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CBI, ED ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- AAP को आरोपी बनाने पर कर रहे विचार

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पीठ ने राजू से मंगलवार को इस बारे में अपना रुख स्पष्ट करने को कहा कि क्या सीबीआई और ईडी की जांच वाले मामलों में आप के खिलाफ अलग-अलग आरोप होंगे।

Last Updated- October 16, 2023 | 11:09 PM IST
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केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय में कहा कि वह दिल्ली आबकारी नीति संबंधी मामलों में आम आदमी पार्टी (आप) को आरोपी बनाने पर विचार कर रहे हैं। दोनों जांच एजेंसियों की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति एस वी एन भट्टी के पीठ से कहा कि उन्होंने राज्य को निर्देश दिए हैं कि एजेंसियां आम आदमी पार्टी को आरोपी बनाने पर विचार कर रही हैं।

पीठ ने राजू से मंगलवार को इस बारे में अपना रुख स्पष्ट करने को कहा कि क्या सीबीआई और ईडी की जांच वाले मामलों में आप के खिलाफ अलग-अलग आरोप होंगे। राजू ने यह बयान तब दिया जब पीठ आप नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्हें आबकारी नीति के मामलों में गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों ने अक्सर कहा है कि आप उन हितधारकों से प्राप्त रिश्वत की लाभार्थी थी, जिन्हें बदले में शराब लाइसेंस प्राप्त हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया है कि आप ने इस धन का इस्तेमाल गोवा विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए किया था।

चुनावी बॉन्ड योजना: याचिका पांच न्यायाधीशों के पीठ के पास

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि पार्टियों के राजनीतिक वित्त पोषण के लिए ‘चुनावी बॉन्ड’ योजना की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर एक स्वीकार्य निर्णय के लिए अब पांच न्यायाधीशों का संविधान पीठ सुनवाई करेगा। ‘चुनावी बॉन्ड’ योजना को दो जनवरी 2018 को अधिसूचित किया गया था। इसे राजनीतिक वित्त पोषण में पारदर्शिता लाने के प्रयासों के तहत पार्टियों को नकद चंदे के विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया था।

योजना के प्रावधानों के अनुसार, चुनावी बॉन्ड भारत की नागरिकता रखने वाले व्यक्ति या भारत में स्थापित संस्थान द्वारा खरीदे जा सकते हैं। इसे कोई व्यक्ति अकले या अन्य व्यक्तियों के साथ संयुक्त रूप से खरीद सकता है। प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाले पीठ ने कहा था कि मुद्दे पर चार जनहित याचिकाओं पर 31 अक्टूबर और एक नवंबर को अंतिम सुनवाई की जाएगी। पीठ ने सोमवार को कहा कि अब इन पर पूर्व निर्धारित तारीखों पर पांच न्यायाधीशों का संविधान पीठ फैसला करेगा।

न्यायालय ने कहा, ‘उठाए गए मुद्दों के महत्त्व के मद्देनजर, और संविधान के अनुच्छेद 145(4) (उच्चतम न्यायालय के कामकाज से जुड़े नियमों) के आलोक में, विषय को कम से कम पांच न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष रखा जाएगा।’ पीठ में न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला एवं न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल हैं। पीठ ने कहा कि उसे यह अर्जी प्राप्त हुई है कि विषय की तात्कालिकता को ध्यान में रखते हुए इसे एक निर्णायक फैसले के लिए वृहद पीठ को भेजा जाए।

न्यूजक्लिक: गिरफ्तारी के खिलाफ शीर्ष अदालत पहुंचे

‘न्यूजक्लिक’ के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ और मानव संसाधन (एचआर) विभाग प्रमुख अमित चक्रवर्ती ने गैर कानूनी (गतिविधियां) निषेध अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज मामले में उनकी गिरफ्तारी और पुलिस हिरासत में हस्तक्षेप से दिल्ली उच्च न्यायालय के इनकार के बाद सोमवार को उच्चतम न्यायालय का रुख किया।

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा के पीठ ने पुरकायस्थ और चक्रवर्ती की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल के इस अनुरोध पर गौर किया कि मामले में तत्काल सुनवाई की जरूरत है। पीठ ने उनसे मामले से संबंधित कागजात देने को कहा। सिब्बल ने कहा, ‘यह न्यूजक्लिक का मामला है। पत्रकार पुलिस हिरासत में हैं। यहां एक आरोपी 75 वर्षीय बुजुर्ग है।’ प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि वह मामले को सूचीबद्ध करने पर फैसला करेंगे।

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First Published - October 16, 2023 | 11:09 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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