ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Zee Entertainment Enterprises Ltd.) और सोनी ग्रुप कॉर्प के बीच विलय को लेकर फैसले की अंतिम घड़ी नजदीक आती जा रही है। मामले से परिचित कुछ लोगों ने ब्लूमबर्ग को बताया कि अगले सप्ताह तक इस बात का पता चल सकता है कि Zee-Sony के बीच मर्जर की दशा-दिशा क्या होने वाली है। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि कंपनियों को आ रहे गतिरोधों को हल करने के लिए एक समयसीमा दी गई है और कहा गया है कि इसके भीतर ही या तो मामले का निपटारा कर लिया जाए या फिर सौदे को रद्द कर दिया जाए। ऐसे में यह जल्द ही तय होने जा रहा है कि ज़ी-सोनी (Zee-Sony) के 10 अरब डॉलर की दिग्गज मीडिया कंपनी बन पाएगी या नहीं।
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ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया गया कि सोनी अगले सप्ताह ज़ी को एक लेटर भेज सकती है जिसमें कहा जाएगा कि जब तक दोनों पक्ष इस बात पर सहमत नहीं हो जाते कि मर्जर की गई यूनिट का को लीड कौन करेगा और विलय को अंतिम रूप कौन देगा, तब तक विलय के लिए निर्धारित मांगों को पूरा नहीं किया जा सकता है। मामले से परिचित लोगों ने कहा कि दोनों कंपनियों के बीच यह बड़ा सौदा खत्म भी हो सकता है क्योंकि 21 दिसंबर की फॉर्मल डेडलाइन तक सभी रुकावटों को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय नहीं होगा।
Zee इस बात पर जोर दे रहा है कि उसके CEO पुनीत गोयनका मर्जर के बाद बनने वाली नई यूनिट को लीड करेंगे जैसा कि 2021 में हस्ताक्षरित समझौते में सहमति व्यक्त की गई है। जबकि Sony गोयनका के खिलाफ रेगुलेटर यानी सेबी की जांच को देखते हुए उनकी नियुक्ति को लेकर सतर्क है। जिसके चलते दो साल पुरानी विलय योजना में लंबे समय से खींचतान मची हुई है। बता दें कि पुनीत गोयनका Zee के फाउंडर सुभाष चन्द्रा के बेटे भी हैं।
ब्लूमबर्ग ने बताया कि ज़ी के एक प्रतिनिधि ने लीडरशिप के बारे में चर्चा किए बिना बताया कि कंपनी सौदे के लिए सभी आवश्यक शर्तों को समय पर पूरा करने के लिए ‘सक्रिय रूप से लगी हुई’ थी। उन्होंने कहा, ज़ी ने उनमें से ज्यादातर जरूरतों को पहले ही पूरा कर लिया है और वह ‘नियमित आधार पर’ सोनी के संपर्क में है।
मार्केट रेगुलेटर सेबी ने जून में आरोप लगाया कि मुंबई स्थित मीडिया हाउस ने अपने फाउंडर, सुभाष चंद्रा द्वारा प्राइवेट फाइनैंशियल डील को कवर करने के लिए लोन की फर्जी वसूली की। सेबी ने एक अंतरिम आदेश में कहा कि चंद्रा और उनके बेटे गोयनका ने ‘अपने पद का दुरुपयोग किया’ और फंड की हेराफेरी की।
जबकि गोयनका को सेबी के आदेश के खिलाफ एक अपीलेट अथॉरिटी से राहत मिल गई थी। सेबी ने उन्हें एक लिस्टेड कंपनी में एग्जिक्यूटिव या डॉयरेक्टर पद पर रहने से रोक दिया था। मिंट के हवाले से यह खबर आई कि सोनी अभी भी चल रही जांच को एक लटकते कॉरपोरेट प्रशासन मुद्दे के रूप में देखता है।
जब तक कि इन दोनों कंपनियों के बीच बात नहीं बनती तब तक यह माना जा सकता है कि आखिरी दौर की खींचतान मर्जर को टूटने की कगार पर धकेल रही है। सोनी-ज़ी सौदा अगर पूरा हो जाता तो नेटफ्लिक्स इंक (Netflix Inc) और एमेजॉन.कॉम इंक (Amazon.com Inc), साथ ही रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) जैसे लोकल ग्रुप सहित ग्लोबल पावरहाउसों को चुनौती देने के साथ वित्तीय ताकत के साथ यह भारत की सबसे बड़ी एंटरटेनमेंट कंपनी बन जाती।
2021 के समझौते के अनुसार, विलय की गई यूनिट में सोनी की 50.86% हिस्सेदारी होगी और गोयनका परिवार के पास 3.99% हिस्सेदारी होगी, जबकि शेष हिस्सेदारी पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास होगी। लोगों ने कहा कि Sony 21 दिसंबर की समय सीमा को बढ़ाने पर विचार नहीं कर रही है।
ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज लिमिटेड के एक नोट के अनुसार, अगर दोनों कंपनियों के बीच बात बन जाती है तो यह लेनदेन दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले देश में सोनी के मीडिया बिजनेस का विस्तार करने में मदद करेगा। इसमें 75 से ज्यादा टेलिविजन चैनल और 37% की बाजार हिस्सेदारी है, जो डिज़्नी के स्वामित्व वाले स्टार के 24% से आगे है।
बता दें कि दिसंबर 2021 में, ज़ी एंटरटेनमेंट और सोनी पिक्चर्स अपने कारोबार का विलय करने पर सहमत हुई थीं। लेकिन, जी एंटरटेनमेंट के कुछ कर्जदाताओं की तरफ से आपत्तियां जताए जाने पर यह प्रक्रिया रुक गई थी। एस्सेल समूह के कई लेनदारों ने विलय योजना में जोड़े गए गैर-प्रतिस्पर्धा खंड को लेकर अपनी आपत्ति जताई थी।
बाद में 10 अगस्त, 2023 को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) ने Zee Entertainment और कल्वर मैक्स एंटरटेनमेंट (पूर्व में सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया) के विलय को मंजूरी दे दी।
इसके साथ ही एनसीएलटी की मुंबई पीठ ने Zee-Sony merger की मंजूरी देकर 10 अरब डॉलर की दिग्गज मीडिया कंपनी के अस्तित्व में आने का रास्ता खोल दिया था। लेकिन बाद में डील रुक गई।