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Vedanta Resources को कर्ज चुकाने के लिए परिसंपत्ति या हिस्सेदारी बेचने की जरूरत

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कंपनी अपने विभिन्न कारोबारों को शेयर बाजार में अलग से सूचीबद्ध कराने पर विचार कर रही है

Last Updated- October 02, 2023 | 11:01 PM IST
vedanta demerger

भारत में सूचीबद्ध वेदांत लिमिटेड को छह सूचीबद्ध कंपनियों में बांटने की वेदांत समूह की योजना उसकी प्रवर्तक इकाई वेदांत रिसोर्सेस की कर्ज समस्या का समाधान नहीं करेगी। ऐसे में विश्लेषकों का कहना है कि कर्ज अदायगी के लिए प्रवर्तकों को और परिसंपत्ति या हिस्सेदारी बेचने की जरूरत पड़ेगी।

वेदांत पहले ही अपने आयरन-स्टील डिविजन व तांबा संयंत्र के विनिवेश का आकलन कर रही है, लेकिन इसके आकार और आय प्रोफाइल को देखते हुए यह शायद ही वेदांत रिसोर्सेस की फंडिंग की कमी का समाधान कर पाएगी।

कोटक इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों ने कहा, कंपनी अपने विभिन्न कारोबारों को अलग से सूचीबद्ध कराने पर विचार कर रही है, जो शायद ही बहुत ज्यादा वैल्यू अनलॉक कर पाएगी। अन्य कारोबारों के विनिवेश या और हिस्सेदारी बिक्री आखिरी रास्ता है ताकि वेदांत व वीआरएल वित्त वर्ष 2025 के लिए फंडिंग की कमी पूरी कर सके।

वीआरएल का 3.6 अरब डॉलर का कर्ज भुगतान वित्त वर्ष 2025 में होना है, जिसमें 2.2 अरब डॉलर का बॉन्ड शामिल है और यह 3.1 अरब डॉलर का भारी भरकम फंडिंग गैप सामने रखता है। आर्थिक हालात के चलते पुराने बॉन्ड के बदले नया बॉन्ड चुनौतीपूर्ण होगा और यह वीआरएल को वैकल्पिक साधनों मसलन परिसंपत्तियों की बिक्री या प्रवर्तकों की हिस्सेदारी बिक्री की ओर जाने को बाध्य कर सकता है। रिपोर्ट में ये बातें कही गई है।

वित्त वर्ष 2023 में वेदांत और हिंदुस्तान जिंक की तरफ से भारी-भरकम लाभांश ने वीआरएल के कर्ज को वेदांत लिमिटेड की ओर शिफ्ट कर दिया और उसका शुद्ध लाभ/एबिटा वित्त वर्ष 2024 में बढ़कर 4.7 गुना हो गया। पूंजीगत खर्च में इजाफे के कारण उच्च लिवरेज और ऋणात्मक नकदी प्रवाह बताता है कि बड़ा लाभांश अब वेदांत लिमिटेड के पीछे चला गया है।

अभी वेदांत की क्षमता विस्तार वाली अहम परियोजनाएं मसलन बाल्को का एल्युमीनियम स्मेल्टिंग क्षमता बढ़ाकर 10 लाख टन सालाना करने और स्टील की क्षमता 30 लाख टन करने का मामला क्रमश: वित्त वर्ष 25 की पहली तिमाही व वित्त वर्ष 2024 के आखिर में पूरा होगा।

लेकिन विश्लेषकों ने कहा कि बाल्को व स्टील परियोजना के पूंजीगत खर्च का क्रमश: 91 फीसदी व 75 फीसदी खर्च नहीं हुआ है, जिसे वे परियोजना पूरी होने में और देरी के जोखिम के तौर पर देख रहे हैं और इससे वॉल्यूम के अनुमान में कटौती की है।

क्रेडिटसाइट्स के विश्लेषकों ने कहा कि वीआरएल अपनी फंडिंग की खाई को पाटने के लिए विभिन्न विकल्पों मसलन विभिन्न बैंक जमाओं में 1.7 अरब डॉलर के निवेश, कोटेड बॉन्ड व म्युचुअल फंड का इस्तेमाल कर सकती है, जिसे जरूरत के समय भुनाया जा सकता है।

वेदांत लिमिटेड अपनी हिंदुस्तान जिंक की 3.9 फीसदी बाकी बची प्रवर्तक हिस्सेदारी को गिरवी रखकर अनुमानित तौर पर 25 करोड़ डॉलर पा सकती है और कंपनी होल्डिंग कंपनी के स्तर पर या तो वेदांत लिमिटेड की हिस्सेदारी बेचकर या हिस्सेदारी गिरवी रखकर रकम जुटा सकती है।

क्रेडिटसाइट्स के विश्लेषकों ने कहा, हमें लगता है कि वीआरएल का समय पर कर्ज पुनर्भुगतान अभी तक उसकी तरफ से चुकाने की इच्छा बता रही है और इससे मौजूदा बैंकों व निजी लेनदारों से उधारी को लेकर सहारा मिल सकता है।

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First Published - October 2, 2023 | 11:01 PM IST

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