अर्थव्यवस्था

Informal Economy: अनौपचारिक रोजगार में कौन सा राज्य निकला सबसे आगे?

हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में रोजगार और उत्पादकता बढ़ी, जबकि गुजरात और महाराष्ट्र में गिरावट दर्ज हुई

Published by
हिमांशी भारद्वाज   
Last Updated- May 08, 2026 | 9:13 AM IST

भारत की अनौपचारिक गैर-कृषि अर्थव्यवस्था को लेकर राज्यों में असामानता बढ़ रही है। इस क्रम में वर्ष 2023-24 और 2025 के बीच हरियाणा जैसे राज्य रोजगार, पैमाने और उत्पादकता के मामले में अव्वल बनकर उभर रहे हैं, उधर गुजरात और ओडिशा जैसे कुछ अन्य राज्यों में एक या अधिक संकेतकों में गिरावट देखी जा रही है।

असंगठित क्षेत्र उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण (एएसयूएसई) के 2023-24 और 2025 के आंकड़ों के अनुसार प्रमुख राज्य 20 लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार मुहैया करवा रहे हैं। इस मामले में हरियाणा बेहद अव्वल है। हरियाणा ने 2022-23 से 2025 के बीच 29.8 प्रतिशत वृद्धि कर 7.1 लाख श्रमिकों को जोड़ा है।

उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर अनौपचारिक रोजगार का नेतृत्व करता है। इस राज्य ने 2025 में 16 प्रतिशत वृद्धि के साथ 1.86 करोड़ श्रमिकों को जोड़ा है। इस अवधि के दौरान किसी राज्य की तुलना में उत्तर प्रदेश ने सर्वाधिक अनौपचारिक श्रमिकों को जोड़ा। उत्तर प्रदेश ने इस अवधि में 2.56 करोड़ अनौपचारिक श्रमिकों को जोड़ा।

झारखंड (19.4 प्रतिशत), राजस्थान (15.3 प्रतिशत) और पश्चिम बंगाल (10.4 प्रतिशत) ने भी रोजगार में मजबूत वृद्धि दर्ज की। पश्चिम बंगाल वर्ष 2025 में 13.3 करोड़ श्रमिकों के साथ देश का दूसरा सबसे बड़ा अनौपचारिक नियोक्ता बन गया।

दूसरी ओर, गुजरात में जहां 2023-24 में 92 लाख अनौपचारिक श्रमिक थे, उनकी संख्या घटकर 80 लाख रह गई। यह 12.6 प्रतिशत की गिरावट है, जो बड़े राज्यों में सबसे अधिक है। तीसरे सबसे बड़े अनौपचारिक नियोक्ता महाराष्ट्र में भी श्रमिकों की संख्या 3.7 प्रतिशत घटकर 1.17 करोड़ हो गई। केरल (-4.95 प्रतिशत) और ओडिशा (-3.04 प्रतिशत) में भी गिरावट आई।

इसके अलावा, 10 लाख से अधिक प्रतिष्ठानों वाले प्रमुख राज्यों में हरियाणा ने प्रतिष्ठानों में सबसे तेज विस्तार दर्ज किया। हरियाणा में प्रतिष्ठानों में 21.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो राष्ट्रीय औसत 7.97 प्रतिशत से दोगुनी से भी अधिक है। झारखंड (19.6 प्रतिशत), राजस्थान (18.3 प्रतिशत), उत्तर प्रदेश (16.6 प्रतिशत) ने भी देश की तुलना में काफी बेहतर प्रदर्शन किया।

स्पेक्ट्रम के दूसरे छोर पर हर राज्य तालमेल नहीं बिठा रहा है। गुजरात राष्ट्रीय स्तर पर अनौपचारिक प्रतिष्ठानों के सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक है। इसकी संख्या गुजरात में 46.5 लाख से 5.7 प्रतिशत गिरकर 43.8 लाख हो गई। ओडिशा ने अपने प्रतिष्ठानों में 7.6 प्रतिशत की कमी दर्ज की। हिमाचल प्रदेश (-0.59 प्रतिशत) और चंडीगढ़ (-25 प्रतिशत) में भी गिरावट दर्ज की गई।

जब प्रति कार्यकर्ता सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) के रूप में मापी जाने वाली कार्यकर्ता उत्पादकता की बात आती है तो विजेताओं का भूगोल काफी बदल जाता है। उत्तराखंड ने प्रमुख राज्यों में सबसे तेज वृद्धि देखी, जिसमें प्रति कार्यकर्ता जीवीए 1.62 लाख रुपये से 29 प्रतिशत बढ़कर 2.09 लाख रुपये हो गया।

दिल्ली के अनौपचारिक श्रमिक देश में सबसे उत्पादक श्रमिकों में से हैं, जो प्रति कार्यकर्ता सालाना 2.49 लाख रुपये कमाते हैं। दिल्ली के अनौपचारिक श्रमिक के उत्पादन में 2023-24 की तुलना में लगभग 22 प्रतिशत की वृद्धि है। अरुणाचल प्रदेश ने सभी राज्यों में 36.5 प्रतिशत की उच्चतम वृद्धि दर दर्ज की, हालांकि इसका आधार छोटा है।

रोजगार-प्रधान राज्यों के साथ यह अंतर बहुत स्पष्ट है। दरअसल, 1.33 करोड़ अनौपचारिक श्रमिकों वाले पश्चिम बंगाल में प्रति कार्यकर्ता केवल 1.18 लाख रुपये का जीवीए होता है, जो राष्ट्रीय औसत 1.57 लाख रुपये से काफी कम है। बिहार के 63 लाख श्रमिक में प्रत्येक 1.30 लाख रुपये का उत्पादन करता है। उत्तर प्रदेश अपने आधार के बावजूद प्रति श्रमिक 1.26 लाख रुपये पर है, जो देश का सबसे बड़ा अनौपचारिक नियोक्ता होने के बावजूद राष्ट्रीय औसत से पिछड़ रहा है।

इन राज्यों में गुजरात ने जीवीए में 12.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की। इससे यह एकमात्र ऐसा राज्य बन गया जिसने तीनों आयामों में गिरावट दर्ज की। इसके अतिरिक्त, ओडिशा ने पैमाने और रोजगार में गिरावट दर्ज की।

First Published : May 8, 2026 | 9:13 AM IST