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Trump 2.0: भारतीय Pharma Stocks में निवेश का सुनहरा मौका या रिस्क

ट्रम्प 2.0 भारतीय फार्मा इंडस्ट्री के लिए नए अवसर और चुनौतियां दोनों लेकर आया है।

Last Updated- January 21, 2025 | 8:33 PM IST
Pharma and Healthcare stocks

डोनाल्ड ट्रम्प ने 20 जनवरी को शपथ लेने के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर अपना दूसरा कार्यकाल शुरू कर दिया है। उनके पहले कार्यकाल में भारतीय फार्मा इंडस्ट्री को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। यह समय इंडस्ट्री के लिए चुनौतीपूर्ण था, जहां न केवल अमेरिका बल्कि घरेलू बाजार में भी कई समस्याएं सामने आईं। अब जब ट्रम्प ने फिर से पदभार संभाल लिया है, तो सवाल उठता है कि उनका यह कार्यकाल भारतीय फार्मा सेक्टर के लिए कितना फायदेमंद होगा। इसका विश्लेषण ब्रोकरेज फर्म JM फाइनेंशियल ने किया है, तो आइए आपको रूबरू कराते हैं।

पहले कार्यकाल में क्या हुआ?

2017 से 2021 के दौरान, ट्रम्प के पहले कार्यकाल में भारतीय फार्मा इंडस्ट्री का प्रदर्शन कमजोर रहा। निफ्टी फार्मा इंडेक्स ने केवल 20% का रिटर्न दिया, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स ने इसी दौरान 80% रिटर्न हासिल किया। महामारी से पहले फार्मा इंडेक्स का प्रदर्शन और भी खराब था, जब यह -20% तक गिर गया। इसकी वजह थी अमेरिकी बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, कीमतों में गिरावट और FDA के सख्त नियम, जिससे भारतीय कंपनियों की लागत बढ़ गई।

ट्रम्प प्रशासन ने अपने पहले कार्यकाल में कई स्वास्थ्य नीतियां लागू कीं, जैसे कनाडा से दवाओं के आयात की अनुमति देना, इंसुलिन की कीमतों पर कैप लगाना और गाग क्लॉज का अंत करना। हालांकि, इन नीतियों का सीधा फायदा भारतीय फार्मा कंपनियों को नहीं मिला। इसके विपरीत, अमेरिका में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की ट्रम्प की योजना ने भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दीं।

दूसरे कार्यकाल में क्या होगा?

अब ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत हो चुकी है, और उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति जारी रहने की संभावना है। इसका मतलब यह है कि अमेरिका दवाओं के घरेलू उत्पादन पर जोर देगा। हालांकि, अमेरिका में दवाओं का उत्पादन महंगा है, जिससे बड़े पैमाने पर उत्पादन करना आसान नहीं होगा। इसके बावजूद, यह भारतीय फार्मा इंडस्ट्री के लिए एक चुनौती हो सकती है।

भारत के लिए क्या अवसर हैं?

दूसरी ओर, चीन पर अमेरिकी निर्भरता कम होने की संभावनाएं भारत के लिए एक बड़ा अवसर पैदा कर सकती हैं। चीन+1 रणनीति के तहत अमेरिका भारत को एक मजबूत साझेदार के रूप में देख सकता है। इसके अलावा, दवाओं की कीमतें कम रखने के लिए अमेरिकी कंपनियां भारतीय फार्मा कंपनियों से ज्यादा काम आउटसोर्स कर सकती हैं।

लेकिन चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं

हालांकि, चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। FDA के नियम और सख्त हो सकते हैं, जिससे भारतीय कंपनियों को अपनी उत्पादन प्रक्रिया में अधिक सुधार करना पड़ेगा। इसके अलावा, अमेरिका में दवा उत्पादन को बढ़ावा देने की योजना भी भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।

क्या करें निवेशक?

JM फाइनेंशियल की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प का दूसरा कार्यकाल भारतीय फार्मा इंडस्ट्री के लिए एक नया अध्याय हो सकता है। अगर भारतीय कंपनियां अपनी रणनीतियों को सही तरीके से लागू करती हैं, तो यह उनके लिए एक बड़ा मौका साबित हो सकता है। चीन पर निर्भरता कम होने और आउटसोर्सिंग बढ़ने के कारण भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर सकती हैं।

नया अध्याय शुरू हुआ है

ट्रम्प 2.0 भारतीय फार्मा इंडस्ट्री के लिए नए अवसर और चुनौतियां दोनों लेकर आया है। अब यह भारतीय कंपनियों पर निर्भर करता है कि वे इस मौके को कैसे भुनाती हैं और आने वाली चुनौतियों से कैसे निपटती हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारतीय फार्मा इंडस्ट्री ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में अपनी छाप छोड़ पाती है या नहीं।

First Published - January 21, 2025 | 6:20 PM IST

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