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Delhi dyeing unit: दिल्ली में डाइंग यूनिट पर सख्ती, 129 यूनिट सील

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प्रदूषण को रोकने के लिए दिल्ली सरकार की संबंधित एजेंसियों ने इन यूनिट का सर्वेक्षण कर प्रदूषण फैलाने वाली डाइंग यूनिट के खिलाफ कार्रवाई की है।  

Last Updated- December 20, 2023 | 5:11 PM IST
dyeing units
Representative Image

दिल्ली सरकार प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों पर सख्ती बरत रही है। दिल्ली में डाइंग यूनिट (खासकर जींस की रंगाई करने वाली इकाइयां) से प्रदूषण फैलने की शिकायतें मिल रही हैं। इन यूनिट से निकलने वाला दूषित पानी यमुना नदी में गिर रहा है। जिससे यमुना में प्रदूषण बढ़ रहा है। इस प्रदूषण को रोकने के लिए दिल्ली सरकार की संबंधित एजेंसियों ने इन यूनिट का सर्वेक्षण कर प्रदूषण फैलाने वाली डाइंग यूनिट के खिलाफ कार्रवाई की है।

 162 डाइंग यूनिट का सर्वेक्षण, 129 डाइंग यूनिट हुई सील
दिल्ली में डाइंग यूनिट से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी), दिल्ली नगर निगम (एमसीडी), राजस्व विभाग और बिजली वितरण कंपनियों की एक संयुक्त टीम बनाई गई थी। जिसने 28 अप्रैल से 3 दिसंबर के बीच नॉन कंफर्मिंग (non-conforming) औद्योगिक क्षेत्रों में डाइंग यूनिट का सर्वेक्षण और जांच की। इस टीम ने 162 डाइंग यूनिट का सर्वेक्षण किया। इनमें से बड़े पैमाने पर यूनिट प्रदूषण फैलाने की दोषी पाई गईं। इस टीम ने 129 डाइंग यूनिट को सील कर दिया है।
इसके साथ ही 27 यूनिट को नोटिस जारी किए हैं। सबसे ज्यादा ख्याला, विष्णु गार्डन और उसके आस पास के क्षेत्रों में 64 यूनिटों का सर्वेक्ष्ण किया गया और इनमें 59 यूनिट को सील किया गया है।
यह भी पढ़ें: UP Cabinet Meeting: यूपी में महंगी होगी शराब! दुकानों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने डीपीसीसी, एमसीडी व अन्य संबंधित एजेंसियों को दिल्ली में डाइंग यूनिट के गैर कानूनी तरीके से चलने के संबंध में जांच करने को कहा था। साथ ही उनसे कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी थी। दिल्ली में करावल नगर, मीठापुर,मटियाला, बिंदापुर, मुकुंदपुर, किराड़ी, गोकुलपुरी, ख्याला, विष्णु गार्डन आदि नॉन कंफर्मिंग औद्योगिक क्षेत्रों डाइंग यूनिट चल रही हैं। जिनमें खासकर जींस की रंगाई का काम होता है और इन यूनिट से निकलने वाला दूषित पानी प्रदूषण का कारण बन रहा है क्योंकि इन इकाइयों से निकलने वाली पानी का शोधन नहीं किया जा रहा है और इनसे बड़ी मात्रा में फॉस्फेट और अमोनिया निकलता है, जो सीधे स्थानीय नालों में छोड़ा जाता है। यहां यह यमुना नदी में चला जाता है। जिसकी यमुना नदी में जहरीले झाग निर्माण में बड़ी भूमिका रहती है।

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First Published - December 20, 2023 | 5:11 PM IST

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