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One Nation, One Election: कोविंद समिति ने की एक देश, एक चुनाव की सिफारिश, संविधान में संशोधन की होगी जरूरत

समिति ने यह भी सिफारिश की है कि भारत निर्वाचन आयोग राज्य चुनाव अधिकारियों के परामर्श से एकल मतदाता सूची और मतदाता पहचान पत्र तैयार करे।

Last Updated- March 14, 2024 | 9:43 PM IST
One country, one election: Demand for one country, one election, need to amend the Constitution One Nation, One Election: कोविंद समिति ने की एक देश, एक चुनाव की सिफारिश, संविधान में संशोधन की होगी जरूरत

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्च-स्तरीय समिति ने पहले कदम के तहत लोक सभा और राज्य विधान सभाओं के लिए एक साथ चुनाव कराने तथा इसके बाद 100 दिनों के भीतर एक साथ स्थानीय निकाय चुनाव कराने की गुरुवार को सिफारिश की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी गई 18,626 पृष्ठों की रिपोर्ट में कोविंद की अगुआई वाली समिति ने कहा कि एक साथ चुनाव कराए जाने से विकास प्रक्रिया और सामाजिक एकजुटता को बढ़ावा मिलेगा, लोकतांत्रिक परंपरा की नींव गहरी होगी और ‘इंडिया जो कि भारत है’ की आकांक्षाओं को साकार करने में मदद मिलेगी।

इस समिति ने अपनी सिफारिशों में कहा कि त्रिशंकु स्थिति या अविश्वास प्रस्ताव या ऐसी किसी स्थिति में नई लोक सभा के गठन के लिए नए सिरे से चुनाव कराए जा सकते हैं। समिति ने कहा कि लोक सभा के लिए जब नए चुनाव होते हैं, तो उस सदन का कार्यकाल ठीक पहले की लोक सभा के कार्यकाल के शेष समय के लिए ही हो।

समिति ने यह भी कहा कि जब राज्य विधान सभाओं के लिए नए चुनाव होते हैं, तो ऐसी नई विधान सभाओं का कार्यकाल (अगर जल्दी भंग नहीं हो जाएं) लोक सभा के पूर्ण कार्यकाल तक रहेगा। समिति ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था लागू करने के लिए, संविधान के अनुच्छेद 83 (संसद के सदनों की अवधि) और अनुच्छेद 172 (राज्य विधान मंडलों की अवधि) में संशोधन की आवश्यकता होगी। समिति ने कहा, ‘इस संवैधानिक संशोधन की राज्यों द्वारा पुष्टि किए जाने की आवश्यकता नहीं होगी।’

समिति ने यह भी सिफारिश की है कि भारत निर्वाचन आयोग राज्य चुनाव अधिकारियों के परामर्श से एकल मतदाता सूची और मतदाता पहचान पत्र तैयार करे। समिति ने कहा कि इस उद्देश्य के लिए मतदाता सूची से संबंधित अनुच्छेद 325 को संशोधित किया जा सकता है। फिलहाल, भारत निर्वाचन आयोग पर लोक सभा और विधान सभा चुनावों की जिम्मेदारी है, जबकि नगर निकायों और पंचायत चुनावों की जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयोगों पर है।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘अब हर साल कई चुनाव हो रहे हैं। इससे सरकार, व्यवसायों, कामगारों, अदालतों, राजनीतिक दलों, चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों और बड़े पैमाने पर नागरिक संगठनों पर भारी बोझ पड़ता है।’

इसमें कहा गया है कि सरकार को एक साथ चुनाव प्रणाली लागू करने के लिए ‘कानूनी रूप से व्यवहार्य तंत्र’ विकसित करना चाहिए। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि संविधान के मौजूदा प्रारूप को ध्यान में रखते हुए समिति ने अपनी सिफारिशें इस तरह तैयार की हैं कि वे संविधान की भावना के अनुरूप हैं तथा उसके लिए संविधान में संशोधन करने की नाममात्र जरूरत है।

कोविंद ने जब राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति मूर्मू को रिपोर्ट सौंपी, उस वक्त उनके साथ समिति के सदस्य गृह मंत्री अमित शाह, वित्त आयोग के पूर्व प्रमुख एनके सिंह, लोक सभा के पूर्व महासचिव सुभाष कश्यप, राज्य सभा में विपक्ष के पूर्व नेता गुलाम नबी आजाद और विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी थे।

बयान के अनुसार इस उच्चस्तरीय समिति का गठन 2 सितंबर, 2023 को किया गया था और हितधारकों व विशेषज्ञों के साथ व्यापक परामर्श और 191 दिनों के शोध के बाद यह रिपोर्ट तैयार की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक साथ चुनाव के विचार का समर्थन करते रहे हैं और उन्होंने कहा है कि देश को महान बनाने के लिए ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की अवधारणा जरूरी है।

छह देशों का अध्ययन

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली समिति ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ मुद्दे पर अपनी रिपोर्ट सौंपने से पहले दक्षिण अफ्रीका, स्वीडन और बेल्जियम सहित छह देशों की चुनाव प्रक्रियाओं का भी अध्ययन किया। जर्मनी, जापान, इंडोनेशिया और फिलिपींस में भी एक साथ चुनाव होते हैं। समिति की रिपोर्ट के अनुसार अध्ययन का उद्देश्य चुनावों में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं को अपनाना है। समिति के सदस्य सुभाष सी कश्यप ने जर्मनी में संसद द्वारा चांसलर की नियुक्ति की प्रक्रिया के अलावा अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के मॉडल का समर्थन किया। जापान में प्रधानमंत्री को पहले संसद द्वारा नियुक्त किया जाता है और उसके बाद सम्राट उन्हें मंजूरी देते हैं।

समर्थन में 32 दल

समिति ने रिपोर्ट तैयार करने के लिए देश भर के 62 राजनीतिक दलों से संपर्क किया। प्रक्रिया में हिस्सा लेने वाले 47 राजनीतिक दलों में से 32 ने एक साथ चुनाव कराने के विचार का समर्थन किया, जबकि 15 ने विरोध किया। कुल 15 पार्टियों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। राष्ट्रीय दलों में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने देश में एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव का विरोध किया, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) ने इसका समर्थन किया।

First Published - March 14, 2024 | 9:43 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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