प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पिछली तीन नीतिगत बैठकों में रीपो दर में किसी तरह का बदलाव नहीं किया लेकिन अप्रैल में मजबूत मांग के कारण बैंक ऋण पर ब्याज दरें बढ़ गईं।
अप्रैल में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का रुपये में नए कर्ज पर भारित औसत उधारी दर (डब्ल्यूएएलआर) 10 आधार अंक बढ़कर 8.5 फीसदी हो गई। मार्च में यह 8.4 फीसदी थी। सरकारी और निजी, दोनों तरह के बैंकों के भारित औसत उधारी दर में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है जबकि विदेशी बैंकों के मामले में इसमें थोड़ी कमी आई है।
इसके अलावा अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की 1 साल की कोष की सीमांत लागत आधारित औसत उधारी दर (एमसीएलआर) अप्रैल के 8.55 फीसदी से बढ़कर मई में 8.65 फीसदी हो गई।
दूसरी ओर रुपये में नई सावधि जमा पर भारित औसत घरेलू जमा दर अप्रैल में 5.77 फीसदी रही जबकि मार्च में यह 6.07 फीसदी थी।
मौद्रिक नीति की बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, ‘अप्रैल की बैठक के बाद से भारित औसत कॉल रेट नीतिगत दायरे दायरे में रहा जबकि अल्पावधि के मनी मार्केट रेट, खास तौर पर वाणिज्यिक प्रतिभूतियों और जमा प्रमाण पत्र की दर में नरमी आई थी लेकिन मई में उन पर फिर से दबाव बढ़ गया। पश्चिम एशिया में युद्ध विराम के ऐलान के बाद अप्रैल में सरकारी प्रतिभूतियों की यील्ड में नरमी आई थी लेकिन मई में फिर बढ़ गईं।’
अप्रैल के आखिर तक बैंक ऋण में सालाना आधार पर 16 फीसदी की बढ़ोतरी हुई जबकि जमा में महज 12.3 फीसदी बढ़ोतरी देखी गई।
2025 में रीपो दर में 125 आधार अंक की कटौती के बाद आरबीआई की छह सदस्यों वाली मौद्रिक नीति समिति ने तीन बैठकों (फरवरी, अप्रैल और जून) में रीपो दर में किसी तरह का बदलाव नहीं किया।
आरबीआई के अनुसार रीपो दर में कुल मिलाकर 125 आधार अंक की कटौती के बाद फरवरी 2025 से अप्रैल 2026 के दौरान रुपये में नए ऋण के लिए वाणिज्यिक बैंकों की भारित औसत उधारी दर 83 आधार अंक और मौजूदा ऋण के लिए दर 89 आधार अंक कम हुई। जमा के मामले में इसी अवधि के दौरान नए जमा पर भारित औसत घरेलू साविध जमा दर 85 आधार अंक कम हुई जबकि मौजूदा जमा पर ब्याज दर 50 आधार अंक घटी।
रीपो दर में कटौती का लाभ बैंकों द्वारा ग्राहकों तक पहुंचाने के सवाल पर आरबीआई गवर्नर ने कहा कि यह काफी संतोषजनक रहा है।
मल्होत्रा ने कहा, ‘बैंकिंग क्षेत्र में ऋण वृद्धि 16 फीसदी से ज्यादा रही है, जो बहुत मजबूत है और वृहद आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह संतोषजनक है।’