प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
मई में करदाताओं के रिफंड की रकम घटाने के बाद माल एवं सेवा कर (जीएसटी) राजस्व एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 3.3 फीसदी बढ़कर 1.67 लाख करोड़ रुपये हो गया। इस दौरान सकल संग्रह 3.2 फीसदी बढ़कर 1.94 लाख करोड़ रुपये हो गया। आज जारी सरकारी आंकड़ों से यह खुलासा हुआ है।
मई 2025 में एक दूरसंचार कंपनी द्वारा स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए लगभग 10,000 करोड़ के एकमुश्त भुगतान के कारण हेडलाइन वृद्धि दर पर उच्च बेस इफेक्ट का दबाव रहा। अगर इसे हटा कर देखें तो मई में कुल जीएसटी संग्रह में एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई जबकि रिफड के बाद शुद्ध संग्रह 10.1 फीसदी बढ़ा।
इस वृद्धि को मुख्य रूप से आयात से संबंधित राजस्व का सहारा मिला। आयात से सकल जीएसटी राजस्व इस महीने 59,654 करोड़ रुपये रहा और उसमें 19.1 फीसदी की वृद्धि हुई। शुद्ध सीमा शुल्क जीएसटी राजस्व 19.7 फीसदी बढ़कर 49,403 करोड़ हो गया। मगर सकल घरेलू जीएसटी राजस्व 2.6 फीसदी घटकर 1.35 लाख करोड़ रुपये रह गया और शुद्ध घरेलू राजस्व 2.3 फीसदी घटकर 1.18 लाख करोड़ रुपये हो गया। सकल घरेलू राजस्व में यह गिरावट नवंबर 2025 में दर्ज की गई 2.3 फीसदी के संकुचन के बाद आई है। मई में कुल रिफंड 27,281 करोड़ रुपये रहा जो पिछले साल के मुकाबले 2.6 फीसदी अधिक है।
सरकारी सूत्रों ने कहा कि औद्योगिक कच्चे माल और विनिर्माण में उपयोग किए जाने वाले सामानों के आयात अधिक होने से आयात कर संग्रह को बल मिला। आयात आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, कंप्यूटर प्रॉसेसिंग यूनिट (सीपीयू) के आयात से संग्रह में 387 फीसदी की वृद्धि हुई जबकि मेमरी चिप से संग्रह में 205 फीसदी की वृद्धि हुई। कोयले के आयात से जीएसटी संग्रह में 391 फीसदी की जबरदस्त वृद्धि हुई। तांबे से संबंधित आयात और लीथियम आयन बैटरी के आयात में भी मजबूत वृद्धि देखी गई। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, बिजली उपकरण, नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन आपूर्ति श्रृंखलाओं में लगातार गतिविधियों का संकेत मिलता है।
सरकारी सूत्रों ने कर योग्य आपूर्ति में व्यापक वृद्धि की ओर भी इशारा किया। जीएसटीएन आंकड़ों से पता चला कि अप्रैल में वस्तु क्षेत्र में कर योग्य आपूर्ति 26.9 फीसदी बढ़कर 40.1 लाख करोड़ हो गई।
प्रमुख क्षेत्रों में कंप्यूटर की कर योग्य आपूर्ति में 48.2 फीसदी, विद्युत मशीनरी में 34.1 फीसदी, दूरसंचार उपकरण में 24.6 फीसदी और यात्री वाहनों में 21.3 फीसदी की वृद्धि हुई। सरकारी सूत्रों ने बताया कि सोने और कीमती धातुओं की आपूर्ति में पिछले वर्ष के मुकाबले 46.9 फीसदी की वृद्धि हुई।
सूत्रों ने कहा, ‘कर योग्य आपूर्ति अर्थव्यवस्था में उपभोग के लिए एक अच्छा संकेतक है। यह वृद्धि किसी एक खंड पर केंद्रित नहीं है बल्कि कृषि, विनिर्माण, रसायन, धातु, इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता वस्तुओं में एक साथ फैली हुई है। इसलिए घरेलू अर्थव्यवस्था की मांग में वास्तविक वृद्धि हुई है।’
सेवा क्षेत्र ने भी गति बनाए रखी जहां कर योग्य आपूर्ति 22.2 फीसदी बढ़कर 11.5 लाख करोड़ रुपये हो गई।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि रियल एस्टेट सेवा (50 फीसदी), कानूनी एवं लेखा सेवा (47.2 फीसदी), आवास एवं खाद्य सेवा (41.6 फीसदी), रखरखाव एवं मरम्मत सेवा (32.4 फीसदी) और परिवहन सेवा (21.3 फीसदी) जैसी श्रेणियों में व्यापक वृद्धि देखी गई। वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों के लिए सकल जीएसटी संग्रह 4.37 लाख करोड़ रहा।