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RBI की FCNR योजना से बाजार में आएगी नकदी की बाढ़? ब्रोकरेज ने समझाया पूरा गणित

RBI की FCNR योजना से अगले 4 महीनों में 75 अरब डॉलर तक की विदेशी पूंजी आने की उम्मीद, रुपये और बैंकिंग सेक्टर को मिल सकता है बड़ा सहारा

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- June 15, 2026 | 11:07 AM IST

FCNR Scheme: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आने वाले कुछ महीने काफी दिलचस्प हो सकते हैं। एक तरफ दुनिया भर में अनिश्चितता बनी हुई है, तो दूसरी तरफ भारत में बड़ी मात्रा में विदेशी पैसा आने की उम्मीद जताई जा रही है। अगर ऐसा होता है तो रुपये पर बना दबाव कम हो सकता है, बैंकों के पास ज्यादा पैसा आ सकता है और कर्ज देना भी आसान हो सकता है।

ब्रोकरेज फर्म Emkay का मानना है कि RBI की FCNR(B) योजना के जरिए अगले चार महीनों में करीब 50 अरब डॉलर भारत आ सकते हैं। इसके अलावा विदेशी कर्ज (ECB) और सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेश से भी करीब 25 अरब डॉलर आने की उम्मीद है। यानी कुल मिलाकर 75 अरब डॉलर तक का विदेशी पैसा भारत आ सकता है।

आखिर FCNR Scheme है क्या?

सीधे शब्दों में कहें तो FCNR(B) ऐसी जमा योजना है, जिसमें विदेशों में रहने वाले भारतीय (NRI) विदेशी मुद्रा में भारतीय बैंकों में पैसा जमा करते हैं। RBI ने हाल ही में इस तरह की जमा राशि को बढ़ावा देने के लिए कुछ नियमों में राहत दी है, जिससे बैंकों के लिए विदेश से पैसा जुटाना आसान हो गया है। बाजार को उम्मीद है कि इस बार NRI निवेशकों की अच्छी दिलचस्पी देखने को मिल सकती है और बड़ी रकम भारत आ सकती है।

रुपये के लिए क्यों अच्छी खबर है?

पिछले कुछ समय से रुपये पर दबाव बना हुआ है। महंगा कच्चा तेल और विदेशी निवेश में उतार-चढ़ाव इसकी बड़ी वजह रहे हैं। लेकिन अगर अरबों डॉलर भारत आते हैं तो डॉलर की सप्लाई बढ़ेगी और रुपये को मजबूती मिल सकती है। Emkay का अनुमान है कि रुपया मजबूत होकर करीब 94 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है। अगर पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव कम हो जाता है और हालात सामान्य होते हैं, तो रुपया 92 रुपये प्रति डॉलर तक भी पहुंच सकता है।

FCNR Scheme: बैंकों को कैसे मिलेगा फायदा?

विदेश से पैसा आने का सबसे बड़ा फायदा बैंकिंग सिस्टम को होगा। अभी कई बैंक जमा जुटाने के लिए ज्यादा ब्याज दे रहे हैं। लेकिन अगर सिस्टम में पर्याप्त पैसा आ जाता है तो यह दबाव कम हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे बैंकों की जमा राशि बढ़ेगी और उन्हें कर्ज देने के लिए ज्यादा संसाधन मिलेंगे। इसका फायदा पूरे बैंकिंग सेक्टर को मिलेगा। हालांकि विदेशी जमा का बड़ा हिस्सा देश के बड़े बैंकों के पास जाने की उम्मीद है। इनमें SBI, बैंक ऑफ बड़ौदा, HDFC बैंक, ICICI बैंक, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank शामिल हैं।

HDFC बैंक को मिल सकती है सबसे ज्यादा राहत

रिपोर्ट के मुताबिक, HDFC बैंक को इस योजना से सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है। हाल के समय में बैंक पर जमा बढ़ाने का दबाव रहा है और यह योजना उस दबाव को कम करने में मदद कर सकती है। इसके अलावा IndusInd Bank, RBL Bank और IDFC First Bank जैसे मिड-साइज बैंकों को भी अप्रत्यक्ष फायदा मिलने की उम्मीद है। बैंकिंग सिस्टम में नकदी बढ़ने से इनकी फंडिंग लागत कम हो सकती है।

NBFC कंपनियों के लिए भी अच्छी खबर

सिर्फ बैंक ही नहीं, बल्कि NBFC कंपनियों को भी इसका फायदा मिल सकता है। जब सिस्टम में ज्यादा पैसा होता है तो फंड जुटाने की लागत घटती है। इससे NBFC कंपनियों के लिए भी पैसा जुटाना आसान हो सकता है। हालांकि रिपोर्ट का कहना है कि कमाई पर इसका असर तुरंत दिखाई नहीं देगा, लेकिन माहौल जरूर बेहतर होगा।

FCNR Scheme: लेकिन तस्वीर पूरी तरह आसान नहीं

हालांकि अनुमान काफी सकारात्मक हैं, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वाकई 50 अरब डॉलर का फ्लो हो पाएगा? आज की स्थिति 2013 से काफी अलग है। उस समय अमेरिका में ब्याज दरें बेहद कम थीं, लेकिन अभी वहां ब्याज दरें ऊंचे स्तर पर हैं। ऐसे में निवेशकों के पास अमेरिका में भी कई आकर्षक विकल्प मौजूद हैं। यानी NRI निवेशकों का पैसा सिर्फ भारतीय बैंकों से नहीं, बल्कि अमेरिकी शेयर बाजार और दूसरे निवेश विकल्पों से भी मुकाबला करेगा।

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)

First Published : June 15, 2026 | 10:53 AM IST