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मिलेगी राहत, इस साल ज्यादा नहीं बढ़ेंगी आवश्यक दवाओं की कीमतें

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WPI में 0.005 प्रतिशत का बहुत ही मामूली परिवर्तन, अधिकांश कंपनियां सूचीबद्ध दवाओं की एमआरपी नहीं बढ़ाएंगी।

Last Updated- March 29, 2024 | 10:58 PM IST
Medicine

थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) में बदलाव के अनुरूप इस वर्ष आवश्यक दवाओं की कीमतों में इजाफा नहीं होगा। इससे उपभोक्ताओं को काफी राहत मिलेगी। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने बुधवार को जारी अधिसूचना में कहा कि कैलेंडर वर्ष 2022 के मुकाबले 2023 में डब्ल्यूपीआई में वार्षिक बदलाव 0.005 प्रतिशत हो सकता है।

औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ) 2013 के पैरा 16(2) के अनुसार डब्ल्यूपीआई के आधार पर दवा निर्माता सूचीबद्ध दवाओं का अधिकतम फुटकर मूल्य (एमआरपी) तय करते हैं। इसलिए आवश्यक औषधियों की राष्ट्रीय सूची (एनएलईएम) में शामिल दवाओं की कीमतें स्थिर रहने की संभावना है।

थोक मूल्य सूचकांक में बदलाव के अनुरूप औषधियों की कीमतें वर्ष 2022 में 10.7 और 2023 में 12.12 प्रतिशत बढ़ाने की इजाजत दी गई थी। यानी दो वर्षों में 10 से 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। आवश्यक औषधियों की राष्ट्रीय सूची के तहत आने वाली दवाएं एनपीपीए द्वारा नियंत्रित होती हैं। इस श्रेणी में शामिल दवाओं की कीमतों में वार्षिक स्तर पर परिवर्तन पिछले साल डब्ल्यूपीआई में पिछले साल हुए बदलाव के अनुरूप ही हो सकता है। गैर एनएलईएम औषधियों के मामले में कंपनियों को 10 फीसदी कीमतें बढ़ाने की इजाजत दी जाती है।

देश में औषधि विक्रेताओं की संस्था ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट ऐंड ड्रगिस्ट (एआईओसीडी) के महासचिव राजीव सिंघल ने कहा, ‘दवा की कीमतों में कोई बदलाव नहीं होने जा रहा। औषधि कंपनियों को अपने स्टॉक को रि-लेबल करने की आवश्यकता नहीं है। बाजार में अमूमन 90 दिन का स्टॉक होता है और इस साल सूचीबद्ध दवाओं की कीमतें स्थिर रहेंगी।’

भारतीय औषधि निर्माता एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विरांची शाह ने कहा कि इस वर्ष डब्ल्यूपीआई में बहुत ही मामूली (0.00551 प्रतिशत) बदलाव हुआ। इसलिए अधिकांश कंपनियां अपनी सूचीबद्ध दवाओं की एमआरपी नहीं बढ़ाएंगी। भारतीय औषधि संघ (आईपीए) के महासचिव सुदर्शन जैन ने कहा कि सरकार और उद्योग का जोर दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर है। जैन ने कहा, ‘भारतीय बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण हाल के दिनों में दवा की कीमतें बहुत अधिक नहीं बढ़ी हैं। इसलिए कंपनियां भी जितनी इजाजत उन्हें दी जाती है, औसतन उससे कम ही कीमतें बढ़ाती हैं।’

औषधि की कीमतों को लेकर सरकार का रुख काफी सख्त रहा है। आवश्यक औषधि की रष्ट्रीय सूची में शामिल 651 दवाऔं का मूल्य 1 अप्रैल 2023 से 6.73 प्रतिशत कम हुआ है, क्योंकि सरकार ने इन दवाओं की कीमतों पर अंकुश लगा दिया है।

एनपीपीए ने कहा कि मूल्य निर्धारित किए जाने के कारण 651 आवश्यक दवाओं के दाम पहले ही 16.62 प्रतिशत तक कम हो चुके हैं। इसी कारण पिछले साल 12.12 प्रतिशत बढ़ने के बाद 1 अप्रैल 2023 के बाद से इनमें 6.73 प्रतिशत की कमी आई है।

आवश्यक औषधियों की राष्ट्रीय सूची वर्ष 2022 में संशोधित की गई थी। इस सूची में अब लगभग 870 फॉर्मूला समेत 384 दवाएं हैं। एनएलईएम 2015 में 800 फॉर्मूला समेत 376 दवाएं शामिल थीं।

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First Published - March 29, 2024 | 10:58 PM IST

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