अर्थव्यवस्था

विनिर्माण क्षेत्र में लौटी रफ्तार: अप्रैल में 54.7 पर पहुंचा PMI, निर्यात और रोजगार के मोर्चे पर बड़ी राहत

निर्यात में तेजी और बढ़ते रोजगार के चलते अप्रैल में भारत का विनिर्माण पीएमआई सुधरकर 54.7 हो गया है। हालांकि, पश्चिम एशिया संकट के कारण लागत बढ़ने की चुनौती बरकरार है

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अहोना मुखर्जी   
Last Updated- May 04, 2026 | 10:18 PM IST

निर्यात में तेजी के कारण अप्रैल में निजी क्षेत्र की विनिर्माण गतिविधियों में तेजी आई है।  पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण मार्च में यह लुढ़ककर 4 साल के निचले स्तर पर आ गया था।

सोमवार को जारी एसऐंडपी ग्लोबल  द्वारा संकलित एचएसबीसी के इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) मार्च के 53.9 से बढ़कर अप्रैल में 54.7 हो गया। यह विनिर्माण उत्पादन में मासिक बदलाव को मापता है। हालांकि नए ऑर्डर का भारित औसत, आउटपुट, रोजगार, आपूर्तिकर्ताओं की डिलिवरी की अवधि और खरीद स्टॉक सूचकांकों का भारित औसत पिछले महीने जारी फ्लैश इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 55.9 से कम था। विनिर्माण पीएमआई का आंकड़ा 50 प्रतिशत से ऊपर बना हुआ है, जो गतिविधियों में विस्तार दिखाता है, जबकि इससे नीचे संकुचन का संकेत है। सूचकांक लगातार 54वें महीने विस्तार क्षेत्र में रहा है।

एचएसबीसी में चीफ इंडिया इकनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, ‘भारत का विनिर्माण पीएमआई  अप्रैल में बढ़कर 54.7 हो गया, जो मार्च के 53.9 से ऊपर है। फिर भी यह लगभग 4 वर्षों में परिचालन स्थितियों में दूसरी सबसे धीमी सुधार को दर्शाता है। पश्चिम एशिया संघर्ष का प्रभाव अधिक स्पष्ट होता जा रहा है, खासकर महंगाई पर इसका असर पड़ रहा है और अगस्त 2022 के बाद इनपुट लागत सबसे तेजी से महंगी हुई है और आउटपुट की कीमतें 6 महीने में सबसे तेज दर से बढ़ीं।’सर्वे में कहा गया है कि नए व्यसाय की मात्रा और उत्पादन में मामूली सुधार हुआ और वृद्धि की दर 2022 के बाद दूसरी सबसे कमजोर स्थिति में रही है।

नए ऑर्डर और उत्पादन में वृद्धि हुई है, लेकिन यह भी कम से कम साढ़े तीन साल के आंकड़ों से नीचे है, क्योंकि प्रतिस्पर्धी स्थिति, पश्चिम एशिया में जंग और लंबित मांग को मंजूरी देने को लेकर अनिच्छा के कारण वृद्धि प्रभावित हुई है।

इस बीच पहली वित्तीय तिमाही की शुरुआत में नए निर्यात ऑर्डर में तेज वृद्धि हुई और वृद्धि दर 7 महीने के उच्च स्तर पर थी।

एल्युमीनियम, रसायन, इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स, ईंधन, चमड़े, पेट्रोलियम उत्पादों और रबर की उच्च कीमतों के कारण अप्रैल में औसत लागत का बोझ और बढ़ गया। सर्वे में शामिल लोगों ने इसकी वजह पश्चिम एशिया युद्ध को बताया।  

सर्वे में कहा गया है, ‘महंगाई की समग्र दर अगस्त 2022 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। इसके बाद माल उत्पादकों ने 6 महीने में अपनी फीस सबसे अधिक बढ़ाई।’ एकमात्र उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र की लागत में नरमी देखी गई, लेकिन वृद्धि दर अधिक  रही।  

भंडारी ने कहा, ‘उत्पादन, नए ऑर्डर (निर्यात सहित) और रोजगार सभी मध्यम रूप से बढ़े, जो भारत के विनिर्माण क्षेत्र में निरंतर लचीलेपन का संकेत देते हैं।’

सर्वे के मुताबिक रोजगार सृजन की दर 10 माह में सबसे अधिक रही, जिससे भर्ती में वृद्धि के संकेत मिलते हैं।

First Published : May 4, 2026 | 10:12 PM IST