अर्थव्यवस्था

पश्चिम एशिया तनाव से भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 30 अरब डॉलर घटा, रुपये पर दबाव बढ़ा

विदेशी मुद्रा संपत्तियों और सोने के भंडार में गिरावट के कारण 27 मार्च को समाप्त सप्ताह में कुल भंडार 10.28 अरब डॉलर घटकर 688.05 अरब डॉलर रह गया है

Published by
अंजलि कुमारी   
अनुप्रेक्षा जैन   
Last Updated- April 03, 2026 | 9:51 PM IST

पश्चिम एशिया में फरवरी के आखिर में शुरू हुए टकराव के बाद से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 30.5 अरब डॉलर की गिरावट आई है। इसकी प्रमुख वजह विदेशी मुद्रा बाजार में उतार चढ़ाव को रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का हस्तक्षेप और मार्च में डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में 4 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट है।

रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक विदेशी मुद्रा संपत्तियों और सोने के भंडार में गिरावट के कारण 27 मार्च को समाप्त सप्ताह में कुल भंडार 10.28 अरब डॉलर घटकर 688.05 अरब डॉलर रह गया है।

27 फरवरी 2026 को समाप्त सप्ताह में कुल भंडार 728.5 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर था। विदेशी मुद्रा संपत्तियों में 6.62 अरब डॉलर की गिरावट आई है, जबकि सोने के भंडार में इस सप्ताह के दौरान 3.66 अरब डॉलर की गिरावट आई है।

इस सप्ताह के दौरान विशेष निकासी अधिकार (एसडीआर) 1.7 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.64 अरब डॉलर हो गया। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में भारत के भंडार की स्थिति 1.7 करोड़ डॉलर घटकर 4.81 अरब डॉलर रह गई है।

पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल भंडार 22.72 अरब डॉलर बढ़ा है। सोने के भंडार में बढ़ोतरी के कारण ऐसा हुआ क्योंकि विदेशी मुद्रा संपत्ति (एफसीए) में गिरावट आई है और यह वित्त वर्ष 2026 में 14 अरब डॉलर घटा है। वित्त वर्ष 2025 में एफसीए 5.6 अरब डॉलर कम हुआ था।

विदेशी मुद्रा संपदा की गणना डॉलर के हिसाब से की जाती है। इसके आधार पर गैर अमेरिकी मुद्राओं जैसे यूरो, पाउंड स्टर्लिंग और येन में मजबूती और कमजोरी का पता चलता है और यह विदेशी मुद्रा भंडार का हिस्सा बनते हैं।

बंधन एएमसी में फिक्स्ड इनकम के वरिष्ठ अर्थशास्त्री एस. बालासुब्रमण्यन ने पिछले सप्ताह एक नोट में कहा था कि हाजिर फॉरेक्स रिजर्व में बढ़ोतरी की मुख्य वजह सोने का अधिक मूल्यांकन है।

नोट में कहा गया है, ‘वित्त वर्ष 2024 से वित्त वर्ष 2026 के दौरान एफसीए का हिस्सा 8 प्रतिशत अंक कम हो गया है, क्योंकि रखे गए सोने की मात्रा में हर साल लगभग 50 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी हुई है। इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह सोने की ज्यादा कीमतें हैं, क्योंकि वित्त वर्ष 2025 में सोने की मात्रा में सिर्फ 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी, जो पिछले वर्षों के मुकाबले कोई बहुत बड़ी बढ़ोतरी नहीं है।’

इसमें कहा गया है कि भूराजनीतिक दबाव और पूंजी की आवक में दबाव बना रहा, डॉलर मजबूत होता रहा और रिजर्व बैंक का हस्तक्षेप जारी रहा तो एफसीए आगे और कम होगा।

First Published : April 3, 2026 | 9:40 PM IST