अनिल अग्रवाल, चेयरमैन, वेदांत ग्रुप (फाइल फोटो)
Vedanta Demerger: मेटल और माइनिंग सेक्टर की दिग्गज कंपनी वेदांता लिमिटेड (Vedanta Limited) का पांच अलग-अलग कंपनियों में डीमर्जर हुआ है। इनमें एल्युमीनियम, ऑयल एंड गैस, पावर, आयरन एंड स्टील और वेदांता शामिल हैं। इस कॉर्पोरेट कदम का सीधा असर कंपनी के 20 लाख से अधिक शेयरधारकों की होल्डिंग पर पड़ा है। डीमर्जर के बाद वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने शेयरधारकों को लेटर लिखकर भविष्य का प्लान बताया है।
वेदांत लिमिटेड का डीमर्जर (Demerger), जो 1 मई 2026 (रिकॉर्ड डेट) से लागू हो गया है। इसका मतलब है कि अब कंपनी के अलग-अलग बिजनेस, अपनी-अपनी स्वतंत्र कंपनियां बनेंगी। हर कंपनी अपने क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से काम करेगी। रिकॉर्ड डेट से यह तय हुआ कि किन निवेशकों को नई बनने वाली कंपनियों के शेयर मिलेंगे। वेदांत के शेयरों की कीमत कंपनी के पांच हिस्सों में डीमर्जर के बाद एडजस्ट हो गई है।
शेयरधारकों को लिखे लेटर में अनिल अग्रवाल ने कहा कि वेदांता एक नए और उत्साह से भरे दौर में प्रवेश कर रही है, जहां मजबूत प्रदर्शन के साथ बड़े बदलाव भी हो रहे हैं। अब विकास का अगला चरण शुरू होने जा रहा है और इस यात्रा में शेयरधारक हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं। समूह हमेशा शेयरधारकों के भरोसे पर खरा उतरने का प्रयास करता है।
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उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026 कंपनी के लिए बहुत खास रहा। इस साल कंपनी ने अब तक का सबसे अधिक प्रॉफिट कमाया, यानी टैक्स के बाद ₹25,096 करोड़ का प्रॉफिट और ₹1,74,075 करोड़ की कुल आय हुई। यह सब संभव हुआ क्योंकि सभी बिजनेस ने मिलकर दमदार प्रदर्शन किया। इसका सीधा लाभ शेयरधारकों को भी मिला है। कुल शेयरधारक रिटर्न लगभग 50% रहा, जो इस क्षेत्र के औसत से काफी बेहतर है। साथ ही, कंपनी ने 34 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड भी दिया ।
अनिल अग्रवाल ने लेटर में बताया, ”कंपनी की कोशिश रही है कि कारोबार की नींव मजबूत हो, ताकि आगे भी अच्छे और स्थिर रिटर्न मिलते रहें। कर्ज की स्थिति भी पहले से बेहतर हुई है, जिससे कंपनी आगे और अच्छे से बढ़ सकती है।”
बता दें, वेदांता का डीमर्जर ऐसे समय हो रहा है जब कंपनी के कर्ज को लेकर निवेशकों की चिंता लंबे समय से बनी हुई है। खास तौर पर प्रमोटर कंपनी वेदांत रिर्सोसेज लिमिटेड (VRL) पर ज्यादा कर्ज था। पिछले कुछ सालों में VRL ने काफी कर्ज लिया था, जिससे उसके सामने कर्ज चुकाने और नए कर्ज लेने की चुनौती खड़ी हो गई थी। इस कर्ज को चुकाने के लिए VRL, वेदांत लिमिटेड से डिविडेंड और ब्रांड फीस के जरिए पैसा लेता था। इसका मतलब यह हुआ कि लिस्टेड कंपनी वेदांत पर भी कर्ज का बोझ बढ़ता गया।
ICICI सिक्युरिटीज के मुताबिक, VRL का बाहरी कर्ज FY22 में 9 अरब डॉलर से घटकर Q3FY26 तक 4.8 अरब डॉलर रह गया है। लेकिन इसी दौरान Vedanta Ltd का कर्ज काफी बढ़कर 20,600 करोड़ रुपये से 60,600 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यही वजह थी कि निवेशकों को लगने लगा था कि कंपनी के मुख्य बिजनेस से आने वाला पैसा समूह के कर्ज चुकाने में इस्तेमाल हो रहा है।
Vedanta Aluminium के बारे में अनिल अग्रवाल ने लेटर में कहा कि वेदांत एल्युमीनियम US, यूरोप, मिडिल ईस्ट, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका में सबसे बड़ा एल्युमीनियम उत्पादक बने रहने की मजबूत स्थिति में है। कंपनी का लक्ष्य है कि उत्पादन क्षमता को दोगुना कर 60 लाख टन सालाना किया जाए। बेहतरीन बैकवर्ड इंटीग्रेशन और करंट एडवांटेज के कारण कंपनी दुनिया भर में कम लागत पर उत्पादन करते हुए हाई क्वालिटी को बनाए रखती है। कंपनी इन्फ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रिफिकेशन, एयरोस्पेस और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों की जरूरतों को लगातार पूरा कर रहे हैं।
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Vedanta oil & gas और Vedanta Power पर उन्होंने लिखा कि वेदांता ऑयल एंड गैस भारत का एक प्रमुख प्राइवेट सेक्टर अपस्ट्रीम प्लेयर है, जिसके पास हाई क्वॉलिटी का वैश्विक पोर्टफोलियो और बेहतरीन रिजर्व हैं। कंपनी का लक्ष्य है कि करीब 5 अरब डॉलर के निवेश के साथ उत्पादन 300,000 से 500,000 बैरल प्रति दिन के बीच किया जाए, ताकि भारत के ऊर्जा क्षेत्र में हमारी हिस्सेदारी और बढ़े। करीब दस साल पहले केर्न का मूल्य मूल्य $14.5 बिलियन था। जब वेदांत ने केर्न का अधिकग्रहण किया था तब उसका मार्केट कैपिटलाइजेशन उसके एसेट मूल्य का आधा था।
दूसरी ओर, वेदांता पावर भारत की तेजी से बढ़ती पावर कंपनियों में से एक बन रही है। अभी 4.2 GW ऑपरेशनल कैपेसिटी है और 12 GW का एक्सपेंशन पाइपलाइन में है। इसमें कोयले की सुनिश्चित व्यवस्था होगी। साथ ही कंपनी हाइड्रो और परमाणु ऊर्जा में भी आगे बढ़ेगी, जिससे क्लीन एनर्जी पोर्टफोलियो मजबूत होगा। यह देश की शीर्ष 3 पावर कंपनियों में शामिल होने की दावेदार होगी।
Vedanta Iron & Steel के बारे में अनिल अग्रवाल ने कहा कि यह भविष्य के लिए तैयार ग्रीन स्टील और स्पेशियलिटी स्टील कंपनी के रूप में विकसित हो रही है। इसका ध्यान कच्चे माल की उपलब्धता, इंटीग्रेटेड ऑपरेशंस और विस्तार पर है। अभी इस्पात उत्पादन क्षमता 40 लाख टन सालाना है (गोवा और बोकारो), जिसे बढ़ाकर 100 लाख टन सालाना किया जाएगा। गोवा, ओडिशा और कर्नाटक में क्षमता विस्तार और खनन से जुड़ी मजबूती इसे आगे बढ़ाएगी। इससे भविष्य में क्षमता 150 लाख टन सालाना तक बढ़ सकती है।
वेदांता लिमिटेड पर अग्रवाल ने लिखा, समूह की पैरेंट कंपनी वेदांता लिमिटेड है। यह हिंदुस्तान जिंक में करीब 60% हिस्सेदारी रखेगी। हिंदुस्तान जिंक देश की बड़ी और एकमात्र जिंक, लेड और सिल्वर उत्पादक है। यह क्रिटिकल मिनरल्स पर भी काम कर रही है, जो भारत की आत्मनिर्भरता के लिए जरूरी है। वेदांता लिमिटेड के इंटरनेशनल बिजनेस वेदांत इंटरनेशनल (VZI) भी होगा, जिसके आधे अफ्रीका और नामीबिया में व्यापारिक एसेट्स हैं। वेदांता लिमिटेड का कॉपर व्यवसाय भारत के 35% मार्केट की जरूरत पूरी करता है और फेरो एलॉयज व्यवसाय भी लगातार बढ़ रहा है। वेदांता लिमिटेड भारत का एकमात्र निकल उत्पादक भी है। कॉपर और निकल दोनों भारत के भविष्य के लिए जरूरी मिनरल्स हैं।
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अनिल अग्रवाल ने शेयरधारकों को भविष्य के प्लान के बारे में बताया। उन्होंने लेटर में लिखा कि कंपनी भविष्य के लिए निवेश कर रही है। ₹15,000 करोड़ ग्रोथ कैपेक्स में लगाए गए हैं, जिससे एल्युमिनियम, जिंक, ऑयल एंड गैस और नए व्यवसायों में क्षमता बढ़ रही है और आगे की उन्नति के लिए ठोस आधार तैयार हो रहा है। भविष्य के लिए हमारी सोच एक प्रगतिशील, बढ़ते और भरोसेमंद वेदांता समूह बनाना है।
उन्होंने कहा, ”हम बड़े स्तर पर काम बढ़ाने, कम लागत बनाए रखने, समझदारी से निवेश करने और लगातार आमदनी बढ़ाने पर ही ध्यान नहीं दे रहे हैं। साथ ही टेक्नोलॉजी और एआई (AI) का इस्तेमाल करके अपने काम को और बेहतर और नया बना रहे हैं।”
इस डीमर्जर के अंतर्गत वेदांता के शेयरधारकों को चार नई कंपनियों के शेयर 1:1 अनुपात में मिलेंगे। यानी हर पात्र शेयरधारक को प्रत्येक नई कंपनी का एक-एक शेयर मिलेगा। हालांकि, इन चार कंपनियों के शेयर फिलहाल डिमैट खाते में फ्रीज रहेंगे और इनमें ट्रेडिंग की अनुमति नहीं होगी।
पैरेंट कंपनी वेदांता लिमिटेड में जिंक/सिल्वर और बेस मेटल का कारोबार रहेगा और इसमें सामान्य रूप से ट्रेडिंग जारी रहेगी। इस तरह अब एक वेदांता शेयरधारक को कुल पांच कंपनियों में बराबर हिस्सेदारी मिलेगी। जैसे ही इन चार कंपनियों की लिस्टिंग होगी, निवेशकों का पोर्टफोलियो सामान्य रूप से एडजस्ट हो जाएगा। वेदांता रिसोर्सेज की सीईओ देशनी नायडू के मुताबिक, कंपनी इस सप्ताह स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिंग के लिए आवेदन करेगी और जून के मध्य तक शेयरों की लिस्टिंग और ट्रेडिंग शुरू होने की उम्मीद है।