वाणिज्यिक बैंकों की कुल जमा राशि में चालू और बचत खाता (कासा) जमा का हिस्सा जनवरी-मार्च तिमाही में इससे पिछली तिमाही के मुकाबले बढ़ गया है। इससे पहले दो साल से ज्यादा समय तक कासा जमा में गिरावट का रुख बना हुआ था। बैंकों के बिजनेस अपडेट में इसकी जानकारी मिली।
एचडीएफसी बैंक और ऐक्सिस बैंक जैसे निजी ऋणदाताओं और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों यूनियन बैंक तथा सेंट्रल बैंक ने बीते वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही की तुलना में चौथी तिमाही में कम लागत वाली जमाओं यानी चालू और बचत खाता जमा में बढ़ोतरी दर्ज की है। कम लागत वाली जमाओं को मार्जिन बढ़ाने वाला माना जाता है क्योंकि ये बैंकों के लिए कोष की कुल लागत को कम कर देती हैं।
कासा की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण हुई है जिसने निवेशकों को कम जोखिम वाली संपत्तियों की तलाश करने के लिए प्रेरित किया है। साथ ही बैंकों के बीच ज्यादा जमा जुटाने की होड़ भी इसका एक कारण है।
हालांकि कई ऋणदाताओं के लिए कुल जमा में कासा अनुपात अभी भी पिछले साल की जनवरी-मार्च अवधि की तुलना में कम बना हुआ है। विश्लेषकों का कहना है कि कासा अनुपात में यह बढ़ोतरी संरचनात्मक से ज्यादा मौसमी मानी जाती है क्योंकि साल के आखिर के लक्ष्यों को पूरा करने की होड़ के चलते बैंकों में इन जमाओं में बढ़ोतरी देखने को मिलती है।
केयरऐज रेटिंग्स में बीएफएसआई के एसोसिएट डायरेक्टर सौरभ भालेराव ने कहा, ‘जनवरी-मार्च तिमाही में कुछ बैंकों का कासा बढ़ा है क्योंकि बैंक ज्यादा कोष जुटाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें विदेश से जमा भी शामिल है।’
निजी क्षेत्र के सबसे बड़े ऋणदाता एचडीएफसी बैंक ने वित्त वर्ष 2026 के आखिर में कासा जमा में 12.31 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की, जिससे यह बढ़कर 10.61 लाख करोड़ रुपये हो गया। साथ ही कासा अनुपात में भी सुधार हुआ और यह 31 दिसंबर, 2025 के 33.61 फीसदी से बढ़कर 34.15 फीसदी हो गया।
जनवरी-मार्च में ऐक्सिस बैंक का कासा जमा 10.6 फीसदी बढ़ा और कासा अनुपात भी बढ़कर 39.59 फीसदी पहुंच गया।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में यूनियन बैंक का कासा अनुपात दिसंबर तिमाही के 33.96 फीसदी और पिछले वर्ष की जनवरी-मार्च की अवधि के 33.52 फीसदी की तुलना में बढ़कर 35.21 फीसदी हो गया। सेंट्रल बैंक का कासा अनुपात 47.13 फीसदी से बढ़कर 47.31 फीसदी हो गया।
ऐक्सिस सिक्योरिटीज में इक्विटी शोध विश्लेषक ज्ञानदा वैद्य ने कहा, ‘कासा जुटाने के मामले में चौथी तिमाही मौसमी रूप से मजबूत तिमाही होती है और बैंकों के शुरुआती अपडेट से पता चलता है कि यह रुझान अब तक बना हुआ है। ज्यादातर बैंकों ने अपने शुरुआती अपडेट में कासा में मजबूत बढ़ोतरी की सूचना दी है जिससे कासा अनुपात और बढ़ा गया है। वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में कासा में यह बढ़ोतरी भू-राजनीतिक अनिश्चितता का नतीजा भी हो सकती है।’
उन्होंने कहा, ‘जमा जुटाने के मामले में बैंकों के बीच मुकाबला अभी भी काफी है, खास कर कासा जमा के लिए। ज्यादातर बैंकों ने दिसंबर 2025 में हुई ब्याज दर में कटौती का फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुंचाया है, जिससे सावधि जमा की दरें लगभग स्थिर बनी हुई हैं। ऐसे में यह नतीजा निकालना सही नहीं होगा कि चौथी तिमाही में कासा अनुपात में जो सुधार हुआ है, वह मौसमी होने के बजाय ढांचागत है।’
केयरऐज के विश्लेषकों ने अनुमान लगाया था कि बैंकिंग क्षेत्र में कुल जमाओं में कासा जमा का हिस्सा वित्त वर्ष 2026 के आखिर तक लगभग 37 फीसदी रहेगा जो वित्त वर्ष 2025 में 38.9 फीसदी था। वित्त वर्ष 2021 में यह हिस्सा लगभग 43.7 फीसदी था। वित्त वर्ष 2027 में बैंकिंग क्षेत्र का कासा अनुपात और घटकर 36.5 फीसदी रहने का अनुमान है।
केयरऐज की रिपोर्ट के अनुसार 31 दिसंबर, 2025 तक जमा राशि 239.5 लाख करोड़ रुपये थी जो पिछले साल की तुलना में 10.2 फीसदी अधिक है। इसकी मुख्य वजह सावधि जमा में 11 फीसदी और कासा जमा में 8.8 फीसदी की वृद्धि रही।