निजी क्षेत्र के दूसरे और तीसरे सबसे बड़े ऋणदाता आईसीआईसीआई बैंक और और ऐक्सिस बैंक ने विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक (एफसीएनआर-बी) जमाओं पर ब्याज की दरों में भारी बढ़ोतरी कर दी है। आईसीआईसीआई बैंक ने इन पर 310 आधार अंक और ऐक्सिस बैंक ने 305 आधार अंक तक ब्याज बढ़ाया है। इसके साथ ही 3 से 5 वर्ष में पूरी होने वाली जमा पर ब्याज की दर 6 प्रतिशत तक पहुंच गई हैं और ये दरें भारतीय स्टेट बैंक तथा एचडीएफसी बैंक की दरों के बराबर हो गई हैं। नई दरें आज से लागू हो गई हैं।
सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक ऑफ बड़ौदा भी 3 से 5 वर्ष की अवधि वाली इन जमाओं पर एक खास योजना के तहत 6 प्रतिशत तक ब्याज दे रहा है। एचडीएफसी बैंक और स्टेट बैंक ने कल ही ऐसे जमा पर 6 प्रतिशत तक ब्याज देने का ऐलान किया था।
निजी क्षेत्र के कोटक महिंद्रा बैंक ने तीन से पांच साल में पूरी होने वाली 10 लाख डॉलर से अधिक की जमाओं पर ब्याज दर बढ़ाकर 6.15 प्रतिशत तक कर दी हैं। इतनी मियाद वाली 10 लाख डॉलर से कम की जमा पर 6 प्रतिशत ब्याज मिलेगा। निजी क्षेत्र के येस बैंक ने भी 5 साल की जमा के लिए एफसीएनआर (बी) जमा दर बढ़ाकर 6.60 प्रतिशत तक करने की बात कही है। उसकी 3 से 4 साल की जमा पर 6.50 प्रतिशत से 6.55 प्रतिशत के बीच ब्याज मिलेगा।
सीएसबी बैंक ने भी अपनी जमा दरें काफी बढ़ा दी हैं। उसने 3 साल से लेकर 4 साल से कम मियाद की जमा पर ब्याज 290 आधार अंक बढ़ाकर 6.95 प्रतिशत कर दिया है। सीएसबी बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी प्रलय मंडल ने कहा,‘स्वैप व्यवस्था से बैंकों को घरेलू जमा दरों के करीब ब्याज पर एफसीएनआर जमा जुटाने और अल्पावधि की घरेलू दरों पर दबाव कम करने में मदद मिलती है। यह प्रवासी भारतीयों (एनआरआई)और बैंकों दोनों के लिए फायदेमंद है क्योंकि एनआरआई को अमेरिकी दरों से अधिक ब्याज मिल जाता है। हाल में ब्याज दर का अंतर यानी स्प्रेड घटा है, जिससे बैंकों को जमा के जरिये रकम जुटाने का एक और जरिया मिला है।’
बैंक ऑफ बड़ौदा की कार्यकारी निदेशक बीना वहीद ने कहा, ‘बैंक ऑफ बड़ौदा की नई जमा योजना से प्रवासी भारतीयों को अपनी विदेशी मुद्रा जमा पर ज्यादा ब्याज पाने का मौका मिल रहा है। कई देशों में अच्छी पैठ वाला भारत का अंतरराष्ट्रीय बैंक होने के नाते बैंक इस मौके का फायदा उठा सकता है और ज्यादा से ज्यादा एफसीएनआर (बी) जुटा सकता है।’
भारतीय रिजर्व बैंक ने विशेष एफसीएनआर (बी) जमा योजना के लिए सोमवार को कामकाजी नियम जारी किए थे, जिसके फौरन बाद बैंकों ने इस जमा योजना के लिए ब्याज दरें तेजी से बढ़ाई हैं। इस योजना के तहत रिजर्व बैंक इन जमा पर हेजिंग का एक तरह से पूरा खर्च उठाता है, जो लगभग 3.5 प्रतिशत बैठता है।
नोमूरा का अनुमान है कि इस योजना से 55 अरब डॉलर आ सकते हैं, जिनमें ज्यादातर रकम अगस्त-सितंबर में आने की संभावना है। उसने एक रिपोर्ट में कहा, ‘डॉलर दरें 2013 की तुलना में बेशक अधिक हैं मगर 2026 की योजना से निवेशकों को उधार लेने की सुविधा भी मिलेगी, जिससे उनका रिटर्न बढ़ेगा। भारतीय मूल के लोगों की संख्या 2013 के बाद करीब 70 प्रतिशत बढ़ गई है और इस तरह के निवेशकों की बड़ी जमात खड़ी हो गई है। प्रवासियों के लिए पिछली चार योजनाओं से साबित होता है कि भारतीय मूल के निवेशक आम तौर पर कम कंट्री रिस्क प्रीमियम मांगते हैं।’
इस तरह की जमा के लिए 2013 में लाई गई खास योजना से इस नीति के जरिये ही 26 अरब डॉलर जुटा लिए गए थे। दूसरे उपायों से भी 34 अरब डॉलर आए थे।