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गारंटी मिले तभी देंगे Vodafone Idea को कर्ज, बैंक मांग रहे प्रमोटर सपोर्ट

वा​णि​ज्यिक बैंकों ने दूरसंचार ऑपरेटर वोडाफोन आइडिया (वी) के 35,000 करोड़ रुपये के कर्ज के अनुरोध पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है

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सुब्रत पांडा   
गुलवीन औलख   
Last Updated- May 06, 2026 | 10:06 PM IST

वा​णि​ज्यिक बैंकों ने दूरसंचार ऑपरेटर वोडाफोन आइडिया (वी) के 35,000 करोड़ रुपये के कर्ज के अनुरोध पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। बैंक अभी भी कंपनी या उसके प्रवर्तकों से पर्याप्त आश्वासन चाहते हैं। इसके साथ ही वे समूह की कंपनियों से गारंटी या फिर प्रवर्तकों से अतिरिक्त पूंजी लगाने या ऋण भुगतान में डिफॉल्ट की ​स्थिति में मदद करने की प्रतिबद्धता चाहते हैं। घटनाक्रम से अवगत सूत्रों ने इसकी जानकारी दी। ऋणदाताओं को इस मामले में दूरसंचार कंपनी की ओर से अभी तक कोई आश्वासन नहीं मिला है।

ऋणदाताओं की सतर्कता ऐसे समय में देखी जा रही है जब कंपनी स्थिरता और प्रवर्तकों की ओर से नए सिरे से जुड़ाव का संकेत देने की कोशिश कर रही है। बुधवार को वोडाफोन आइडिया के शेयर में 5 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई। शेयर में यह तेजी कंपनी के समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) देनदारियों में भारी कमी करने और इसके बाद निदेशक मंडल में फेरबदल की घोषणा की वजह से आई।

वी ने कुमार मंगलम बिड़ला को अपना नया गैर-कार्यकारी चेयरमैन बनाया है। उन्होंने रविंदर टक्कर की जगह ली है जो अब गैर-कार्यकारी वाइस चेयरमैन की भूमिका निभाएंगे। इस बदलाव को कंपनी की पूंजी जुटाने और नेटवर्क विस्तार की योजनाओं के लिए अहम माना जा रहा है।

इसके अलावा सरकारी बैंक इसमें निजी बैंकों की भागीदारी की जरूरत पर भी जोर दे रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि दूरसंचार कंपनी से कहा गया है कि वह दूसरे ऋणदाताओं से संपर्क करे ताकि उन्हें भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जा सके। सूत्रों ने बताया कि इस चर्चा की अगुआई भारतीय स्टेट बैंक कर रहा है लेकिन देश का सबसे बड़ा ऋणदाता इस जोखिम का बड़ा हिस्सा उठाने को तैयार नहीं है।

वोडाफोन आइडिया में वोडाफोन ग्रुप और आदित्य बिड़ला समूह संयुक्त प्रवर्तक हैं और प्रवर्तकों की कुल हिस्सेदारी 25.64 फीसदी है। मार्च 2026 तक आदित्य बिड़ला समूह की कंपनी में 6.63 फीसदी हिस्सेदारी थी जबकि वोडाफोन समूह की हिस्सेदारी 19 फीसदी थी। इसके अलावा भारत सरकार की कंपनी में लगभग 49 फीसदी हिस्सेदारी है लेकिन उसे प्रवर्तक के बजाय सार्वजनिक शेयरधारक के तौर पर वर्गीकृत किया गया है।

वोडाफोन आइडिया को पूंजी जुटाने में अभी भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। एक सरकारी बैंक के एक वरिष्ठ बैंकर ने बताया कि वोडाफोन आइडिया के संबंध में लंबे समय से चर्चा चल रही है और इसमें कई बैंक शामिल हैं लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है। किसी भी सार्वजनिक या निजी बैंक ने निश्चित राशि के लिए प्रतिबद्धता नहीं जताई है। बैंकर के अनुसार ऋणदाताओं का कहना है कि कंपनी को कर्ज के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के ऋणदाताओं को साथ लाने पर काम करना होगा।

बैंकर ने कहा, ‘बैंक कंपनी से स्पष्टता चाहते हैं। कंपनी के पूंजीगत व्यय, प्रति ग्राहक औसत राजस्व, समायोजित सकल राजस्व और प्रतिस्पर्धी स्थिति को लेकर अनिश्चितताएं हैं। यदि वोडा-आइडिया गारंटी या प्रवर्तकों से समर्थन के रूप में ऋणदाताओं को सुरक्षा प्रदान करती है तो बैंक अधिक कर्ज देने को तैयार होंगे।’

