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अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण आई बाधाएं करीब 2 महीने से जारी हैं, लेकिन अब तक भारत के प्रमुख बैंकों की परिसंपत्ति की गुणवत्ता पर कोई असर नहीं पड़ा है। वहीं बैंकरों का कहना है कि चालू तिमाही में कुछ प्रभाव दिख सकता है। उन्होंने कहा कि वे सतर्क बने हुए हैं और तनाव के किसी भी संकेत के लिए अपने पोर्टफोलियो की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं। साथ ही बैंक उम्मीद जता रहे हैं कि आने वाले महीनों में स्थिति सुधर सकती है।
एचडीएफसी बैंक में उप प्रबंध निदेशक कैजाद भरूचा के अनुसार तेल व गैस और उनसे सीधे जुड़े क्षेत्रों में कुछ हद तक व्यवधान देखा गया है। बहरहाल इस संकट से निपटने में कॉरपोरेट सक्षम हैं, जो उत्साहजनक है। भरूचा ने कहा, ‘वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कुछ मामूली असर नजर आ सकता है। लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह उससे आगे जाएगा। हमारा पोर्टफोलियो बहुत अच्छी तरह से बना हुआ है। हमने कोई संकेत नहीं देखा है। हालांकि एसएमई कारोबारियों, खासकर कुछ क्षेत्र चुनौतियों से जूझ रहे हैं। मुझे लगता है कि एक या दो महीने की मंदी के बाद उनका कारोबार फिर पटरी पर आ जाएगा। प्रभाव है, लेकिन बहुत सीमित है। लेकिन बुनियादी मांग और सकारात्मकता बनी हुई है, जो अर्थव्यवस्था की मजबूती को रेखांकित करती है।’ एचडीएफसी बैंक ने भूराजनीतिक अनिश्चितता और वृहद आर्थिक स्थितियों के संभावित असर को देखते हुए अपना वृद्धि अनुमान कम किया है। बैंक ने कहा है कि वह वित्त वर्ष 2026 की अपनी रफ्तार बरकरार रखेगा। आईसीआईसीआई बैंक के कार्यकारी निदेशक संदीप बत्रा के अनुसार पश्चिम एशिया संकट की यील्ड और करेंसी पर तात्कालिक असर पड़ा है और वित्त वर्ष 2026 के आंकड़ों में यह कुछ नजर आ रहा है।
बत्रा ने कहा, ‘हम संकेतकों की निगरानी जारी रखेंगे। आर्थिक वृद्धि और संभावित व्यापार मांग पर प्रभाव संघर्ष की अवधि पर निर्भर करेगा। रिजर्व बैंक ने उल्लेख किया है कि आपूर्ति झटकों के कारण कुछ अनिश्चितता है। हम उम्मीद करते हैं कि चीजें जल्द ही बेहतर होंगी।’
उन्होंने कहा कि आईसीआईसीआई बैंक की नकदी, प्रॉविजनिंग और पूंजी के हिसाब से मजबूत बैलेंस शीट है।
वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में आईसीआईसीआई बैंक की ट्रेजरी आय ऋणात्मक 106 करोड़ रुपये थी, जबकि पिछले साल की इसी अवधि में यह 239 करोड़ रुपये थी।
मार्च में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पश्चिम एशिया संकट के कारण मुद्रा के रिकॉर्ड गिरावट को देखते हुए विदेशी मुद्रा बाजार में अपनी निगरानी को कड़ी कर दी थी और रुपये में बैंकों की शुद्ध ओपन पोजीशन को 10 करोड़ डॉलर तक सीमित कर दिया था। बैंकों द्वारा शुद्ध ओपन पोजीशन को अनवाइंड करने से वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में कुछ नुकसान हुआ, जबकि नुकसान का एक हिस्सा वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में नजर आएगा, क्योंकि बैंकों को 10 अप्रैल तक अपनी पोजीशन को अनवाइंड करने का समय दिया गया था।
एचडीएफसी बैंक के एमडी और सीईओ शशिधर जगदीशन ने कहा, ‘असर पड़ा है। संख्या सार्वजनिक रूप से मौजूद नहीं है, लेकिन मार्च तक एक आंशिक प्रभाव पड़ा है। 7 अप्रैल तक भी इसका थोड़ा प्रभाव रहेगा। लेकिन यह हमारे लिए अलग से डिस्क्लोजर के हिसाब से महत्त्वपूर्ण नहीं है। इसके असर के कारण पूरे साल के दौरान विदेशी मुद्रा से होने वाले राजस्व आय में थोड़ी सुस्त वृद्धि नजर आ सकती है।’
एचडीएफसी बैंक की विदेशी मुद्रा और डेरिवेटिव राजस्व वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में 3.5 प्रतिशत बढ़कर 1,490 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल की इसी अवधि में 1,440 करोड़ रुपये था। पश्चिम एशिया युद्ध के असर के बारे में येस बैंक के कार्यकारी निदेशक मनीष जैन ने कहा कि बैंक अपने पोर्टफोलियो पर बहुत बारीकी से नजर रख रहा है। अभी कोई असर नहीं है।
जैन ने कहा, ‘हमारे सभी ग्राहक, चाहे वे बड़े हों या एमएसएमई, अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन हम इस तथ्य से अवगत हैं कि युद्ध के कारण साल के दौरान महंगाई बढ़ने का असर पड़ सकता है और बड़े पोर्टफोलियो परोक्ष रूप से प्रभावित हो सकते हैं। इसका असर पूरे उद्योग पर रहेगा और पोर्टफोलियो पर बारीकी से नजर रहेगी।’