Indian Pharma Sector: भारत का दवा बाजार एक बार फिर मजबूती के साथ आगे बढ़ता दिख रहा है। ICICI सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2026 में भारतीय फार्मा मार्केट ने सालाना आधार पर 10.7 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की। पूरे वित्त वर्ष 2026 में यह ग्रोथ 9.9 प्रतिशत रही, जबकि चौथी तिमाही में बाजार ने 11.6 प्रतिशत की तेज रफ्तार पकड़ी। कुल मिलाकर बाजार का आकार करीब 211 अरब रुपये तक पहुंच गया, जो इस सेक्टर की मजबूत स्थिति को दिखाता है।
इस ग्रोथ के पीछे सबसे बड़ा हाथ उन दवाओं का रहा जो लंबी बीमारियों के इलाज में काम आती हैं। क्रॉनिक थेरेपी की दवाएं मार्च में करीब 14 प्रतिशत बढ़ीं। इसके मुकाबले एक्यूट बीमारियों की दवाएं सिर्फ 8 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ पाईं। खासकर एंटी-इंफेक्टिव और सांस से जुड़ी दवाओं की कमजोर मांग ने इस सेगमेंट को पीछे खींच लिया। बाजार का बड़ा हिस्सा अभी भी एक्यूट दवाओं का है, लेकिन उनकी धीमी चाल अब साफ नजर आने लगी है।
दिलचस्प बात यह है कि बाजार की कमाई बढ़ने के बावजूद दवाओं की असली मांग में गिरावट देखी गई। कंपनियों ने कीमतें बढ़ाईं और लगातार नई दवाएं लॉन्च कीं, जिससे कुल रेवेन्यू में इजाफा हुआ। लेकिन वॉल्यूम के लिहाज से देखा जाए तो बिक्री 0.2 प्रतिशत घट गई। यानी लोग दवाएं कम खरीद रहे हैं, पर महंगी दवाओं और नए प्रोडक्ट्स की वजह से कंपनियों की कमाई बढ़ रही है।
मार्च 2026 में बाजार में एक बड़ा मोड़ आया जब सेमाग्लूटाइड की जेनेरिक दवाएं लॉन्च हुईं। यह वही दवा है जो डायबिटीज और वजन घटाने के इलाज में इस्तेमाल होती है। हैरानी की बात यह रही कि लॉन्च के सिर्फ 11 दिनों के भीतर ही इन सस्ती दवाओं ने नोवो नॉर्डिस्क जैसी बड़ी कंपनी की ब्रांडेड दवाओं को पीछे छोड़ दिया। GLP-1 सेगमेंट की कुल बिक्री करीब 2.1 अरब रुपये तक पहुंच गई और इसने पूरे बाजार में अपनी मौजूदगी दर्ज करानी शुरू कर दी।
अगर थेरेपी के हिसाब से देखें तो कैंसर की दवाओं ने सबसे तेज रफ्तार दिखाई और करीब 28 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की। दिल से जुड़ी दवाएं 15 प्रतिशत और डायबिटीज की दवाएं 14 प्रतिशत बढ़ीं। दूसरी तरफ, सांस और इंफेक्शन से जुड़ी दवाएं कमजोर रहीं और इनकी ग्रोथ काफी सीमित रही। यह साफ संकेत है कि भारत में अब जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।
टॉप 20 फार्मा कंपनियों में कड़ी टक्कर देखने को मिली। डॉ. रेड्डीज ने सबसे तेज दौड़ लगाई और करीब 18 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की। सन फार्मा भी करीब 15 प्रतिशत की बढ़त के साथ मजबूत स्थिति में रही। ल्यूपिन, अजंता, ग्लेनमार्क, मैनकाइंड और टोरेंट जैसी कंपनियां भी बाजार से तेज बढ़ती दिखीं। हालांकि एलेम्बिक का प्रदर्शन कमजोर रहा और उसकी बिक्री में गिरावट दर्ज की गई।
मल्टीनेशनल कंपनियों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया और उनकी बिक्री करीब 14 प्रतिशत बढ़ी। लेकिन इस ग्रोथ के पीछे सबसे बड़ा योगदान GLP-1 दवाओं का रहा। Eli Lilly की Mounjaro दवा ने अकेले ही करीब 1.2 अरब रुपये की बिक्री कर डाली और बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर ली।
रिपोर्ट एक बड़ा संकेत भी देती है। जैसे जैसे जेनेरिक दवाएं बाजार में तेजी से उतर रही हैं, वैसे वैसे महंगी ब्रांडेड दवाओं पर दबाव बढ़ता जाएगा। खासकर GLP-1 सेगमेंट में मुकाबला और तेज होने वाला है। अभी Mounjaro आगे है, लेकिन सस्ती दवाओं की बढ़ती पकड़ आने वाले समय में इस संतुलन को बदल सकती है।