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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कहा है कि HDFC Bank की वित्तीय स्थिति मजबूत है, बैंक का संचालन पेशेवर तरीके से हो रहा है और उसके प्रबंधन में कोई बड़ी कमी नहीं है। साथ ही RBI ने स्पष्ट किया कि बैंक की गवर्नेंस या कामकाज को लेकर कोई गंभीर चिंता नहीं है। एचडीएफसी एक डोमेस्टिक सिस्टमिकली इंपॉर्टेंट बैंक (D-SIB) है।
रिजर्व बैंक की तरफ से यह बयान ऐसे समय पर आया है जब HDFC बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने बुधवार को इस्तीफा दिया था। उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा था कि पिछले दो वर्षों में बैंक के भीतर कुछ ऐसी घटनाएं देखी गईं जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थीं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके इस्तीफे के पीछे कोई अन्य बड़ा कारण नहीं है।
RBI ने एक प्रेस बयान में कहा, “HDFC बैंक एक डोमेस्टिक सिस्टमिकली इंपॉर्टेंट बैंक (D-SIB) है, जिसकी वित्तीय स्थिति मजबूत है, बोर्ड पेशेवर तरीके से संचालित है और प्रबंधन टीम सक्षम है। हमारी समय-समय पर की गई समीक्षा के आधार पर बैंक की गवर्नेंस या कामकाज को लेकर कोई बड़ी चिंता दर्ज नहीं की गई है।”
चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद, HDFC बैंक के अनुरोध पर RBI ने ट्रांजिशन व्यवस्था को मंजूरी देते हुए केकी मिस्त्री को तीन महीने के लिए पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किया है।
RBI ने कहा कि बैंक अच्छी तरह कैपिटलाइज्ड है और उसकी वित्तीय स्थिति संतोषजनक है, साथ ही पर्याप्त लिक्विडिटी भी मौजूद है। RBI ने यह भी कहा कि वह आगे की दिशा को लेकर बैंक के बोर्ड और प्रबंधन के साथ लगातार संपर्क में रहेगा।
गुरुवार सुबह निवेशकों के साथ हुई कॉल में केकी मिस्त्री ने कहा कि बैंक का बोर्ड संस्थागत मजबूती और भरोसे को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “बैंक मजबूत गवर्नेंस मानकों, सख्त आंतरिक नियंत्रण और बेहद अनुभवी प्रबंधन टीम के साथ काम कर रहा है। हमारी रणनीति, व्यापार प्राथमिकताएं और कार्यान्वयन क्षमता पहले की तरह मजबूत बनी हुई है।”
इस खबर के बाद HDFC बैंक के शेयर शुरुआती कारोबार के दौरान करीब 8.6 प्रतिशत गिरकर 770 रुपये के स्तर तक पहुंच गए। सुबह 9:30 बजे के करीब 5.28 करोड़ शेयरों की खरीद-फरोख्त हुई, जिसकी कुल कीमत 4,200 करोड़ रुपये से ज्यादा रही। इस दौरान निफ्टी 50 करीब 2 प्रतिशत नीचे था, जबकि निफ्टी बैंक में 2.5 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। पिछले एक महीने में यह शेयर 8 प्रतिशत गिर चुका है और साल 2026 में अब तक इसमें 15 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है।
बाजार के जानकरों का कहना है कि जब तक स्थिति साफ नहीं होती, बोर्ड और प्रबंधन के बीच तालमेल को लेकर उठे सवालों से शेयर पर दबाव बना रह सकता है।