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Arvind Kejriwal: दिल्ली CM के सरकारी आवास निर्माण मामले में अधिकारियों पर कार्रवाई, 2 को किया गया सस्पेंड

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आवास के रेनोवेशन का मुद्दा पिछले साल पहली बार उठाया गया था।

Last Updated- July 03, 2024 | 4:23 PM IST
Arvind Kejriwal in new trouble, CVC orders investigation in 'Sheeshmahal' case

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास के निर्माण और रेनोवेशन से जुड़े मामले में कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) के दो अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। साथ ही, पांच अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है। दिल्ली सरकार के विजिलेंस विभाग ने CPWD के महानिदेशक को एक पत्र लिखा है।

इस पत्र में कहा गया है कि उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इन पांच अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है। ये कार्रवाई सस्पेंशन से लेकर अनुशासनात्मक कार्यवाही तक हो सकती है। ये पांच अधिकारी या तो रिटायर हो चुके हैं या दिल्ली से बाहर ट्रांसफर कर दिए गए हैं। अब ये अधिकारी CPWD के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। यह मामला फ्लैग स्टाफ रोड, सिविल लाइंस पर स्थित मुख्यमंत्री के सरकारी आवास से जुड़ा है।

सस्पेंड किए गए अधिकारियों में एक्जिक्युटिव इंजीनियर विनय चौधरी और असिस्टेंट इंजीनियर रजत कांत शामिल हैं। यह इस मामले में पहली कार्रवाई है। एक साल पहले सभी सात अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। आवास के रेनोवेशन का मुद्दा पिछले साल पहली बार उठाया गया था।

तब विजिलेंस विभाग ने इस काम पर हुए खर्च और अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। इस समय मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जेल में हैं। उन्हें दिल्ली शराब नीति से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया है। केजरीवाल के परिवार के सदस्य अभी भी इसी सरकारी आवास में रह रहे हैं। इस आवास में मुख्यमंत्री का कैंप ऑफिस भी है।

सस्पेंड किए गए अधिकारी

CPWD के जिन अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई है, उनमें से दो रिटायर हो चुके हैं:

ए के अहूजा, पूर्व प्रिंसिपल चीफ इंजीनियर
शिबनाथ धारा, पूर्व एक्जिक्युटिव इंजीनियर (केंद्रीय और न्यू डिविजन)

इन दोनों के खिलाफ ‘बड़े दंड’ की अनुशासनात्मक कार्यवाही की सिफारिश की गई है।

अन्य अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की सिफारिश

अन्य तीन अधिकारी हैं:

पी के परमार, पूर्व चीफ इंजीनियर (पूर्व)
अशोक कुमार राजदेव, चीफ इंजीनियर
अभिषेक राज, जो सुपरिटेंडेंट इंजीनियर के पद पर थे

ए के अहूजा ने कहा: “मैं सितंबर 2020 में रिटायर हुआ और टेंडर अक्टूबर में निकाला गया। काम दिसंबर में दिया गया… कुछ गलती हो सकती है और मैंने कारण बताओ नोटिस के जवाब में जिक्र किया था कि जब इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ, तब मैं रिटायर हो चुका था… मुझे भेजे गए नोटिस में यह जिक्र था कि मैंने स्ट्रक्चर को गिराने की सिफारिश की, लेकिन यह इंजीनियर-इन-चीफ ने किया था, मैंने नहीं।”

विवाद का कारण

पिछले साल, विजिलेंस विभाग ने इन अधिकारियों को एक नोटिस जारी किया था। इसमें उन पर मुख्यमंत्री के सरकारी आवास की मरम्मत और पुनर्निर्माण पर लगभग 53 करोड़ रुपये की ‘फिजूल खर्ची’ का आरोप लगाया गया था। अधिकारियों को विभाग की रिपोर्ट में बताई गई कई ‘गलतियों और चूकों’ का जवाब देना था।

विजिलेंस विभाग ने CPWD के महानिदेशक को लिखे पत्र में कहा कि ये अधिकारी मामले को टालने की कोशिश कर रहे हैं और उनके पास कहने को कुछ नहीं है। इन अधिकारियों ने अदालत का भी रुख किया था, लेकिन चार बार के मुकदमों में उन्हें कोई राहत नहीं मिली। विजिलेंस विभाग ने CPWD से इस मामले में ‘की गई कार्रवाही की रिपोर्ट’ मांगी है।

केजरीवाल का आवास जांच के दायरे में

पिछले साल PWD अधिकारियों को दिए गए नोटिस के अनुसार, दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल टाइप VIII से नीचे के आवास के लिए ही पात्र थे, और मौजूदा घर नियमों के हिसाब से ‘बहुत बड़ा’ माना गया।

नोटिस में यह भी कहा गया कि प्रोजेक्ट के दौरान निर्मित क्षेत्र 1,397 वर्ग मीटर से बढ़कर 1,905 वर्ग मीटर हो गया, और ‘बेहतर क्वालिटी के काम’ पर 6.94 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च किए गए।

मुख्यमंत्री के आवास के रेनोवेशन में कई विशेष काम किए गए, जैसे सीमेंट कंक्रीट पर सजावटी मोल्डिंग, मुख्य सीढ़ी पर स्काई-लाइट खिड़की और बर्मा टीक लकड़ी का उपयोग।

अधिकारियों से पूछा गया कि पुरानी इमारत को बिना सर्वे रिपोर्ट के क्यों गिराया गया और नई इमारत के लिए बिल्डिंग प्लान क्यों नहीं मंजूर कराए गए। विजिलेंस विभाग ने बताया कि इस प्रोजेक्ट पर लगभग 52.71 करोड़ रुपये खर्च हुए। हालांकि इसे ‘जोड़ और बदलाव’ के रूप में दिखाया गया, लेकिन वास्तव में एक पूरी नई इमारत बनाई गई।

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First Published - July 3, 2024 | 4:23 PM IST

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