जेनिक के लिए अमेरिकी एफडीए से मंजूरी मिलने के कुछ ही दिनों बाद वॉकहार्ट अपनी अगली संभावित धमाकेदार दवा पर दांव लगा रही है। कंपनी का अनुमान है कि वैश्विक स्तर पर जेनिक की बिक्री 1.5 से 2 अरब डॉलर सालाना तक पहुंच सकती है।
चेयरमैन हबील खोराकीवाला ने कहा कि डब्ल्यूसीके 6777 जेनिक की तरह के बड़े स्तर वाले अवसर के रूप में उभर सकती है। यह दिन में एक बार ली जाने वाली इंजेक्टेबल एंटीबायोटिक है और अमेरिका में इसके पहले चरण का अध्ययन पूरा हो चुका है। जहां जेनिक का लक्ष्य रेजिस्टेंट ग्राम-नेगेटिव पैथोजन्स के लिए अनुमानित 9 अरब डॉलर वाले बाजार में अस्पताल के गंभीर संक्रमणों का इलाज करना है, वहीं डब्ल्यूसीके 6777 का मकसद आउटपेशेंट इन्फ्यूजन केंद्रों के जरिये अस्पतालों से बाहर भी इलाज की सुविधा देना है।
वॉकहार्ट भारत सहित वैश्विक स्तर पर क्लीनिकल परीक्षण शुरू करने की योजना बना रही है और उम्मीद कर रही है कि यह दवा साल 2030-31 तक बाजार में आ जाएगी। खोराकीवाला ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘मैं हाल में न्यूयॉर्क में था। मैंने देखा कि अमेरिका में इंजेक्टेबल एंटीबायोटिक का लगभग 35 से 40 प्रतिशत इस्तेमाल अस्पतालों के बाहर होता है।’ उन्होंने कहा, ‘वे चाहते हैं कि लोग जल्द से जल्द अस्पताल छोड़ दें, लेकिन उपचार जारी रखें। इस लिहाज से यह बहुत बड़ा बाजार है।’
डब्ल्यूसीके 6777 एर्टापेनेम-जाइडेबैक्टम पर आधारित है। इसे मल्टीड्रग-रेजिस्टेंट ग्राम-नेगेटिव संक्रमणों के लिए विकसित किया जा रहा है। अस्पताल के गंभीर संक्रमणों के लिए निर्धारित जेनिक के विपरीत वॉकहार्ट डब्ल्यूसीके 6777 को बाह्य मरीजों के उपचार के रूप में देखती है। इससे मरीज इंटेंसिव केयर से बाहर आने या अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी इलाज जारी रख सकेंगे।
खोराकीवाला ने कहा कि इस मॉलिक्यूल की दिन में एक बार दी जाने वाली खुराक मौजूदा इंजेक्शन वाली एंटीबायोटिक्स के मुकाबले बड़ा फायदा पहुंचा सकती है, जिसे अक्सर दिन में कई बार देना पड़ता है। उन्होंने कहा, ‘दिन में एक बार के मुकाबले दिन में तीन बार बड़ा अंतर होता है। नर्सिंग का खर्च, मरीज की सुविधा और संस्थागत सुविधा, ये सभी बातें दिन में एक बार वाली दवा के पक्ष में जाती हैं।’ खोराकीवाला ने कहा कि कंपनी को जेनिक से वैज्ञानिक और नियामकीय सीख से फायदा मिलने की उम्मीद है क्योंकि डब्ल्यूसीके 6777 क्लीनिकल विकास के जरिये आगे बढ़ रही है।
किसी एक ही नई दवा पर निर्भर रहने के बजाय डब्ल्यूसीके 6777 विविध एंटीबायोटिक फ्रैंचाइज निर्माण की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। यह रणनीति वॉकहार्ट के एंटीबायोटिक अनुसंधान में पिछले दो दशक में किए गए लगभग 80 करोड़ डॉलर के निवेश का नतीजा है। इस निवेश से विकास और व्यावसायीकरण के अलग-अलग चरणों में छह नई एंटी-इन्फेक्टिव परिसंपत्तियां (दवाएं) तैयार हुई हैं। इस पोर्टफोलियो में जेनिक, डब्ल्यूसीके 6777, डब्ल्यूसीके 4282, मिक्नाफ (नैफिथ्रोमाइसिन) और पहले से ही व्यावसायिक रूप से उपलब्ध एमरॉक और एमरॉक-ओ एंटीबायोटिक्स शामिल हैं।
जहां जेनिक को गंभीर मल्टीड्रग-रेजिस्टेंट ग्राम-नेगेटिव संक्रमणों के लिए प्रीमियम उपचार के रूप में रखा गया है, वहीं अन्य दवा डब्ल्यूसीके 4282 को मरीजों में मेरोपेनेम के प्रति रेजिस्टेंस को कम करने के मकसद से विकसित किया जा रहा है। मेरोपेनेम व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली लास्ट-लाइन एंटीबायोटिक है। भारत में मेरोपेनेम की सालाना खपत लगभग 2.5 करोड़ रहने का अनुमान है। खोराकीवाला ने कहा कि डब्ल्यूसीके 4282 का मकसद इलाज की प्रक्रिया में शुरुआती इस्तेमाल का है। इसने भारत में तीसरे चरण के परीक्षण पूरे कर लिए हैं और अगले महीने नियामकों के पास आवेदन किए जाने की उम्मीद है।