प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के कई बैंक इक्विटी और बॉन्ड के जरिये पूंजी जुटाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। इससे उन्हें ऋण नुकसान प्रावधान के लिए अपेक्षित ऋण हानि (ईसीएल) ढांचे के लागू होने से पहले अपनी कॉमन इक्विटी टियर-1 (सीईटी1) पूंजी को मजबूती देने में मदद मिलेगी। ईसीएल ढांचे को अप्रैल 2027 से लागू किए जाने की उम्मीद है।
रकम जुटाने से इन बैंकों को सरकारी हिस्सेदारी कम करने में भी मदद मिलेगी क्योंकि कुछ बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी 90 फीसदी से भी अधिक है।
बैंक ऑफ इंडिया को वित्त वर्ष 2027 के दौरान 7,500 करोड़ रुपये जुटाने के लिए बोर्ड से गुरुवार को मंजूरी मिल गई। इसमें से 2,500 करोड़ रुपये अतिरिक्त टियर-1 बॉन्ड (एटी-1) और 5,000 करोड़ रुपये टियर-2 बॉन्ड के जरिये जुटाए जाएंगे। बैंक ऑफ इंडिया का पूंजी पर्याप्तता अनुपात 31 दिसंबर, 2025 तक 17.09 फीसदी था जबकि उसका सीईटी1 अनुपात 13.76 फीसदी था। एटी-1 बॉन्ड से बैंक की सीईटी1 पूंजी को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
इंडियन बैंक को भी रकम जुटाने के लिए अपने बोर्ड से मंजूरी मिल गई है जिसमें पात्र संस्थागत निवेश (क्यूआईपी) के जरिये 5,000 करोड़ रुपये जुटाने का प्रस्ताव शामिल है।
इंडियन बैंक के एमडी एवं सीईओ विनोद कुमार ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘हमारा पूंजी पर्याप्तता अनुपात लगभग 18 फीसदी पर दमदार बना हुआ है। हमें वृद्धि के लिए रकम जुटाने की जरूरत नहीं है। मगर ईसीएल मानदंडों के लागू होने के साथ ही हम क्यूआईपी के जरिये पूंजी जुटाने पर विचार कर सकते हैं। हमें बोर्ड की मंजूरी मिल गई है और जरूरत पड़ने पर 5,000 करोड़ रुपये का क्यूआईपी हमारी योजना का हिस्सा है।’
उन्होंने यह भी कहा कि प्रावधान पर ईसीएल के प्रभाव का आकलन अभी भी किया जा रहा है और 10 से 15 दिनों में स्थिति स्पष्ट हो जानी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हम उसके प्रभाव को जल्द और संभवत: पहली छमाही के भीतर अवशोषित करने का लक्ष्य रख रहे हैं।’
मार्च 2026 के आखिर में इंडियन बैंक का पूंजी पर्याप्तता अनुपात 17.93 फीसदी था।
पिछले सप्ताह बैंकिंग नियामक ने ईसीएल मानदंडों पर अंतिम दिशानिर्देश जारी किए जो अगले साल 1 अप्रैल से प्रभावी होंगे। इसके तहत बैंकों को अपेक्षित नुकसान के आधार पर प्रावधान करना होगा। फिलहाल बैंकों को वास्तविक नुकसान के आधार पर प्रावधान करना होता है।
नए ढांचे में आने के बाद बैंकों को अतिरिक्त प्रावधान करने की आवश्यकता होगी। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने घरेलू बैंकों पर उनके कॉमन इक्विटी टियर 1 (सीईटी-1) अनुपात पर 120 आधार अंक तक के एकमुश्त शुद्ध प्रभाव पड़ने का अनुमान लगाया है।
इंडियन ओवरसीज बैंक ने भी कहा है कि वह नियामकीय आवश्यकता के लिए पूंजी जुटा सकता है। इंडियन ओवरसीज बैंक के एमडी एवं सीईओ अजय कुमार श्रीवास्तव ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘हम नियामकीय पहलू और सरकारी हिस्सेदारी को कम करने सहित अन्य कारणों से पूंजी जुटाने पर विचार कर सकते हैं। फिलहाल सरकार की हिस्सेदारी लगभग 92.44 फीसदी है और हम 75 फीसदी की न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता की आवश्यकता के करीब पहुंचना चाहते हैं। इसलिए पूंजी जुटाना दोनों उद्देश्यों को पूरा कर सकता है। मगर बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद उचित निर्णय लिया जाएगा।’
बैंक का पूंजी पर्याप्तता अनुपात 11.5 फीसदी की नियामकीय आवश्यकता के मुकाबले 19.78 फीसदी है। इस प्रकार यह अगले 3-4 वर्षों के लिए पर्याप्त है। श्रीवास्तव ने कहा, ‘वृद्धि के लिए तत्काल पूंजी जुटाने की कोई आवश्यकता नहीं है।’
पंजाब ऐंड सिंध बैंक ने भी क्यूआईपी के जरिये 3,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए बोर्ड से मंजूरी ली है। इससे बैंक को सरकारी हिस्सेदारी कम करने में भी मदद मिलेगी जो फिलहाल 93.85 फीसदी है। ईसीएल ढांचे के तहत बैंकों को डिफॉल्ट की संभावना (पीडी), डिफॉल्ट पर नुकसान (एलजीडी) और डिफॉल्ट के एक्सपोजर (ईएडी) के आधार पर नुकसान का अनुमान लगाना होगा।