उन्होंने कहा कि वर्तमान में ऐसा कोई समर्थन मौजूद नहीं है। कंपनी कठिन स्थिति में है और आदर्श रूप से जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त पूंजी निवेश करके या डिफॉल्ट की ​स्थिति में प्रवर्तकों को सहायता करनी चाहिए। अब तक हमारी यही मांग रही है लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। पिछले हफ्ते दूरसंचार विभाग ने पुनर्मूल्यांकन के बाद वोडाफोन आइडिया के बकाया समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) बकाए को 27 फीसदी घटाकर 64,046 करोड़ रुपये कर दिया था जो पहले 87,695 करोड़ रुपये था। इस उद्देश्य के लिए गठित एक समिति द्वारा तय की गई बकाया राशि को अब 31 दिसंबर, 2025 तक के लिए ​स्थिर कर दिया गया है। इस राशि का अधिकांश हिस्सा वित्त वर्ष 2036 से शुरू होने वाले 6 वर्षों में छह किस्तों में चुकाना होगा, जिससे 10 साल की राहत मिलेगी।

क्षेत्र के एक वरिष्ठ विश्लेषक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘अगर बैंक प्रवर्तकों से और अधिक इक्विटी लगाने का आश्वासन मांग रहे हैं तो वे वोडाफोन आइडिया के साथ कड़ी सौदेबाजी कर सकते हैं। 25,000 से 35,000 करोड़ रुपये के ऋण पोर्टफोलियो पर 25 से 50 आधार अंक की उच्च ब्याज दर ऋणदाताओं को भारी मुनाफा दिला सकती है। निजी क्षेत्र के बैंक पहले से ही जूझ रहे हैं इसलिए वे वी को उधार देने की स्थिति में नहीं हैं।’

वी अगले 3 वर्षों में 45,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय के लिए पूंजी जुटाने की कोशिश कर रही है। कंपनी की रणनीति नेटवर्क विस्तार, लाभप्रदता में सुधार और ग्राहकों को बनाए रखने पर केंद्रित है। 

ताजा घटनाक्रम के बारे में जानकारी के लिए वोडाफोन आइडिया को ईमेल किया गया मगर खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं आया। एंबिट कैपिटल में शोध विश्लेषक विवेकानंद सुब्बारमन ने कहा, ‘आदित्य बिड़ला समूह की इकाई होने के नाते वी को समूह के समर्थन से लाभ होगा। मगर समूह को खुद बैंकिंग संसाधनों की आवश्यकता है क्योंकि यह पेंट और आभूषण जैसे नए क्षेत्रों में प्रवेश कर चुका है और विस्तार कर रहा है। कोई भी बैंक आद​त्यि बिड़ला समूह को अपना ग्राहक बनाना चाहेगा।’ उन्होंने कहा कि सरकार वोडाफोन आइडिया की सबसे बड़ी शेयरधारक है और वह वी का समर्थन कर रही है। सरकार नहीं चाहती है कि दूरसंचार क्षेत्र में सिर्फ दो कंपनियों का प्रभुत्व हो।

एक अन्य बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के एक अधिकारी ने कहा, ‘बैंक एजीआर मुद्दे को लेकर विशेष चिंतित नहीं हैं। एजीआर बकाये को लेकर तत्काल दबाव नहीं है।’ उन्होंने बताया कि ऋणदाता स्पेक्ट्रम से जुड़े मुद्दों को लेकर ज्यादा चिंतित हैं। स्पेक्ट्रम कंपनी की संपत्ति है लेकिन हाल के अदालती फैसलों के कारण बैंक अब इसे गिरवी नहीं रख सकते। अगले 10 साल तक , स्पेक्ट्रम बकाया और पूंजीगत व्यय की आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित रहेगा। विश्लेषकों ने कहा कि एजीआर बकाया पर मिली राहत से कंपनी के निकट अवधि के नकदी प्रवाह में सुधार होगा लेकिन महत्त्वपूर्ण चुनौतियां बनी हुई हैं।

ऐक्सिस कैपिटल ने वर्षों से कम निवेश के कारण कंपनी के परिचालन में कमजोरी की ओर इशारा किया, जिससे यह दूरसंचार कंपनी प्रतिस्प​र्धियों से पीछे रह गई। हालांकि वित्त वर्ष 2027 से 2029 के दौरान 45,000 करोड़ रुपये के नियोजित पूंजीगत खर्च से इस अंतर को कम करने में मदद मिल सकती है लेकिन इसके लिए सुलभ कर्ज की जरूरत है। मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो और सुनील भारती मित्तल की भारती एयरटेल के बाद वोडाफोन आइडिया दूरसंचार ऑपरेटरों में तीसरे स्थान पर है।

First Published : May 6, 2026 | 10:02 PM IST