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West Bengal Election Results 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां Bharatiya Janata Party (BJP) ने राज्य में 15 साल से चल रहे All India Trinamool Congress (AITMC) के शासन को समाप्त कर दिया है। इस बदलाव के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि राज्य सरकार BJP के चुनावी घोषणापत्र “संकल्प पत्र” में किए गए बड़े वादों को किस तरह पूरा करेगी और इसके लिए वित्तीय संसाधन कहां से आएंगे।
BJP के संकल्प पत्र में कई महत्वाकांक्षी वादे किए गए हैं, जिनका सीधा असर राज्य के बजट पर पड़ सकता है। इनमें प्रमुख वादों में महिलाओं और बेरोजगार युवाओं को हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने की योजना शामिल है। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को राहत देना और उनकी मासिक आय में स्थिरता लाना बताया गया है।
इसके अलावा, सरकार ने राज्य में 7वें वेतन आयोग को लागू करने का भी वादा किया है। अगर यह लागू होता है तो सरकारी कर्मचारियों के वेतन में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। साथ ही महंगाई भत्ते (Dearness Allowance) में बढ़ोतरी का भी प्रस्ताव है, जिससे कर्मचारियों की कुल आय में वृद्धि होगी।
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राज्यों की वित्तीय स्थिति को लेकर जारी आंकड़े बताते हैं कि आने वाले वर्षों में खर्च करने की गुंजाइश सीमित बनी रहेगी। हालिया अनुमानों के अनुसार 2024-25 में राज्यों का राजकोषीय घाटा उनके सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का 3.6 प्रतिशत रहा। इसके बाद यह घटकर वित्त वर्ष 2025-26 (संशोधित अनुमान) में 3 प्रतिशत और 2026-27 के बजट अनुमान में 2.9 प्रतिशत तक आने की उम्मीद है। यह गिरावट दर्शाती है कि सरकारें धीरे-धीरे वित्तीय अनुशासन की ओर बढ़ रही हैं, लेकिन अभी भी दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
राजस्व घाटे की स्थिति में भी सुधार देखने को मिला है। यह 1.7 प्रतिशत से घटकर 1.5 प्रतिशत और फिर लगभग 1 प्रतिशत तक पहुंच गया है। हालांकि यह कमी सकारात्मक संकेत देती है, लेकिन यह भी साफ है कि राज्यों के पास बड़े पैमाने पर नए खर्च करने की क्षमता सीमित हो रही है।
कुल कर्ज की स्थिति अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान के अनुसार राज्यों का कर्ज स्तर लगभग 38 प्रतिशत तक बना हुआ है। यह उच्च स्तर बताता है कि उधारी पर निर्भरता अभी भी काफी ज्यादा है।
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राजस्व स्रोतों की बात करें तो राज्यों की अपनी कर आय कुल राजस्व प्राप्तियों का लगभग 41 प्रतिशत ही है। इसका मतलब है कि आधे से भी कम राजस्व खुद के संसाधनों से आता है, जिससे केंद्र पर निर्भरता बनी रहती है।
खर्च के ढांचे में भी ज्यादा बदलाव नहीं दिख रहा है। कुल खर्च का बड़ा हिस्सा अभी भी राजस्व व्यय में जा रहा है, जबकि पूंजीगत व्यय केवल लगभग 4 प्रतिशत GSDP तक सीमित है। आने वाले समय में वेतन संशोधन और कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार से राजस्व व्यय और बढ़ सकता है, जिससे विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय जगह और कम हो सकती है।