facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

विनिर्माण क्षेत्र में लौटी रफ्तार: अप्रैल में 54.7 पर पहुंचा PMI, निर्यात और रोजगार के मोर्चे पर बड़ी राहत

Advertisement

निर्यात में तेजी और बढ़ते रोजगार के चलते अप्रैल में भारत का विनिर्माण पीएमआई सुधरकर 54.7 हो गया है। हालांकि, पश्चिम एशिया संकट के कारण लागत बढ़ने की चुनौती बरकरार है

Last Updated- May 04, 2026 | 10:18 PM IST
India Manufacturing PMI may 2026
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

निर्यात में तेजी के कारण अप्रैल में निजी क्षेत्र की विनिर्माण गतिविधियों में तेजी आई है।  पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण मार्च में यह लुढ़ककर 4 साल के निचले स्तर पर आ गया था।

सोमवार को जारी एसऐंडपी ग्लोबल  द्वारा संकलित एचएसबीसी के इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) मार्च के 53.9 से बढ़कर अप्रैल में 54.7 हो गया। यह विनिर्माण उत्पादन में मासिक बदलाव को मापता है। हालांकि नए ऑर्डर का भारित औसत, आउटपुट, रोजगार, आपूर्तिकर्ताओं की डिलिवरी की अवधि और खरीद स्टॉक सूचकांकों का भारित औसत पिछले महीने जारी फ्लैश इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 55.9 से कम था। विनिर्माण पीएमआई का आंकड़ा 50 प्रतिशत से ऊपर बना हुआ है, जो गतिविधियों में विस्तार दिखाता है, जबकि इससे नीचे संकुचन का संकेत है। सूचकांक लगातार 54वें महीने विस्तार क्षेत्र में रहा है।

एचएसबीसी में चीफ इंडिया इकनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, ‘भारत का विनिर्माण पीएमआई  अप्रैल में बढ़कर 54.7 हो गया, जो मार्च के 53.9 से ऊपर है। फिर भी यह लगभग 4 वर्षों में परिचालन स्थितियों में दूसरी सबसे धीमी सुधार को दर्शाता है। पश्चिम एशिया संघर्ष का प्रभाव अधिक स्पष्ट होता जा रहा है, खासकर महंगाई पर इसका असर पड़ रहा है और अगस्त 2022 के बाद इनपुट लागत सबसे तेजी से महंगी हुई है और आउटपुट की कीमतें 6 महीने में सबसे तेज दर से बढ़ीं।’सर्वे में कहा गया है कि नए व्यसाय की मात्रा और उत्पादन में मामूली सुधार हुआ और वृद्धि की दर 2022 के बाद दूसरी सबसे कमजोर स्थिति में रही है।

नए ऑर्डर और उत्पादन में वृद्धि हुई है, लेकिन यह भी कम से कम साढ़े तीन साल के आंकड़ों से नीचे है, क्योंकि प्रतिस्पर्धी स्थिति, पश्चिम एशिया में जंग और लंबित मांग को मंजूरी देने को लेकर अनिच्छा के कारण वृद्धि प्रभावित हुई है।

इस बीच पहली वित्तीय तिमाही की शुरुआत में नए निर्यात ऑर्डर में तेज वृद्धि हुई और वृद्धि दर 7 महीने के उच्च स्तर पर थी।

एल्युमीनियम, रसायन, इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स, ईंधन, चमड़े, पेट्रोलियम उत्पादों और रबर की उच्च कीमतों के कारण अप्रैल में औसत लागत का बोझ और बढ़ गया। सर्वे में शामिल लोगों ने इसकी वजह पश्चिम एशिया युद्ध को बताया।  

सर्वे में कहा गया है, ‘महंगाई की समग्र दर अगस्त 2022 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। इसके बाद माल उत्पादकों ने 6 महीने में अपनी फीस सबसे अधिक बढ़ाई।’ एकमात्र उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र की लागत में नरमी देखी गई, लेकिन वृद्धि दर अधिक  रही।  

भंडारी ने कहा, ‘उत्पादन, नए ऑर्डर (निर्यात सहित) और रोजगार सभी मध्यम रूप से बढ़े, जो भारत के विनिर्माण क्षेत्र में निरंतर लचीलेपन का संकेत देते हैं।’

सर्वे के मुताबिक रोजगार सृजन की दर 10 माह में सबसे अधिक रही, जिससे भर्ती में वृद्धि के संकेत मिलते हैं।

Advertisement
First Published - May 4, 2026 | 10:12 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement