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Electoral Bonds पर वाद-विवाद जारी, पूर्व वित्त सचिव ने SBI के पूरे प्रोसेस को गैरकानूनी बताया

भारतीय स्टेट बैंक चुनावी बांड बेचने और भुनाने के लिए अधिकृत एकमात्र बैंक था।

Last Updated- March 24, 2024 | 9:10 AM IST
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चुनावी बॉन्ड को लेकर देश में मामला काफी चर्चा का विषय रहा। मुद्दा देशी की सर्वोच्च अदालत तक पहुंचा और सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय स्टेट बैंक को देश भर की राजनैतिक पार्टियों द्वारा जुटाए गए इलेक्टोरल बॉन्ड को सार्वजनिक करने का आदेश दिया। एसबीआई ने सारा डेटा इलेक्शन कमीशन को सौंप दिया और अब ये सारी जानकारी 15 मार्च से इलेक्शन कमीशन की वेबसाइट पर मौजूद है।

लेकिन ये मुद्दा अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ। इसे लेकर अभी भी देश में घमासान देखने को मिल रहा है। इस बीच पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग ने चुनावी बॉन्ड मामले में स्टेट ऑफ बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के एक्शन को ‘पूरी तरह से गैरकानूनी और अप्रत्याशित’ बताया है।

अल्फा-न्यूमेरिक नंबरों को रिकॉर्ड नहीं करना चाहिए था

इंडियन एक्सप्रेस के साथ बात करते हुए गर्ग ने कहा कि बैंक को चुनावी बॉन्ड के यूनिक अल्फा-न्यूमेरिक नंबरों को रिकॉर्ड नहीं करना चाहिए था। आगे उन्होंने कहा, ‘ऐसा करके SBI ने चुनावी बॉन्ड योजना, 2018 के तहत दानदाताओं से किए गए गुमनामी के वादे का उल्लंघन किया है।’

गर्ग ने यह भी आरोप लगाया कि चुनावी बांड मामले के संबंध में एसबीआई द्वारा दायर पहला हलफनामा “स्पष्ट रूप से गलत” था। गर्ग का बयान चुनाव आयोग द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एसबीआई द्वारा प्रस्तुत संपूर्ण चुनावी बांड डेटा प्रकाशित करने के कुछ दिनों बाद आया है। ताजा डेटा में अल्फा-न्यूमेरिक नंबर शामिल हैं।

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भारतीय स्टेट बैंक चुनावी बांड बेचने और भुनाने के लिए अधिकृत एकमात्र बैंक था। बांड पहली बार मार्च 2018 में जारी किए गए थे और 15 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अमान्य घोषित किए जाने तक बेचे जा रहे थे।

First Published - March 24, 2024 | 9:10 AM IST

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