कंपनियां

उबर शटल के पहियों पर लगा नियामक ब्रेक, दिल्ली-कोलकाता के बाहर विस्तार बना ‘चुनौतीपूर्ण’

उबर इंडिया ने स्वीकार किया है कि कड़े नियमों और आर्थिक चुनौतियों के कारण उसके शटल कारोबार का विस्तार दिल्ली-कोलकाता के बाहर करना फिलहाल कठिन साबित हो रहा है

Published by
अविक दास   
Last Updated- March 06, 2026 | 10:20 PM IST

उबर इंडिया ने कहा है कि उसका शटल कारोबार चुनौतीपूर्ण रहा है क्योंकि उसे लगातार नियामकीय अवरोधों का सामना करना पड़ रहा है। ये बाधाएं दिल्ली और कोलकाता के अलावा अन्य जगह उसके परिचालन का विस्तार रोकती हैं।

राइड-हेलिंग क्षेत्र की इस दिग्गज कंपनी ने साल 2024 में बेंगलूरु में सेवा शुरू करने की योजना का ऐलान किया था। लेकिन अभी तक यह शुरू नहीं हो पाई है। हालांकि दिल्ली और कोलकाता में परिचालन चालू हैं, लेकिन उसे मुंबई और हैदराबाद में सेवाएं बंद करनी पड़ीं।

उबर इंडिया के अध्यक्ष प्रभजीत सिंह ने कंपनी की उबर इंटरसिटी बस सेवा शुरू करने की घोषणा के मौके पर कहा, ‘यह पोर्टफोलियो का हिस्सा है और हम नियामकीय दिशा, अर्थव्यवस्था तथा दक्षता के आधार पर लगातार पुनर्मूल्यांकन करते रहते हैं। यह छोटे स्तर की योजना है।’ जब उनसे पूछा गया कि क्या कंपनी के पास विस्तार की कोई ठोस योजना है, तो सिंह ने कहा कि इसके लिए कई कारण जिम्मेदार हैं।

Also Read: फरवरी में जमकर दौड़ी इलेक्ट्रिक गाड़ियां: दोपहिया और यात्री वाहनों की बिक्री में 40% से ज्यादा का उछाल

उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि इसमें कई कारक शामिल हैं, मुझे लगता है कि नियमन निश्चित रूप से उनमें से एक है और यह एक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र रहा है। इसलिए हम नजर रख रहे हैं, लगातार सीख रहे हैं और पहचान रहे हैं कि अलग-अलग योजनाओं के अलग-अलग नियामकीय और आर्थिक प्रोफाइल होंगे। इसलिए हमें इसका मूल्यांकन ही करना है।’ 

उबर शटल ने देश में कंपनी के मौजूदा परिवहन विकल्पों की रेंज में इजाफा किया है। इसमें कार, दोपहिया और तिपहिया शामिल हैं, जो उसकी मल्टी-मॉडल रणनीति का हिस्सा है। उबर टेक टीम ने उबर ऐप पर दूसरी योजनाओं की तरह ही शटल सेवा में रियल-टाइम ट्रैकिंग और नकदी रहित भुगतान जैसी खूबियां शामिल की हैं।

सिंह ने पहले कहा था कि सैन फ्रांसिस्को की यह कंपनी दोपहिया और तिपहिया परिवहन श्रेणी पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जो उसकी सबसे तेजी से बढ़ने वाली श्रेणी है, जबकि बाइक टैक्सी अब भी कई भारतीय राज्यों में नियामकीय जांच के दायरे में है।

First Published : March 6, 2026 | 10:20 PM IST