अर्थव्यवस्था

पश्चिम एशिया संकट का दिखने लगा असर, मार्च में 19 महीने के निचले स्तर पर कोर सेक्टर की ग्रोथ

पश्चिम एशिया संकट और इनपुट की कमी से मार्च में भारत के कोर सेक्टर की ग्रोथ गिरकर 0.4% रह गई, जो पिछले 19 महीनों का सबसे निचला स्तर है

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हिमांशी भारद्वाज   
Last Updated- April 20, 2026 | 10:31 PM IST

भारत में 8 मुख्य उद्योगों में वृद्धि मार्च में 19 महीने के निम्न स्तर पर आ गई। आठ मुख्य उद्योगों के संयुक्त सूचकांक (आईसीआई) में 0.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि फरवरी में 2.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। यह वित्त वर्ष 2026 की चिंताजनक समाप्ति है, जिसमें संचयी वृद्धि घटकर 2.6 प्रतिशत रह गई, जो 5 वर्षों में सबसे कमजोर वृद्धि है। सोमवार को वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार यह 19 महीनों में दूसरी गिरावट है, जो अक्टूबर 2024 की -0.1 प्रतिशत की मामूली ऋणात्मक रीडिंग के बाद आई है।

मार्च में 8 क्षेत्रों में से 4 उर्वरक, कच्चा तेल, कोयला और बिजली  में ऋणात्मक वृद्धि दर्ज की गई और 6 क्षेत्रों में फरवरी की तुलना में मंदी आई है,  जिसमें इस्पात और सीमेंट शामिल हैं। मार्च में स्टील व सीमेंट क्षेत्र में क्रमशः 2.2 प्रतिशत और 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई।  मार्च में उर्वरक क्षेत्र में  किसी भी अन्य क्षेत्र की तुलना में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई है और यह 24.6 प्रतिशत संकुचित हुआ है, जबकि फरवरी में 3.4 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई थी।  ऐसे देखें तो अप्रैल 2012 से शुरू मौजूदा आंकड़ों की श्रृंखला में मार्च में सबसे तेज गिरावट हुई है।

इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण इनपुट की कमी हुई और उर्वरक का उत्पादन घट  गया। कच्चे तेल के उत्पादन में 5.7 प्रतिशत की गिरावट आई है। घरेलू उत्पादन में  लंबे समय से चल रही संरचनात्मक गिरावट का विस्तार हुआ है और पूरे साल का संयुक्त सूचकांक गिरकर 2.8 प्रतिशत पर आ गया है। प्राकृतिक गैस में भी सालाना आधार पर गिरावट आई है और मार्च में 6.4 प्रतिशत वृद्धि के बावजूद वित्त वर्ष 2026 में इसकी वृद्धि दर घटकर 2.8 प्रतिशत रह गई है। 

कोयले के उत्पादन में मार्च में 4 प्रतिशत का संकुचन आया है और वित्त वर्ष 2026 में इस क्षेत्र की कुल मिलाकर गिरावट 0.5 प्रतिशत रही है। 4 साल से चल रही वृद्धि इस वित्त वर्ष में उल्टी पड़ गई है। बिजली उत्पादन मार्च में 0.5 प्रतिशत कम हुआ, इसके बावजूद पूरे साल के दौरान 0.9 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज की गई है। 

सूचकांक में सबसे ज्यादा भार रिफाइनरी उत्पाद का होता है, जिसमें फरवरी के 1 प्रतिशत संकुचन की तुलना में मार्च में 0.1 प्रतिशत की  वृद्धि आई। हालांकि वार्षिक वृद्धि ऋणात्मक क्षेत्र में रही और 0.1 प्रतिशत संकुचन आया। इस्पात और सीमेंट इस वर्ष के बेहतरीन प्रदर्शनकर्ता साबित हुए हैं। इस्पात का उत्पादन मार्च में 2.2 प्रतिशत और वित्त  वर्ष 2026 में 9.1 प्रतिशत बढ़ा है। वहीं सीमेंट उत्पादन मार्च में 4 प्रतिशत और पूरे वित्त वर्ष में 8.6 प्रतिशत बढ़ा है।  

कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद और बिजली में वृद्धि इस वर्ष 5 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई, जबकि उर्वरक क्षेत्र 13 साल के निम्न स्तर पर आ गया।

First Published : April 20, 2026 | 10:05 PM IST