अर्थव्यवस्था

रफ्तार में भारतीय उद्योग: फरवरी में औद्योगिक उत्पादन 5.2% बढ़ा, विनिर्माण क्षेत्र ने दिखाई मजबूती

विनिर्माण क्षेत्र में सुधार के चलते फरवरी में भारत का औद्योगिक उत्पादन बढ़कर 5.2% हो गया है, हालांकि वैश्विक संकट से भविष्य में जोखिम की आशंका बनी हुई है

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हिमांशी भारद्वाज   
Last Updated- March 30, 2026 | 10:15 PM IST

भारत का औद्योगिक उत्पादन फरवरी में जनवरी की तुलना में 10 आधार अंक बढ़कर 5.2 प्रतिशत पर पहुंच गया।  राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने सोमवार को जारी आंकड़ों में जनवरी, 2026 के लिए औद्योगिक उत्पादन वृद्धि के अनुमान को पहले जारी 4.8 प्रतिशत के अस्थायी अनुमान से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है। 

मामूली सुधार की वजह विनिर्माण क्षेत्र में रिकवरी है, जिसकी औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में हिस्सेदारी 78 प्रतिशत है। साथ ही कम आधार का भी असर पड़ा है।  

कुल मिलाकर औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) फरवरी में घटकर 159 पर रहा, जो इसके पहले महीने में 169.9 पर था। 

सालाना आधार पर विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन फरवरी में 6 प्रतित बढ़ा है, जिसमें जनवरी में 5.3 प्रतिशत वृद्धि हुई थी। वित्त वर्ष 2026 के शुरुआती 11 महीनों में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर 5 प्रतिशत रही, जो वित्त वर्ष 2025 की समान अवधि में 4.1 प्रतिशत थी। बिजली उत्पादन में वृद्धि फरवरी में 3 महीने के निचले स्तर पर 2.3 प्रतिशत रही, जो जनवरी में 5.2 प्रतिशत थी। 

खनन क्षेत्र का उत्पादन 3.1 प्रतिशत बढ़ा है, जिसकी जनवरी में वृद्धि 4.3 प्रतिशत थी।  वित्त वर्ष 2026 के शुरुआती 11 महीनों में खनन क्षेत्र का उत्पादन 0.8 प्रतिशत बढ़ा है। अंतिम उपयोग के आधार पर आईआईपी के 6 में से 4 खंडों में फरवरी में पिछले महीने की तुलना में सालाना प्रदर्शन सुधरा है। 

विनिर्माण के 23 प्रमुख क्षेत्रों में 14 में फरवरी में वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें कागज और कागज उत्पाद, रसायन और रसायन उत्पाद, गैर धातु खनिज उत्पाद, और फैब्रिकेटेड मेटल उत्पाद व अन्य शामिल हैं। इसमें से 4 में दो अंकों की वृद्धि हुई है, जिनमें बेसिक मेटल्स, मशीनरी और उपकरण, मोटर वाहन और अन्य ट्रांसपोर्ट उपकरण शामिल हैं। 

वहीं बेवरिजेज, तंबाकू उत्पाद, परिधान, लकड़ी व लकड़ी के उत्पाद और फॉर्मास्यूटिकल्स सहित 9 क्षेत्रों में संकुचन आया है। तंबाकू उत्पादों में सबसे अधिक 17 प्रतिशत संकुचन आया है, उसके बाद 16.6 प्रतिशत के साथ परिधान दूसरे स्थान पर है।

क्रिसिल की मुख्य अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे ने बताया, ‘पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण कीमतों में बढ़ोतरी और जरूरी इनपुट की आपूर्ति में कमी के कारण औद्योगिक उत्पादन को जोखिम हुआ है।’

First Published : March 30, 2026 | 10:15 PM IST