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UPSC Lateral Entry: लेटरल एंट्री पर लगी रोक! केंद्र सरकार ने UPSC को सीधी भर्ती का विज्ञापन रद्द करने को कहा

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सरकार ने ‘लेटरल एंट्री’ के माध्यम से 45 विशेषज्ञों की विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों में संयुक्त सचिव, निदेशक और उपसचिव जैसे प्रमुख पदों पर नियुक्ति करने की घोषणा की थी।

Last Updated- August 20, 2024 | 2:18 PM IST
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ब्यूरोक्रेसी में लेटरल एंट्री (Lateral entry) के जरिये फिलहाल कोई सीधी भर्ती नहीं होगी। केंद्र सरकार ने यूपीएससी (UPSC) को नौकरशाही में ‘लेटरल एंट्री’ से संबंधित विज्ञापन रद्द करने के लिए कहा है।

बता दें कि केंद्र सरकार ने ‘लेटरल एंट्री’ के माध्यम से 45 विशेषज्ञों की विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों में संयुक्त सचिव, निदेशक और उपसचिव जैसे प्रमुख पदों पर नियुक्ति करने की घोषणा की थी।

आमतौर पर ऐसे पदों पर अखिल भारतीय सेवाओं…भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और भारतीय वन सेवा (IFS) और अन्य ‘ग्रुप ए’ सेवाओं के अधिकारी तैनात होते हैं।

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यूपीएससी (UPSC) ने शनिवार को ही संयुक्त सचिव, निदेशक, उपसचिव जैसे 45 उच्च पदों पर लेटरल एंट्री से भर्ती का विज्ञापन निकाला था। केंद्र सरकार ने 2018-19 में यह योजना शुरू की थी और उसके बाद से यह सबसे बड़ी भर्ती प्रक्रिया थी। हालांकि, इस विज्ञापन पर सरकार ने मंगलवार को रोक लगा दी।

केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) चेयरमैन प्रीति सूदन को पत्र लिखकर विज्ञापन रद्द करने को कहा “ताकि कमजोर वर्गों को सरकारी सेवाओं में उनका उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।”

निर्णय की विपक्षी दलों ने की थी कड़ी आलोचना

इस निर्णय की विपक्षी दलों ने कड़ी आलोचना की थी। उनका दावा है कि इससे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के आरक्षण अधिकारों का हनन हुआ है।

केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री सिंह ने अपने पत्र में कहा कि पीएम नरेन्द्र मोदी के लिए सार्वजनिक रोजगार में आरक्षण “हमारे सामाजिक न्याय ढांचे की आधारशिला है जिसका उद्देश्य ऐतिहासिक अन्याय को दूर करना और समावेशिता को बढ़ावा देना है।”

सिंह ने कहा, “चूंकि इन पदों को विशिष्ट मानते हुए एकल-कैडर पद के रूप में नामित किया गया है, इसलिए इन नियुक्तियों में आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। माननीय प्रधानमंत्री के सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए, इस कदम की समीक्षा और सुधार की आवश्यकता है।”

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First Published - August 20, 2024 | 2:06 PM IST

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