बीमा

पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत का बड़ा कदम: जहाजों की सुरक्षा के लिए बनेगा 10 करोड़ डॉलर का बीमा कोष

पश्चिम एशिया संकट के बीच समुद्री व्यापार सुरक्षित करने के लिए भारतीय बीमा कंपनियां और सरकार मिलकर 10 करोड़ डॉलर का युद्ध जोखिम बीमा कोष बना रही हैं

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आतिरा वारियर   
Last Updated- April 10, 2026 | 10:44 PM IST

भारतीय सामान्य बीमा और पुनर्बीमा (रीइंश्योरेंस) कंपनियां पश्चिम एशिया में मौजूदा संकट के बीच अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों से गुजरने वाले जहाजों को युद्ध बीमा सुरक्षा (कवर) देने के लिए 10 करोड़ डॉलर का समुद्री बीमा कोष तैयार करने पर विचार कर रही हैं। ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध के कारण दुनिया भर में समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है भारतीय निर्यातकों को भी तगड़ी चोट पहुंची है। सूत्रों के अनुसार इस कोष के लिए सरकार भी संप्रभु गारंटी की पेशकश कर सकती है।

बीमा उद्योग फरवरी 2026 तक समुद्री मार्ग से आवाजाही के दौरान जोखिम से सुरक्षा के लिए बीमा कंपनियों के पास जमा कुल प्रीमियम का 8 प्रतिशत हिस्सा देने के लिए बातचीत कर रहा है। इस कोष का प्रबंधन भारतीय सामान्य बीमा निगम (जीआईसी री) करेगी। इसमें समुद्री व्यवसाय का बीमा करने वाली सामान्य बीमा कंपनियां भी शामिल होंगी।

विशेषज्ञों के अनुसार समुद्री बीमा युद्ध संबंधी जोखिमों से सुरक्षा (कवर) नहीं करता है मगर कंपनियां अतिरिक्त युद्ध-जोखिम कवर खरीद सकती हैं। वर्तमान और भविष्य में अस्थिरता की आशंका के कारण यह कवर बीमा कंपनियों के लिए महंगा और जोखिम भरा हो गया है। प्रस्तावित समुद्री बीमा कोष (जिसे बीमा और पुनर्बीमा कंपनियां  तैयार करेंगी और सरकार का समर्थन हासिल होगा) भविष्य में भी बड़े नुकसानों को साझेदारों के बीच समान रूप से बांट कर नुकसान कम करने में असरदार साबित होगा। फिलहाल भारत के पास आतंकवाद और परमाणु जैसे महंगे जोखिमों के लिए जीआईसी री द्वारा प्रबंधित बीमा कोष उपलब्ध है।

पश्चिम एशिया में उथल-पुथल के कारण समुद्री बीमा प्रीमियम महंगा हो गया है। इसका नतीजा यह हुआ है कि जीआईसी री सहित कई पुनर्बीमा कंपनियों ने इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए नोटिस ऑफ कैंसिलेशन (एनओसी) जारी की है। कई शिपिंग कंपनियों ने या तो इस मार्ग से गुजरना बंद कर दिया है और वैकल्पिक मार्गों की तलाश कर रही हैं या आवागमन पूरी तरह रोक दिया है।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाज और माल पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से पहले लगभग 0.25 प्रतिशत का अतिरिक्त युद्ध बीमा खरीदते थे जिसका प्रीमियम अब बढ़कर 0.5 से 1.0 प्रतिशत हो गया है। उपलब्ध क्षमता के बावजूद मौजूदा अनिश्चितता के कारण युद्ध कवर वर्तमान में केवल ऊंची दरों पर और अत्यधिक सीमित आधार पर ही पेश किए जा रहे हैं।

ईरान युद्ध से होर्मुज स्ट्रेट से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलपीजी) की आपूर्ति बाधित हो गई है। युद्ध के कारण तेल एवं अन्य महत्त्वपूर्ण वस्तुओं की आवाजाही प्रभावित हुई है। हाल ही में घोषित दो सप्ताह के युद्ध विराम के बावजूद अनिश्चितता बढ़ने के कारण प्रीमियम अभी भी अधिक हैं।

एऑन के एशिया स्थित समुद्री विभाग के प्रमुख स्टीफन रुडमैन ने कहा,‘बीमा के लिहाज से दो सप्ताह का युद्ध विराम जोखिम मूल्य निर्धारण या पॉलिसियों की बिक्री में कोई खास बदलाव लाने के लिए नाकाफी है। अतिरिक्त युद्ध जोखिम प्रीमियम अल्पकालिक राजनीतिक घटनाक्रमों के बजाय भविष्य के खतरे के से जुड़े होते हैं।’

रुडमैन ने कहा कि युद्ध विराम की घोषणा से माहौल थोड़ा हल्का करने में मदद जरूर मिल सकती है मगर बीमा कंपनियां इसे भू-राजनीतिक जोखिम के समाधान के बजाय एक अस्थायी विराम के रूप में ही देखेंगे। उन्होंने कहा, ‘ऐसे में हम खाड़ी से आवाजाही पर सबकी नजरें टिकी होंगी।  जब तक स्थायी रूप से तनाव कम होने के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिल जाते तब तक प्रीमियम ऊंचे स्तरों पर बने रहेंगे।’

First Published : April 10, 2026 | 10:44 PM IST