Wipro Buyback: आईटी कंपनी विप्रो लिमिटेड अपनी चौथी तिमाही के नतीजों के साथ शेयर बायबैक पर फैसला लेने वाली है। यह कदम खास इसलिए है क्योंकि कंपनी पिछले तीन साल बाद फिर से अपने शेयर वापस खरीदने की तैयारी कर रही है और नए नियम लागू होने के बाद यह पहला बायबैक होगा। विप्रो के पास तीसरी तिमाही तक लगभग 57,394 करोड़ रुपये का कैश मौजूद है, जो टॉप आईटी कंपनियों में सबसे ज्यादा माना जा रहा है। यही वजह है कि कंपनी के पास बायबैक जैसे बड़े फैसले लेने की क्षमता है।
कंपनी पहले ही साफ कर चुकी है कि वह वित्त वर्ष 2026 से 2028 के बीच अपने मुनाफे का 70 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा शेयरधारकों को लौटाएगी। बायबैक इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
विप्रो लिमिटेड ने शेयर बाजार को जानकारी दी है कि कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक 15 और 16 अप्रैल 2026 को आयोजित की जाएगी। इस बैठक में कंपनी अपने इक्विटी शेयरों के बायबैक प्रस्ताव पर विचार और मंजूरी दे सकती है।
कंपनी ने साफ किया है कि यह प्रस्ताव कंपनी कानून 2013, सेबी के बायबैक नियम 2018 और अन्य लागू नियमों के तहत होगा। यानी सभी जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए ही यह फैसला लिया जाएगा। यह जानकारी सेबी के लिस्टिंग नियम (LODR) के तहत दी गई है। कंपनी ने यह भी कहा है कि 16 अप्रैल को बैठक खत्म होने के बाद इसका रिजल्ट शेयर बाजार को तुरंत बताया जाएगा।
विप्रो का पिछला बायबैक अप्रैल 2023 में आया था, जिसमें कंपनी ने 12,000 करोड़ रुपये के शेयर 223 रुपये प्रति शेयर के भाव पर खरीदे थे। इससे पहले 2020 और 2019 में भी कंपनी ने बायबैक किया था। खास बात यह है कि कंपनी हमेशा बाजार कीमत से 16 से 19 प्रतिशत ज्यादा भाव देकर शेयर खरीदती रही है।
विप्रो का शेयर शुक्रवार को सुबह लगभग 208.95 रुपये पर ट्रेड कर रहा था, जिसमें करीब +6.05 रुपये (लगभग 2.98% की बढ़त) दिख रही थी। इससे पहले यानी पिछले कारोबारी दिन विप्रो का शेयर करीब 204.72 रुपये पर बंद हुआ था