अर्थव्यवस्था

पश्चिम एशिया संकट का असर: 13 साल के निचले स्तर पर पहुंचा उर्वरक उत्पादन, खेती को झटका

यह वित्त वर्ष 13 में आई 3.3 प्रतिशत की गिरावट के बाद पहली गिरावट और वर्तमान श्रृंखला के  गिरावट का पहला वार्षिक रिकॉर्ड है

Published by
हिमांशी भारद्वाज   
संजीब मुखर्जी   
Last Updated- April 21, 2026 | 10:14 PM IST

देश के मुख्य 8 उद्योगों के सूचकांक के तहत भारत का उर्वरक उत्पादन वित्त वर्ष 2025-26  के दौरान 13 वर्षों में सबसे कमजोर रही है। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में उर्वरक उत्पादन 0.1 प्रतिशत कम हो गया है। यह वित्त वर्ष 13 में आई 3.3 प्रतिशत की गिरावट के बाद पहली गिरावट और वर्तमान श्रृंखला के  गिरावट का पहला वार्षिक रिकॉर्ड है।

उर्वरक उत्पादन में वित्त  वर्ष 2024 में 3.7 प्रतिशत और वित्त  वर्ष 2025 में  2.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई और वित्त वर्ष 2026 में उत्पादन में आई गिरावट वित्त वर्ष 2013 से लगातार हो रही 2.1 प्रतिशत की औसत सालाना वृद्धि के विपरीत है। आंकड़ों से पता चला है कि वित्त वर्ष 2026 की गिरावट मार्च 2026 में 24.6 प्रतिशत के भारी संकुचन से तेज हुई, जो अप्रैल 2012 के बाद उत्पादन की मासिक निगरानी शुरू होने के बाद एक महीने में सर्वाधिक गिरावट है।

अगर 14 साल के आंकड़ों को देखें तो मार्च के पहले महामारी के दौर में आई गिरावट सहित 15 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट कभी नहीं देखी गई। इस मार्च में आई गिरावट से पूरे साल की वृद्धि ऋणात्मक क्षेत्र में चली गई, जबकि इसके पहले के महीनों में उत्पादन में वृद्धि देखी गई थी। उद्योग के एक अधिकारी ने कहा, ‘मार्च में उत्पादन में तेज गिरावट आई।  ज्यादातर यूरिया बनाने वाले संयंत्र बंद रहे, क्योंकि एलएनजी की आपूर्ति बंद होने के कारण इनके सालाना रखरखाव का काम किया जाने लगा। 

इसकी वजह से मार्च 2026 में वास्तविक यूरिया उत्पादन एक साल पहले की तुलना में करीब 27 प्रतिशत गिर गया और उत्पादन महज 18 लाख टन रहा।’  इतना ही नहीं, मार्च 2026 में भारत में पी और के उर्वरकों का उत्पादन लगभग 9 से 10 लाख टन रहा, जो मार्च 2025 की तुलना में 16 से 24 प्रतिशत कम था। इन उर्वरकों को बनाने के लिए जरूरी कच्चे माल की आपूर्ति बंद होने के कारण ऐसा हुआ।

अधिकारी ने कहा कि भारत सामान्यतया हर महीने 20 से 25 लाख टन यूरिया उत्पादन करता है, लेकिन मार्च में इसमें बड़ी गिरावट आई।  मुख्य क्षेत्र के आंकड़ों पर नजदीकी से नजर डालें तो पता चलता है कि वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में भी उर्वरक का उत्पादन गिरा था और उत्पादन में कुल मिलाकर गिरावट में इसकी भी भूमिका हो सकती है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘अप्रैल में उत्तर भारत का एक बड़ा यूरिया संयंत्र बंद हो गया, जिससे उत्पादन में करीब 5 से 6 लाख टन की कमी आई।’ उन्होंने कहा कि बाद के महीनों में उत्पादन में सुधार हुआ, लेकिन मार्च की धीमी गति ने सभी प्रयासों पर पानी फेर दिया।

अगर कॉम्पलेक्स उर्वरक के घरेलू उत्पादन की बात करें तो इसमें डीएपी और एनपी/एनपीकेएस आते हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि जनवरी 2026 तक डीएपी उत्पादन करीब 1.6 प्रतिशत कम था। इसकी भरपाई एनपी/एनपीकेएस उत्पादन में लगभग 12 प्रतिशत की वृद्धि से हुई। इसे फसलों के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है, क्योंकि यह संतुलित पोषण मुहैया कराता है।

 आधिकारिक सूत्रों का मानना है कि अप्रैल 2026 में भारत का घरेलू यूरिया उत्पादन एलएनजी की अधिक उपलब्धता के कारण अपने सामान्य स्तर   लगभग 20 टन के करीब आ जाएगा, जो मार्च के उत्पादन से करीब 11 प्रतिशत ज्यादा होगा, लेकिन यह पिछले साल अप्रैल के 21.8 लाख टन उत्पादन से कम रहेगा।

First Published : April 21, 2026 | 9:50 PM IST