दिल्ली जल बोर्ड (DJB) का वित्तीय घाटा 2019-20 के 344.05 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2021-22 में 1,196.22 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। वहीं बोर्ड पर 73,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि DJB का घाटा 2022-23 में 854.86 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। DJB को वित्त वर्ष 2019-20 में 344.05 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था, जो 2021-22 में बढ़कर 1,196.22 करोड़ रुपये हो गया। DJB पर अभी कर्ज 73,196.55 करोड़ रुपये है, जिसमें 35,829.96 करोड़ रुपये का ब्याज और 37,366.59 करोड़ रुपये की मूल राशि शामिल है।
उपभोक्ताओं की संख्या वित्त वर्ष 2014-15 में 18,94,096 से वित्त वर्ष 2022-23 में बढ़कर 27,64,089 हो गई है।
आंकड़ों के अनुसार, DJB ने 2019-20, 2020-21, 2021-22 और 2022-23 वित्त वर्षों में क्रमशः 1,668.26 करोड़ रुपये, 1,764.57 करोड़ रुपये, 1,448.10 करोड़ रुपये और 1,827.42 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया।
DJB के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में उपभोक्ताओं की संख्या में वृद्धि हुई है। दिल्ली सरकार शहर के प्रत्येक घर को 20,000 लीटर मुफ्त पानी उपलब्ध कराती है। अधिकारियों ने बताया कि यह लागत सरकार द्वारा वहन की जाती है। समय-समय पर राजस्व घटने का कारण प्रवर्तन की कमी, खराब मीटर और अवैध कनेक्शन है।
दिल्ली सरकार ने विधानसभा को सूचित किया कि DJB के खातों का ऑडिट 31 मार्च, 2018 तक किया गया है, जबकि 31 मार्च, 2022 तक का प्रदर्शन ऑडिट पूरा हो चुका है।
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की प्रधान महालेखाकार (ऑडिट) इकाई DJB के खातों का ऑडिट करती है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस महीने की शुरुआत में पिछले 15 साल के DJB खातों के कैग से ऑडिट का निर्देश दिया था।
फंड जारी करने को लेकर खींचतान के बीच दिल्ली सरकार के वित्त विभाग ने 11 दिसंबर को DJB की करीब 70 परियोजनाओं के लिए उसे 535 करोड़ रुपये जारी किए थे।
दिल्ली की जल मंत्री आतिशी ने पिछले महीने दावा किया था कि वित्त विभाग द्वारा DJB की धनराशि रोके जाने से राष्ट्रीय राजधानी ‘‘मानव निर्मित जल संकट’’ से जूझ रही है और उन्होंने उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी।