अर्थव्यवस्था

‘बिना महंगाई बढ़े 7.5% से अधिक रहेगी इकोनॉमिक ग्रोथ’, RBI डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने दिलाया भरोसा

गुप्ता ने कहा कि पिछली कुछ तिमाहियों या वर्षों में भारत की वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत के आसपास रही है और महंगाई दर 4 प्रतिशत से नीचे बनी हुई है

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हिमांशी भारद्वाज   
Last Updated- May 01, 2026 | 10:25 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने शुक्रवार को कहा कि महंगाई दर बढ़ाए बगैर भारत 7.5 प्रतिशत से अधिक आर्थिक वृद्धि दर बनाए रख सकता है।

आइजैक सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी ग्रोथ कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए गुप्ता ने कहा कि पिछली कुछ तिमाहियों या वर्षों में भारत की वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत के आसपास रही है और महंगाई दर 4 प्रतिशत से नीचे बनी हुई है। उन्होंने कहा, ‘इसने मुझे विश्वास दिलाया है कि अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित क्षमता ऐसी है कि हम महंगाई दर बढ़ाए बगैर 7.5 प्रतिशत से अधिक की दर वृद्धि हासिल कर सकते हैं।’

भारत के भुगतान संतुलन को लेकर भी गुप्ता ने भरोसा जताया और कहा कि देश का बाहरी खाता चक्रीय के बजाय संरचनात्मक  नींव पर आधारित है। उन्होंने तर्क दिया कि रेमिटेंस, शुद्ध सेवा निर्यात और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की आवक अस्थायी ताकतें नहीं हैं जो वैश्विक परिस्थितियों के साथ घटती-बढ़ती हैं, बल्कि ये स्थायी स्तंभ हैं जो झटकों के बावजूद स्थिर बने रहते हैं।

उन्होंने कहा, ‘मुझे पूरा भरोसा है कि हमारे भुगतान संतुलन में यह अंतर्निहित मजबूती है।’ उन्होंने स्वीकार किया कि हाल की अवधि में पोर्टफोलियो प्रवाह कमजोर रहा है, लेकिन उनका तर्क था कि अन्य घटकों की मजबूती से इसकी भरपाई की जा सकती है।

मौद्रिक नीति के असर पहुंचने को लेकर गुप्ता ने  मौद्रिक नीति में मौजूदा ढील के चक्र का जोरदार बचाव किया और इस धारणा को खारिज किया कि बढ़े बॉन्ड यील्ड  इस बात के संकेत देते हैं कि मौद्रिक नीति की  दरें उधारी की लागत पर असर नहीं डाल पाई हैं।

मौद्रिक नीति के असर के निचले स्तर तक पहुंचने की ऐतिहासिक स्थिति को देखने और उसकी मौजूदा नरमी के दो चक्र से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि इसके परिणाम बहुत बेहतर नहीं तो अच्छे हैं। उन्होंने कहा, ‘ट्रांसमिशन बहुत अच्छा रहा है और कम से कम पिछले जितना प्रभावशाली है।’ यील्ड कर्व के शॉर्ट ऐंड में करीब पूरा ट्रांसमिशन, मिडिल एंड में बहुत बेहतर और यहां तक कि लॉन्ग एंड में कम प्रभावी रहा है, जिस पर कई बाहरी कारकों और रिजर्व बैंक के नियंत्रण का असर रहा है, जिसमें वैश्विक स्थितियां और दीर्घावधि के हिसाब से महंगाई की उम्मीदें शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि सीपीआई बॉस्केट को अद्यतन करने में 12 साल लगे, जबकि इसे और तेजी से अद्यतन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बॉस्केट अगर हर 3 से 5 साल पर अद्यतन किया जाए और खाद्य व अन्य उतार चढ़ाव वाली वस्तुओं का भार कम किया जाए तो खपत के बदलते स्वरूप के साथ स्वाभाविक रूप से इसमें गिरावट आएगी।

उन्होंने कहा, ‘संभवतः यह फ्रेमवर्क बेहतर काम कर सकता है।’ उन्होंने कहा कि भविष्य में हमें जिन सवालों से निपटना होगा, उनमें मुख्य महंगाई दर को ज्यादा महत्त्व दिए जाने और महंगाई दर में क्षेत्रीय आधार पर विविधता पर ज्यादा ध्यान दिया जाना शामिल है।

First Published : May 1, 2026 | 10:08 PM IST