Tamil Nadu Election Results (AI generated image for reference)
Tamil Nadu Assembly election results 2026: तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों के लिए मतगणना सोमवार सुबह 8 बजे शुरू हुई। इस बार का चुनाव काफी खास माना जा रहा है, क्योंकि राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ देखने को मिल रहा है। मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है और इसके नतीजे तमिलनाडु की राजनीतिक दिशा बदल सकते हैं।
इस चुनाव में मुख्य लड़ाई मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की अगुवाई वाले द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी DMK गठबंधन, अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी AIADMK के नेतृत्व वाले गठबंधन जिसे बीजेपी का समर्थन मिला है, और अभिनेता से नेता बने विजय की नई पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कड़गम’ यानी TVK के बीच है।
शुरुआती रुझानों में विजय की पार्टी शानदार प्रदर्शन करती नजर आ रही है। TVK ने 100 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बना ली है, जिससे राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर संभव माना जा रहा है। खुद विजय पेरंबूर और तिरुचिरापल्ली पूर्व सीट से आगे चल रहे हैं। पेरंबूर में वह करीब 2,990 वोटों से और तिरुचिरापल्ली पूर्व में लगभग 3,299 वोटों से बढ़त बनाए हुए हैं।
वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को उनके मजबूत गढ़ कोलाथुर सीट पर कड़ी चुनौती मिल रही है और वह पीछे चल रहे हैं। उनके बेटे और डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन भी चेपॉक तिरुवल्लिकेनी सीट से पीछे बताए जा रहे हैं।
एआईएडीएमके से जुड़े नेता ओ पन्नीरसेल्वम बोडिनायकनूर सीट से करीब 2,600 से अधिक वोटों से आगे हैं, जिससे इस गठबंधन को भी कुछ राहत मिलती दिख रही है।
तमिलनाडु में आमतौर पर मुकाबला डीएमके और एआईएडीएमके के बीच होता रहा है, लेकिन इस बार विजय की एंट्री ने समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। उनकी पार्टी खुद को डीएमके और बीजेपी दोनों के खिलाफ बता रही है। विजय ने एक तरफ डीएमके को अपना राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बताया है, तो दूसरी तरफ बीजेपी को वैचारिक विरोधी कहा है।
तमिलनाडु की राजनीति में इस बार अभिनेता से नेता बने Vijay की एंट्री ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। उनकी पार्टी TVK ने खुद को न तो डीएमके के साथ जोड़ा है और न ही बीजेपी के साथ। विजय खुलकर डीएमके को अपना राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बताते हैं, जबकि बीजेपी को वैचारिक विरोधी मानते हैं। ऐसे में उनका रुख साफ है कि वह दोनों प्रमुख धड़ों से अलग अपनी जगह बनाना चाहते हैं।
विजय के चुनाव प्रचार में तमिल पहचान और राज्य के अधिकार जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं। उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि वह राज्यों के अधिकारों को कमजोर कर रही है और तमिल अस्मिता को नजरअंदाज कर रही है। दूसरी तरफ, उन्होंने एआईएडीएमके पर सीधा हमला करने से दूरी बनाए रखी है। इसे एक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, ताकि पारंपरिक द्रविड़ वोटरों को नाराज न किया जाए।
उनका चुनाव अभियान काफी नाटकीय भी रहा है। रैलियों और कार्यक्रमों को लेकर कई विवाद सामने आए। इसके अलावा उनकी कथित आखिरी फिल्म ‘Jana Nayagan’ की रिलीज भी अटक गई, जिससे चर्चा और बढ़ गई। इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विजय अपनी स्टार छवि को वोटों में बदल पाएंगे या फिर उनका असर सिर्फ विपक्ष के वोट बांटने तक सीमित रहेगा, जिससे डीएमके को फायदा मिल सकता है।
इस चुनाव में कुछ सीटें खास तौर पर चर्चा में हैं। कोलाथुर सीट से मुख्यमंत्री M. K. Stalin अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं तिरुचि ईस्ट सीट से विजय चुनावी मैदान में पहली बार उतर रहे हैं, जहां मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा है। पेरंबूर भी एक ऐसी सीट है जहां विजय अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
एडप्पडी सीट एआईएडीएमके नेता Edappadi K. Palaniswami का गढ़ मानी जाती है, जहां उनकी प्रतिष्ठा दांव पर है। वहीं कोयंबटूर साउथ सीट पर बीजेपी और डीएमके गठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।
इस चुनाव में Udhayanidhi Stalin भी चर्चा में हैं, जिन्हें डीएमके के भविष्य के चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने अपने पिता की तरह ही राजनीति में कदम बढ़ाया है, लेकिन फिल्मी पृष्ठभूमि और युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता उन्हें अलग पहचान देती है।
डीएमके के यूथ विंग का नेतृत्व करने से लेकर उपमुख्यमंत्री बनने तक का उनका सफर यह दिखाता है कि पार्टी में विरासत और संगठन दोनों साथ-साथ चलते हैं। अब देखना यह होगा कि वह इस जिम्मेदारी को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।