Delhi Air Pollution: देश की राजधानी दिल्ली वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर से जूझ रही है। 3 जनवरी को सुबह वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 348 पर पहुंच गया। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के अन्य शहरों में भी वायु गुणवत्ता खराब है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में AQI रीडिंग क्रमशः 253, 291, 285, 252 और 214 है।
दिल्ली के भीतर, अलग-अलग जगहों पर स्थानीय AQI स्तर और भी निराशाजनक स्तर पर पहुंच गया है। अशोक विहार में AQI 366, आईटीओ में AQI 356 और दक्षिण पूर्वी दिल्ली में AQI 371 दर्ज किया गया, जिसे बहुत “बहुत खराब” में माना जाता है। राष्ट्रीय राजधानी में सप्ताह की शुरुआत वायु गुणवत्ता में अस्थायी सुधार के साथ हुई, जो सोमवार (1 जनवरी) को भारी बारिश के बाद “मध्यम” श्रेणी में चली गई। हालांकि, यह राहत काफी कम समय के लिए रहा, क्योंकि AQI लगातार खराब होता गया और गुरुवार को वापस “खराब” श्रेणी में आ गया।
पूरे 2024 में, दिल्ली ने 2022 के बाद से सबसे अधिक “गंभीर” AQI दर्ज किया, जिसमें 17 दिन AQI 400 से ऊपर रहा। इसके अलावा, बीते 70 दिनों में दिल्ली की हवा “बहुत खराब” श्रेणी में रही, जो पर्यावरण और स्वास्थ्य संकट के लिहाज से बहुत खतरनाक है। साल 2024 में एक भी दिन वायु गुणवत्ता “अच्छी” नहीं रही। ऐसा 2018 के बाद पहली बार हुआ।
शुक्रवार की सुबह दिल्ली में घना कोहरा भी छाया रहा, जिससे वायु प्रदूषण की चुनौतियां और बढ़ गईं। दृश्यता बहुत कम हो गई, क्योंकि अक्षरधाम, लोधी रोड और शंकर रोड जैसे प्रमुख क्षेत्रों में घना कोहरा छाया रहा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पूर्वानुमान लगाया है कि इस पूरा सप्ताह में बहुत घना कोहरा छाया रहेगा, जिससे राष्ट्रीय राजधानी में अगले कुछ दिनों तक शीत लहर चलने की संभावना है।
खतरनाक वायु गुणवत्ता को देखते हुए दिल्ली-NCR के लोगों को बाहरी गतिविधियों को कम से कम करने की सलाह दी गई है। खास तौर पर सुबह और देर शाम के समय जब प्रदूषण का स्तर चरम पर होता है। विशेषज्ञ घर के अंदर मास्क और एयर प्यूरीफायर का उपयोग करने और खराब हवा वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह देते हैं। प्रदूषित हवा के संपर्क में लंबे समय तक रहने से श्वसन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं और स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा हो सकते हैं।
चूंकि दिल्ली वायु प्रदूषण और और अत्यंत शीतलहर की दोहरी चुनौतियों का सामना कर रही है, इसलिए स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने और पर्यावरण की स्थिति में सुधार करने के लिए तत्काल उपाय करने की जरूरत है।