प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
देश के सबसे कम आय वाले राज्यों में बिहार और मध्य प्रदेश विकास के मामले में अपनी प्रति व्यक्ति आय के आंकड़ों से कहीं बेहतर तस्वीर पेश कर रहे हैं। धन प्रबंधन फर्म क्लाइंट एसोसिएट्स की 30 राज्यों की 9 मानकों पर तैयार रिपोर्ट में यह निष्कर्ष सामने आया है।
इस रिपोर्ट के अनुसार बिहार ने पांच साल की 14.97 प्रतिशत की नॉमिनल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर्ज की है, जो राष्ट्रीय औसत 14.1 प्रतिशत से काफी ऊपर है। इसी प्रकार मध्य प्रदेश पहले ही कृषि से इतर विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की ओर मजबूत बदलाव प्रदर्शित कर रहा है। ‘स्टेट ऑफ इंडियन स्टेट्स’ नामक रिपोर्ट में बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और केरल को एक साथ ‘सुधार के अवसर’ श्रेणी में रखा गया है।
रिपोर्ट के आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं। बिहार की प्रति व्यक्ति आय 2024-2025 में केवल 69,321 रुपये दर्ज की गई थी, जो किसी भी राज्य में सबसे कम है और गोवा के 5.86 लाख रुपये की प्रति व्यक्ति आय का आठवें हिस्से से भी कम है। मध्य प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 1,52,615 रुपये है, जो राष्ट्रीय औसत 2.58 लाख रुपये से काफी नीचे है। उत्तर प्रदेश 15.3 प्रतिशत नॉमिनल की दर से आगे बढ़ रहा है, जिसे शोधकर्ता केवल एक चक्रीय उछाल नहीं, बल्कि संरचनात्मक मोड़ बता रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल के पास मानव पूंजी है, लेकिन शासन स्तर पर अड़चनों ने अब तक विदेशी निवेश आकर्षित करने की उसकी क्षमता को सीमित कर दिया है। इसके अनुसार, दिल्ली पूंजीगत व्यय दक्षता में 9.53 के साथ शीर्ष पर है, लेकिन यह भारी सार्वजनिक खर्च के बजाय उसकी निजी क्षेत्र आधारित अर्थव्यवस्था को दर्शाता है।
केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र भी उच्च स्थान पर हैं। इनके बारे में रिपोर्ट कहती है कि इन राज्यों को बंदरगाहों, डेटा केंद्रों और मेट्रो विस्तार जैसे क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करना चाहिए। क्लाइंट एसोसिएट्स के सह
संस्थापक रोहित सरीन ने कहा कि राज्यों में निवेश और पूंजी का अधिक समान प्रसार देश को 10 प्रतिशत की विकास की गति से आगे बढ़ने में मदद कर सकता है।