भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन | फाइल फोटो
भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने शुक्रवार को कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2027-28 में या बाहरी परिस्थितियां अनुकूल होते ही, फिर से 7 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर हासिल कर लेगी। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा उठाए गए व्यापक आर्थिक स्थिरता के कदम और आपूर्ति सुनिश्चित करने के उपाय, अर्थव्यवस्था को दोबारा उच्च वृद्धि दर के रास्ते पर ले जाएंगे, भले ही पश्चिम एशिया का संकट निकट अवधि में वृद्धि की रफ्तार को प्रभावित कर रहा हो।
भारत के वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम जीडीपी अनुमान जारी होने के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में नागेश्वरन ने कहा, ‘यदि वृद्धि दर आरबीआई के अनुमान के अनुसार 7 प्रतिशत से नीचे भी जाती है तब ये स्थिरता वाले उपाय और आपूर्ति संबंधी व्यवस्थाएं, हमें वित्त वर्ष 2027-28 में या जैसे ही बाहरी परिस्थितियां अनुमति देंगी, फिर से 7 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर के रास्ते पर ले आएंगी।’
पश्चिम एशिया संकट के असर को कम करने के लिए सरकार ने ऊर्जा, व्यापार, कृषि और उद्योग क्षेत्रों में कई कदम उठाए हैं। नागेश्वरन ने निजी अंतिम उपभोग व्यय में सुधार और सकल स्थिर पूंजी निर्माण की 8.2 प्रतिशत वृद्धि दर को संतोषजनक बताया। उन्होंने कहा कि निवेश गतिविधियों में अच्छी तेजी देखने को मिली है, जो तिमाही आंकड़ों में भी दिखाई देती है।
भारत की वास्तविक जीडीपी वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7 प्रतिशत बढ़ी जबकि चौथी तिमाही में वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही। इसी दिन सुबह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया था और इसके नीचे जाने का जोखिम भी जताया था। वहीं, खुदरा महंगाई (सीपीआई) का अनुमान बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत किया गया और इसके ऊपर जाने की आशंका भी जाहिर की गई।
इस पर नागेश्वरन ने कहा, ‘केंद्रीय बैंक ने मौजूदा स्थिति का उचित आकलन किया है और फिलहाल हमारे पास उस पर सवाल उठाने का कोई कारण नहीं है।’
उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय इस समय वृद्धि दर का अपना अलग अनुमान जारी नहीं करेगा और आरबीआई के अनुमान को आधार मानते हुए उसके द्वारा बताए गए जोखिमों को ध्यान में रखेगा। पश्चिम एशिया संकट के कारण वित्त वर्ष 2026-27 का आर्थिक परिदृश्य अधिक जटिल हो गया है, हालांकि वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़े मांग और आपूर्ति दोनों पक्षों में मजबूती दिखाते हैं।
उन्होंने कहा, ‘अभी यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि वृद्धि दर और महंगाई किस दिशा में जाएंगी।’ जनवरी से अप्रैल तक के अधिकांश उच्च-आवृत्ति आर्थिक संकेतक, हल्की से मजबूत आर्थिक वृद्धि का संकेत दे रहे हैं। इससे घरेलू मांग और गतिविधि में मजबूती बनी हुई है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में वाहन बिक्री, इस्पात, सीमेंट, पूंजीगत वस्तुओं और बुनियादी ढांचा क्षेत्र की मांग मजबूत बनी हुई है।’
उन्होंने कहा कि यह मजबूती इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ये आंकड़े पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने के लगभग दो महीने बाद की स्थिति को दर्शाते हैं।