भारतीय प्रौद्योगिक संस्थान (IIT) में लगातार आत्महत्या की घटनाएं सामने आ रही हैं। हाल ही में एक आरटीआई के जवाब से पता चला है कि पिछले पांच सालों (2019-20 से 2023-24) में 23 में से 11 आईआईटी में 37 छात्रों ने आत्महत्या कर ली। इनमें से छह छात्र अकेले दिल्ली आईआईटी से थे।
RTI कार्यकर्ता विवेक पांडेय ने बताया कि आईआईटी हैदराबाद और आईआईटी मद्रास में सात-सात छात्रों ने आत्महत्या की, वहीं आईआईटी दिल्ली में छह, आईआईटी बीएचयू में चार और आईआईटी कानपुर और आईआईटी खड़गपुर में तीन-तीन छात्रों ने आत्महत्या की।
आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी धनबाद में दो-दो छात्रों ने आत्महत्या की, जबकि आईआईटी रुड़की, आईआईटी धारवाड़ और आईआईटी गांधीनगर में एक-एक छात्र ने आत्महत्या की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गोवा, भिलाई, जम्मू, पटना, जोधपुर, रोपड़, इंदौर, मंडी और पलक्कड़ सहित बाकी 12 आईआईटी से कोई आत्महत्या की सूचना नहीं मिली है।
पिछले साल, शिक्षा राज्य मंत्री सुभाष सरकार ने राज्यसभा में आईआईटी से जुड़े आत्महत्या के आंकड़े पेश किए थे, जिसमें बताया गया था कि इन आत्महत्याओं के कारणों में शैक्षणिक दबाव, पारिवारिक और व्यक्तिगत समस्याएं और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं शामिल हैं।
भारत में युवा आत्महत्या की गंभीर समस्या
भारत में 15 से 29 साल के युवाओं में आत्महत्या की दर दुनिया में सबसे ज्यादा है। यह वैश्विक औसत से दोगुना है! इसमें चिंता की बात ये है कि आईआईटी, आईआईएम और मेडिकल कॉलेजों जैसे संस्थानों के छात्र भी इससे अछूते नहीं हैं।
IIT दिल्ली में छात्रों की मदद के लिए पहल
हालांकि, अच्छी बात यह है कि संस्थान इस समस्या से निपटने के लिए कदम उठा रहे हैं। उदाहरण के लिए, आईआईटी दिल्ली में:
एक आईआईटी छात्र ने बताया कि आत्महत्या की इस समस्या को कई चीजें हवा देती हैं। सबसे पहले तो दूर-दूर से आने वाले छात्रों को अकेलापन सताता है, जिससे उनका घुलना-मिलना कम हो जाता है। दूसरी बड़ी चुनौती है पढ़ाई का बहुत ज्यादा दबाव। आईआईटी में पढ़ाई काफी कठिन होती है और हर समय अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव छात्रों पर बना रहता है।
इसके अलावा, कई छात्रों को भाषा की दिक्कत का भी सामना करना पड़ता है। उनकी मातृभाषा अलग-अलग हो सकती है, जिससे पढ़ाई की चीजें समझने और दूसरों से बातचीत करने में दिक्कत आती है। आखिर में, छात्रों पर लगातार अच्छा प्रदर्शन करने का भावनात्मक दबाव भी होता है, जो उन्हें काफी परेशान करता है। ये सभी चीजें मिलकर माहौल बनाती हैं जिससे छात्र खुद को अकेला और हताश महसूस कर सकते हैं।