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झूठे दहेज के आरोप से बचने के लिए गिफ्ट की लिस्ट बनाकर रखें: इलाहाबाद हाई कोर्ट

False Dowry Cases: जस्टिस विक्रम डी चौहान ने कहा कि ये रिकॉर्ड रखना जरूरी है ताकि बाद में झगड़े होने पर दहेज लेने के गलत आरोप न लगें।

Last Updated- May 16, 2024 | 9:31 PM IST
Dowry

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में कहा है कि शादी में दी गईं चीजों की लिस्ट दूल्हा और दुल्हन दोनों को ही रखनी चाहिए। ये दहेज निषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3(2) के तहत आता है। जस्टिस विक्रम डी चौहान ने कहा कि ये रिकॉर्ड रखना जरूरी है ताकि बाद में झगड़े होने पर दहेज लेने के गलत आरोप न लगें।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने ये भी कहा कि शादी के बाद होने वाले किसी भी झगड़े में दोनों पक्षों और उनके परिवारों को बिना सबूत के दहेज लेने-देने का आरोप लगाने से रोका जा सकता है। साथ ही कोर्ट ने ये भी बताया कि दहेज निषेध अधिनियम के नियमों को मानने से ये पता लगाने में मदद मिलती है कि क्या दिया गया सामान वाकई में दहेज था या नहीं, क्योंकि अधिनियम की धारा 3(2) में कुछ अपवादों के बारे में बताया गया है।

दहेज निषेध अधिनियम दहेज देने या लेने वालों को सजा देता है। सजा में कम से कम 5 साल की कैद और 50,000 रुपये या दहेज की कीमत (जो भी ज्यादा हो) का जुर्माना शामिल है। लेकिन, दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3(2) शादी के वक्त दी गईं चीजों को दहेज नहीं मानती है। इस छूट का फायदा उठाने के लिए जरूरी है कि दूल्हा-दुल्हन शादी में मिले गिफ्ट की पूरी लिस्ट बनाकर रखें, वो भी तय किए गए नियमों के मुताबिक।

कोर्ट ने ये भी बताया कि दहेज निषेध अधिनियम के तहत शादी में दी गईं चीजों को छूट देने की मंशा ये थी कि शादी में गिफ्ट देने की भारतीय परंपरा बनी रहे। साथ ही ये नियम दहेज लेने के झूठे आरोपों से भी बचाते हैं।

शादी में मिले गिफ्ट की लिस्ट बनाने के नियमों को ‘दहेज निषेध (दुल्हन और दूल्हे को दी गईं चीजों की लिस्ट रखने) नियम, 1985’ में बताया गया है। ये नियम केंद्र सरकार ने बनाए हैं.

इस मामले में न तो दूल्हे ने और न ही दुल्हन ने शादी में मिले गिफ्ट की लिस्ट बनाकर रखी थी, जैसा कि दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3(2) और 1985 के नियमों में जरूरी बताया गया है। कोर्ट ने गैर-जरूरी मुकदमों को रोकने के लिए धारा 3(2) को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार से ये पूछा है कि वो ये बताए कि वो इस कानून को कैसे लागू करवा रही है।

इसके अलावा, कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को दहेज निषेध अधिकारियों की नियुक्ति के बारे में जानकारी देने का आदेश दिया है। दहेज के मामलों में बढ़ोत्तरी को देखते हुए इन अधिकारियों की नियुक्ति जरूरी बताई गई है।

कोर्ट ने राज्य सरकार से ये भी पूछा है कि क्या शादी रजिस्ट्रेशन अधिकारी दहेज निषेध नियम, 1985 के मुताबिक शादी में मिले गिफ्ट की लिस्ट बना रहे हैं और उसे रख रहे हैं। ये गिफ्ट की लिस्ट भविष्य में दहेज को लेकर होने वाले झगड़ों में काम आ सकती है। इस मामले की अगली सुनवाई 23 मई को होनी है।

First Published - May 16, 2024 | 9:31 PM IST

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