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वादे तो पूरे होंगे, लेकिन खजाने का क्या? विजय की कल्याणकारी योजनाओं से बढ़ सकता है आर्थिक दबाव

महिलाओं को मासिक ₹2500 और कर्ज माफी जैसे लोकलुभावन वादों ने विजय की पार्टी को जीत दिलाई, हालांकि इन योजनाओं से राज्य के खजाने पर बोझ बढ़ना तय है

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यश कुमार सिंघल   
Last Updated- May 04, 2026 | 11:25 PM IST

तमिलनाडु विधान सभा चुनाव में मजबूत ताकत के रूप में उभरी तमिलगा वेट्टी कषगम (टीवीके) के घोषणा पत्र में विकास परियोजनाओं के साथ-साथ महिलाओं, युवाओं तथा समाज के कमजोर वर्गों को लक्षित करने वाली कल्याणकारी योजनाओं का मिश्रण था, जिसने मतदाताओं को आकर्षित किया। यह अलग बात है कि इन वादों को पूरा करने में राज्य की वित्तीय स्थिति पर दबाव पड़ सकता है। राज्य की वित्तीय हालत कोविड महामारी के बाद से काफी हद तक स्थिर बनी हुई है।

समाज के प्रमुख वर्गों को लुभाने के लिए टीवीके के घोषणापत्र में महिला मुखियाओं को हर महीने 2,500 रुपये सहायता, बच्चों को बीच में पढ़ाई छोड़ने से रोकने के लिए हर मां या अभिभावक को सालाना 15,000 रुपये, स्नातकों और डिप्लोमा धारकों के लिए बेरोजगारी भत्ता, फसल ऋण की माफी और बुनकर परिवारों के लिए मुफ्त बिजली व हर साल 30,000 रुपये की नकद वित्तीय सहायता जैसी कई कल्याणकारी योजनाएं शामिल की गई थीं।

तमिलनाडु का वित्त वर्ष 25 में वित्तीय घाटा राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 3.24 प्रतिशत था, जो वित्त वर्ष 24 की तुलना में थोड़ा कम है। वित्तीय घाटा महामारी से पहले के स्तर पर पहुंच गया है। यह महामारी के दौरान वाले वित्त वर्ष 21 के बाद से लगातार धीरे-धीरे कम हो रहा है।

First Published : May 4, 2026 | 11:21 PM IST