facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

प्रधानमंत्री का आरोप, द्रमुक ने मछुआरों के हितों की सुरक्षा के लिए कुछ नहीं किया

Advertisement

एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस और द्रमुक को 'परिवार यूनिट' बताया जो केवल अपने बेटे-बेटियों की परवाह करते हैं।

Last Updated- April 01, 2024 | 11:36 PM IST
Prime Minister Modi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को आरोप लगाया कि द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) ने तमिलनाडु के मुछुआरों के हितों की रक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक अखबार में छपी खबर का लिंक भी शेयर किया, जिसमें कहा गया कि कच्चातिवु द्वीप को श्रीलंका को सौंपने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने द्रमुक नेतृत्व को विश्वास में लिया था।

एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस और द्रमुक को ‘परिवार यूनिट’ बताया जो केवल अपने बेटे-बेटियों की परवाह करते हैं। उन्होंने कहा कि कच्चातिवु पर दोनों दलों की लापरवाही का खमियाजा गरीब मछुआरों को भुगतना पड़ा है। प्रधानमंत्री ने इसी मुद्दे पर एक दिन पहले कांग्रेस पर तगड़ा हमला बोला था। मालूम हो कि कांग्रेस और द्रमुक दोनों ही इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं और तमिलनाडु में मिलकर सरकार चला रहे हैं।

दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्रियों एम. करुणानिधि और जे. जयललिता के बीच हमेशा विवाद की जड़ रहा कच्चातिवु द्वीप का भावनात्मक मुद्दा लोक सभा चुनाव से ऐन पहले एक बार फिर गरमा गया है। इस द्वीप को भारत सरकार ने 1974 में श्रीलंका को सौंप दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस तथा उसके सहयोगी दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) को आड़े हाथों लिया जो समझौते के वक्त सत्ता में थे।

इसके बाद तमिलनाडु में लोक सभा चुनाव के लिए 19 अप्रैल को होने वाले मतदान से कुछ दिनों पहले यह मुद्दा अब केंद्र में आ गया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को दावा किया कि कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों ने कच्चातिवु द्वीप को लेकर उदासीनता दिखाई और भारतीय मछुआरों के अधिकार छीन लिए।

फिलहाल लड़ाई केवल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस-द्रमुक गठबंधन के बीच ही प्रतीत होती है। भाजपा इस द्वीप को श्रीलंका को सौंपने के लिए कांग्रेस तथा द्रमुक को जिम्मेदार ठहरा रही है।

इस बीच, वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को कच्चातिवु के बजाय भारतीय क्षेत्र पर ‘चीनी कब्जे’ पर बोलना चाहिए। चिदंबरम ने कहा कि अच्छे संबंध बनाए रखने और लाखों तमिलों की जान बचाने के लिए यह द्वीप श्रीलंका को सौंप दिया गया था।

उल्लेखनीय है कि तमिल मछुआरों की लगातार गिरफ्तारी और उत्पीड़न के साथ कच्चातिवु वापस लेने का मुद्दा द्रविड़ राजनीति के दिग्गजों के बीच गहन बहस का विषय रहा है।

जयललिता ने एक बार मछुआरों की परेशानियों को समाप्त करने के लिए द्वीप को पुनः प्राप्त करने का संकल्प लिया था और उनकी पार्टी ने हमेशा इसे रोकने के वास्ते कुछ नहीं करने के लिए द्रविड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) को दोषी ठहराया है, हालांकि वर्ष 1974 में सत्ता की बागडोर उसी के पास थी।

करुणानिधि ने कहा था कि उन्होंने कभी भी द्वीप को सौंपे जाने को स्वीकार नहीं किया और न ही वह इसके लिए सहमत हुए। उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए अपना विरोध जताया था। द्रमुक ने हमेशा कहा है कि कच्चातिवु को सौंपे जाने के विरोध में उसने राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन किया था।

वास्तव में सत्तारूढ़ द्रमुक और अन्नाद्रमुक, दोनों ने कच्चातिवु को फिर से प्राप्त करने का समर्थन किया है। कच्चातिवु को वापस लेने का मुद्दा प्रमुख द्रविड़ दलों के बीच तीखी बहस का विषय रहा है। केंद्र में इंदिरा गांधी की सरकार के दौरान 1974 और 1976 में श्रीलंका को द्वीप को देने के लिए समझौते किए गए।

वर्ष 1971 के चुनाव में द्रमुक ने गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था। जयललिता ने अपनी निजी हैसियत से इस द्वीप को वापस पाने के लिए 2008 में उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।

Advertisement
First Published - April 1, 2024 | 11:23 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement