अर्थव्यवस्था

GeM पोर्टल ने रचा इतिहास: स्थापना से अब तक ₹18.4 लाख करोड़ का कारोबार, MSME का दबदबा बरकरार

सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) ने कुल ₹18.4 लाख करोड़ की रिकॉर्ड बिक्री हासिल की है, जिसमें एमएसएमई की 47% हिस्सेदारी और एआई-आधारित निगरानी की अहम भूमिका रही

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हिमांशी भारद्वाज   
Last Updated- April 06, 2026 | 10:07 PM IST

सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) ने 2016 की अपनी शुरुआत के बाद से कुल 18.4 लाख करोड़ रुपये का सकल माल मूल्य (जीएमवी) हासिल किया है। जेम को अकेले वित्तीय वर्ष 2025-26 (वित्त वर्ष 26) में 5 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 75.7 लाख ऑर्डर मिले। इसमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) ने 47 प्रतिशत ऑर्डर मूल्य सुरक्षित किया।

इस प्लेटफॉर्म ने लघु व सूक्ष्म उद्यमों (एमएसएमई), महिला नेतृत्व वाले एमएसई, एससी/एसटी एमएसई और स्टॉर्टअप के लिए प्रवेश की सीमा को महत्त्वपूर्ण रूप से कम कर दिया। जेम के सीईओ मिहिर कुमार ने कहा, ‘सूक्ष्म और लघु उद्यमों ने जेम के कारोबार में 45 प्रतिशत से अधिक का योगदान दिया है। इसमें महिलाओं के नेतृत्व वाले एमएसएमई, स्टार्टअप और एससी/एसटी उद्यमों में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की है।’ उन्होंने इस पारिस्थितिकी तंत्र की सराहना की, जहां बी2जी (बिजनेस-टू-गवर्नमेंट) खरीद सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए वरदान साबित हुई है।

वित्त वर्ष 2026 में एमएसएमई  सक्रिय विक्रेताओं का 73 प्रतिशत थे और उन्होंने 68 प्रतिशत ऑर्डर पर कब्जा किया। एमएसएमई ने 2.36 लाख करोड़ रुपये के 51 लाख से अधिक ऑर्डर प्राप्त किए, इस प्रकार 25 प्रतिशत खरीद को पार कर लिया।

जेम के डिप्टी सीईओ भारत भूषण वर्मा ने जनवरी, 2024 से एआई-संचालित पहलों का विवरण दिया। वर्मा ने 19 लाख कैटलॉग को सुव्यवस्थित किया और बिजनेस इंटेलिजेंस की मदद से 90,000 खराब कैटलॉग को हटा दिया गया।

वर्मा ने छोटे विक्रेताओं के लिए मूल्य निर्धारण, बिजनेस इंटेलिजेंस के माध्यम से डुप्लिकेट इमेज और मिलते-जुलते पैटर्न का पता लगाने के बारे में बताया। महिला उद्यमियों को प्रतिस्पर्धी प्रस्ताव तय  करने के लिए मूल्य निर्धारण की जानकारी दी जा रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि कैसे प्रौद्योगिकी अतार्किक मूल्य निर्धारण या डुप्लिकेट इमेज जैसी विसंगतियों का पता लगाती है।

उन्होंने बताया कि जेम का एआई -संचालित सैनिटी फ्रेमवर्क छह महत्त्वपूर्ण जोखिमों की सक्रिय निगरानी के माध्यम से बाजार को मजबूत बनाता है। ये छह जोखिम हैं : खरीदार-विक्रेता मिलीभगत, ऑर्डर स्प्लिटिंग, तकनीकी अस्वीकृति का दुरुपयोग, अतार्किक मूल्य उतार-चढ़ाव और उत्पाद का गलत प्रतिनिधित्व।

राज्यों का वित्त वर्ष 2026 में खरीद मूल्य में योगदान 38.3 प्रतिशत था। इसमें उत्तर प्रदेश सबसे आगे था, उसके बाद गुजरात और महाराष्ट्र का स्थान था। केंद्रीय मंत्रालयों में 20.5 प्रतिशत और स्वायत्त निकायों में 33 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। दूसरी ओर, सीपीएससी में 22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष के अनूठे खनन अनुबंधों से कोयला मंत्रालय में गिरावट के कारण थी।

उत्पादों ने जीएमवी का 51 प्रतिशत और सेवाओं ने 49 प्रतिशत का योगदान दिया। हालांकि अग्रिम नीलामी दोगुनी होकर 1,867 करोड़ रुपये हो गई। मुख्य प्रभावों में 318 करोड़ वैक्सीन खुराक, 44,000 किमी ऑप्टिकल फाइबर, 77 लाख कंप्यूटर, गुजरात में कडाना बांध में 110 मेगावाट की तैरती सौर परियोजना और 29 करोड़ से अधिक सैनिटरी नैपकिन की खरीद शामिल हैं, जिससे खरीदारों ने प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से 8 प्रतिशत की बचत की।

First Published : April 6, 2026 | 10:07 PM IST