सेवा क्षेत्र का अभिन्न अंग बन चुकी भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था की भविष्य की वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए समर्पित मापन और औपचारीकरण की जरूरत है। सोमवार को सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (मोस्पी) के सचिव सौरभ गर्ग ने यह बात कही। गर्ग ने जोर दिया कि डिजिटल और रचनात्मक क्षेत्र सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से हैं, जो अब कृषि और विनिर्माण के बराबर आर्थिक वृद्धि के केंद्र में हैं।
गर्ग ने इस महत्त्वपूर्ण खंड के मापन के लिए सांख्यिकी मंत्रालय इंडेक्स ऑफ सर्विस प्रोडक्शन बनाने की कवायद कर रहा है, जो इस क्षेत्र के बढ़ते महत्त्व को दर्शाता है। गर्ग ने कहा, ‘हम जो करते हैं, उसके मापन की जरूरत है।’
उन्होंने इसे 2025 में नॉलेज इकॉनमी पर गठित विशेषज्ञों के समूह से जोड़ा, जहां बौद्धिक संपदा जैसी रचनात्मक चीजें – अनुसंधान, विकास, अन्वेषण, सॉफ्टवेयर और साहित्यिक /कलात्मक /मनोरंजन महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वर्ल्ड इंटेलएक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गेनाइजेशन का हवाला देते हुए गर्ग ने कहा कि अमू्र्त वृद्धि के ममले में भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में 6.6 प्रतिशत की सबसे तेज गति से वृद्धि कर रहा है।
ग्लोबल इनोवेशन रैंकिंग में भारत 2015 के 81वें स्थान से बढ़कर 2025 में 38वें स्थान पर पहुंच गया है, फिर भी आईपी फाइलिंग में पीछे हैं। गर्ग ने कहा, ‘ऐसे में मुझे लगता है कि हमारी अर्थव्यवस्था के पैमाने को देखते हुए, जिन संख्याओं की हम बात कर रहे हैं, वह उस स्तर से काफी कम है जो इसे होना चाहिए।’