनी रहेगी।

आप यह भी कह रहे हैं कि बुरा दौर पीछे छूट चुका है तो इसका मतलब यह हुआ कि अब लोग खुल कर खर्च कर पाएंगे? ग्राहकों के खर्च के रुझान में कुछ बदलाव आ रहा है?

हम देख रहे हैं कि हमारे ग्राहकों में परियोजनाओं की प्रतिबद्धता और नई परियोजनाएं शुरू करने को लेकर ज्यादा आत्मविश्वास है। कुछ जगहों पर तो लागत कम करने वाली परियोजनाएं भी शुरू की जा रहे हैं क्योंकि आज के माहौल में अपनी मर्जी से शुरू की जाने वाली परियोजनाओं के लिए अक्सर दूसरी बचतों से ही पैसे जुटाने पड़ते हैं। कुल मिलाकर ग्राहकों में नई परियोजनाओं का ठेका देने में भरोसा बढ़ा है। यह कंपनी के कुल अनुबंध मूल्य में भी झलकता है। यह सब हमें इस बात का भरोसा दिलाता है कि अब मुश्किल दौर शायद पीछे छूट चुका है।

आपने जिक्र किया कि लंबी अवधि वाले सौदों की वापसी हो गई है। क्या इन सौदों में किसी तरह का बदलाव हुआ है, खास तौर पर एआई के
दृष्टिकोण से?

बड़े सौदे हमेशा कई चीजों का मिला-जुला रूप होते हैं। इनमें लागत कम करने का पहलू भी होता है और बदलाव लाने का पहलू भी। इसलिए हमने जो तीनों बड़े सौदे किए हैं वे सभी विस्तार वाले हैं, दो सौदे हमारे मौजूदा काम का ही विस्तार हैं जबकि तीसरे सौदे से नई आमदनी की उम्मीद है। लेकिन आप इन सभी सौदों को देखें तो हम अपने ग्राहकों के लिए बड़े बदलाव का वादा कर रहे हैं इसलिए बड़े सौदों में लागत कम करने और बदलाव लाने, दोनों ही पहलू शामिल होते हैं।

टीसीएस, एंथ्रोपिक और ओपनएआई दोनों से कई टूल अपना रहा है। ये टूल बिना मानवीय दखल के प्रक्रियाओं को स्वचालित कर सकते हैं। क्या आपको लगता है कि आप जैसे लोगों के लिए तब भी कोई भूमिका बाकी रहेगी? क्या यह चिंता की बात है?

हम इसे किसी चिंता के तौर पर नहीं देख रहे हैं। इसे लंबे समय के नजरिये से देखें। जब भी कोई परिवर्तनकारी तकनीक आती है तो यह डर रहता है कि वह नौकरियां छीन लेगी। लेकिन इतिहास गवाह है कि असल में होता यह है कि इससे उत्पादकता बढ़ती है और काम की कुल मात्रा में भी काफी बढ़ोतरी होती है। चाहे बिजली हो या भाप इंजन, इन तकनीकों ने आर्थिक गतिविधियों का विस्तार किया है और काम कम होने के बजाय बढ़ा है। इसलिए हमारा मानना है कि लंबे समय में एआई से आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और अधिक अवसर पैदा होंगे। मध्यम अवधि में सिस्टम इंटीग्रेटर को लेकर चिंता है क्योंकि ये टूल सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग को और अधिक उत्पादक बना देंगे। मान लीजिए कि उत्पादकता में 20 से 30 फीसदी का सुधार होता है। भले ही समय के साथ इसमें और सुधार हो फिर भी शुरुआत में, उद्यमों को इस उत्पादकता लाभ को हासिल करने में मदद के लिए सिस्टम इंटीग्रेटर की जरूरत पड़ेगी।

तीसरा पहलू खुद एआई से जुड़े फैसले लेना है। कंपनियों को यह तय करना होगा कि वे किन एलएलएम का इस्तेमाल करेंगी। क्या वे एक ही मॉडल का इस्तेमाल करेंगी या कई मॉडलों का? क्या वे एलएलएम को छोटे मॉडलों के साथ मिलाएंगी और इन सिस्टम का परीक्षण कौन करेगा और इनके ऊपर एजेंटिक लेयर कौन बनाएगा? इससे पूरी तरह से नई तरह की गतिविधियां सामने आती हैं। हमें कई ऐसे नए क्षेत्र दिख रहे हैं जहां हम अपना योगदान दे सकते हैं।

क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि इन टूल का इस्तेमाल बढ़ने से सिस्टम इंटीग्रेटर की जरूरत कम हो जाएगी?

ऐसा नहीं है। सच तो यह है कि इससे सिस्टम इंटीग्रेटर की जरूरत और बढ़ जाती है। हो सकता है कि कुछ जगहों पर उत्पादकता में काफी सुधार हो। लेकिन जैसे-जैसे उत्पादकता बढ़ेगी, संगठन को और भी गहरी जानकारी की जरूरत होगी जिसके लिए अभी भी मानव की विशेषज्ञता की जरूरत पड़ती है। लेकिन सिस्टम इंटीग्रेटर कंपनी को इन तकनीक को अपनाने और उनका विस्तार करने में मदद करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

विश्लेषकों के साथ बातचीत में आपने बताया था कि टीसीएस ने स्थान तय कर लिया है। क्या आप बता सकते हैं कि वह कहां होगा? और क्या ओपनएआई आपका पहला ग्राहक होगा?

हमारी एएमडी के साथ पहले से ही साझेदारी है। हम अभी विशिष्टताओं को अंतिम रूप दे रहे हैं। एक बार उसके तय होने के बाद जगह भी तय हो जाएगी। यह 1-गीगावाॅट सेटअप वाली अकेली जगह नहीं होगी। यह शायद 4 से 5 जगहों पर फैली होगी जो काफी हद तक ग्राहक की प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगा।

कुछ मामलों में, खास तौर पर हाइपरस्केलर के लिए जगह से जुड़ी कुछ खास जरूरतें होती हैं। कभी-कभी वे अपने मौजूदा इन्फ्रास्ट्रक्चर के पास रहना पसंद करते हैं तो कभी वे थोड़ी दूरी रखना पसंद करते हैं। इसलिए इसमें कई चीजों को देखना होता है। मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा कि पहला ग्राहक कौन होगा क्योंकि अभी भी विशिष्टताओं और डिजाइन पर बातचीत चल रही है। हमें उम्मीद है कि साल 2028 से हाइपरवॉल्ट से आय मिलनी शुरू
हो जाएगी।

वित्त वर्ष 2027 के लिए फ्रेशरों की भर्ती का क्या लक्ष्य है?

पिछले साल हमने लगभग 44,000 प्रशिक्षुओं को काम पर रखा था। इस साल हमारी मानव संसाधन टीम अब तक 25,000 लोगों को नौकरी की पेशकश कर चुकी है। जैसे-जैसे साल आगे बढ़ेगा हम मांग का आकलन करते रहेंगे और उसी के अनुसार भर्ती करेंगे।

First Published : April 13, 2026 | 8:02 AM IST